28 अक्टूबर 2026
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यूपी एमएलसी चुनाव नतीजे: मेरठ-बरेली में BJP की जीत, वाराणसी में सपा ने मारी बाजी

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यूपी एमएलसी चुनाव नतीजे: मेरठ-बरेली में BJP की जीत, वाराणसी में सपा ने मारी बाजी

सारांश

यूपी एमएलसी चुनावों में BJP ने मेरठ और बरेली पर कब्ज़ा बरकरार रखा, लेकिन वाराणसी में सपा ने बड़ी जीत दर्ज की। BJP सांसद मुकेश राजपूत ने जनादेश का सम्मान करते हुए हारी सीटों पर समीक्षा का वादा किया, जबकि सपा ने मतगणना में देरी का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

मेरठ और बरेली विधान परिषद सीटों पर BJP ने जीत दर्ज की।
वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने निर्णायक जीत हासिल की।
लोकसभा सांसद मुकेश राजपूत ने हारी सीटों पर पार्टी समीक्षा और आगे की तैयारी का वादा किया।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने मतगणना को कथित तौर पर जानबूझकर धीमा करने का आरोप लगाया।
चुनाव नतीजों को 2027 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की स्थिति का संकेतक माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के स्नातक और शिक्षक विधान परिषद चुनावों के नतीजे 28 अक्टूबर 2026 को सामने आए, जिनमें मेरठ और बरेली सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज की, जबकि वाराणसी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने निर्णायक बढ़त हासिल की। इन नतीजों पर दोनों प्रमुख दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।

मुकेश राजपूत का बयान

लोकसभा सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है। उन्होंने जीत दर्ज करने वाले सभी उम्मीदवारों को बधाई दी और हार वाली सीटों पर पार्टी की समीक्षा प्रक्रिया का भरोसा दिलाया।

राजपूत ने कहा, 'भाजपा हमेशा से जनता के जनादेश का सम्मान करती आई है। जहां हमारी सीटें हारी हैं, वहां पार्टी के लोग बैठकर समीक्षा करेंगे और आगे की तैयारी करेंगे कि कैसे उन सीटों को जीता जाए। जो उम्मीदवार जीते हैं, उन्हें मेरी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं। हम सब लोग मिलकर उन सीटों को जीतने का पूरा प्रयास करेंगे।'

सपा प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता मजबूती से डटे रहे और उन्होंने निष्पक्ष चुनाव एवं निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भरोसा जताया कि जहां मतगणना अभी बाकी है, वहां भी सपा की जीत होगी।

चांद ने यह भी आरोप लगाया कि इस चुनाव में मतगणना को कथित तौर पर जानबूझकर धीमा किया गया — सुबह से शाम तक केवल बंडल बनाए जाते रहे और वोटों की वास्तविक गिनती देर रात तक शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि गिनती शुरू होने के बाद भी उसे धीमा रखा गया।

चुनावी परिदृश्य

यूपी विधान परिषद के ये चुनाव स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए थे, जहाँ मतदाताओं में शिक्षक और स्नातक मतदाता शामिल होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि एमएलसी चुनावों के नतीजे अक्सर राज्य की राजनीतिक नब्ज़ को नापने का पैमाना माने जाते हैं।

आगे की तैयारी

BJP ने संकेत दिया है कि हारी हुई सीटों पर आंतरिक समीक्षा बैठकें होंगी और रणनीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। सपा ने कहा है कि मतगणना के अंतिम आंकड़े सामने आने पर वह विस्तृत प्रतिक्रिया देगी। दोनों दलों की नज़र अब शेष सीटों की मतगणना पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सपा ने पूर्वांचल के गढ़ वाराणसी में ज़मीन दिखाई। गौरतलब है कि एमएलसी चुनावों में शिक्षक और स्नातक मतदाता होते हैं जो आमतौर पर अधिक सजग और स्वतंत्र माने जाते हैं — इसलिए इनके नतीजे विधानसभा जनादेश से भिन्न हो सकते हैं। सपा का मतगणना-देरी का आरोप एक बार फिर उस पुराने विवाद को उठाता है जो हर बड़े चुनाव में सामने आता है — इसकी स्वतंत्र जाँच ही इसे तथ्य या राजनीतिक आख्यान के रूप में स्थापित करेगी।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एमएलसी चुनाव 2026 में किसे जीत मिली?
मेरठ और बरेली विधान परिषद सीटों पर BJP ने जीत दर्ज की, जबकि वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की। कुछ सीटों की मतगणना अभी जारी बताई जा रही है।
BJP सांसद मुकेश राजपूत ने नतीजों पर क्या कहा?
लोकसभा सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि BJP जनता के जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने जीते हुए उम्मीदवारों को बधाई दी और हारी सीटों पर पार्टी स्तर पर समीक्षा बैठकें कर आगे की रणनीति तैयार करने का वादा किया।
सपा ने मतगणना पर क्या आरोप लगाए?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि मतगणना को कथित तौर पर जानबूझकर धीमा किया गया — सुबह से शाम तक बंडल बनाए जाते रहे और वास्तविक मतगणना देर रात तक शुरू नहीं हुई। यह आरोप सपा की तरफ से है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यूपी एमएलसी चुनाव क्या होते हैं?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में स्नातक मतदाता और शिक्षक मतदाता वोट डालते हैं। ये चुनाव विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं और राज्य की राजनीतिक हवा के संकेतक माने जाते हैं।
इन नतीजों का 2027 यूपी विधानसभा चुनाव पर क्या असर होगा?
विश्लेषक इन नतीजों को 2027 विधानसभा चुनावों से पहले दोनों प्रमुख दलों — BJP और सपा — की ज़मीनी स्थिति का संकेत मान रहे हैं। मिले-जुले नतीजे बताते हैं कि किसी एक दल का राज्यव्यापी एकछत्र दबदबा नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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