वाराणसी शिक्षक MLC सीट: सपा के लाल बिहारी यादव ने 5,015 मतों से BJP को हराया, लगातार दूसरी जीत
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों के अंतर से पराजित किया। यह जीत न केवल सपा के लिए बल्कि उत्तर प्रदेश के शिक्षक राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मतगणना के आंकड़े
मतगणना के अनुसार लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी डॉ. प्रमोद मिश्रा को 6,597 मत मिले। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में यादव ने लगभग एक हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि इस बार जीत का अंतर बढ़कर पाँच हजार से अधिक हो गया — जो शिक्षक मतदाताओं के बीच उनकी बढ़ती स्वीकार्यता का स्पष्ट संकेत है।
जीत पर उत्साह और जश्न
परिणाम घोषित होते ही सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने वाराणसी में जोरदार जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और पार्टी के समर्थन में नारे लगाए। ढोल-नगाड़ों की धुन पर समर्थक देर रात तक झूमते रहे।
शिक्षकों के मुद्दे रहे केंद्र में
विजयी उम्मीदवार लाल बिहारी यादव ने जीत के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जीत अखिलेश यादव की नीतियों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का परिणाम है। यादव ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, गैर-वित्तपोषित शिक्षकों के मानदेय, सहायता प्राप्त एवं सरकारी स्कूलों की सेवा शर्तों, अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों में मानदेय तथा डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर आधारित परीक्षाओं के विरोध को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों में गिनाया।
सरकार बनाने का भरोसा, वादों की याद
यादव ने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करेंगे। उन्होंने कहा, 'सपा की सरकार शिक्षकों के साथ खड़ी है, इसलिए दूसरी बार भी इन लोगों ने मुझे जिताया है — मैंने इनसे जो वादा किया है उसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास करूंगा।' यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में शिक्षक वर्ग पुरानी पेंशन योजना और सेवा शर्तों को लेकर लगातार मुखर है।
आगे क्या
गौरतलब है कि शिक्षक MLC सीटें उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शिक्षक समुदाय का सीधा प्रतिनिधित्व करती हैं और इन सीटों पर जीत-हार को सत्तारूढ़ दल के प्रति शिक्षक वर्ग के रुझान का बैरोमीटर माना जाता है। इस परिणाम के बाद सपा के लिए वाराणसी और आसपास के क्षेत्र में शिक्षक राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत होती दिखती है।