28 अक्टूबर पंचांग: अमृतकाल सुबह 11:14 से 12:41 बजे तक, जानें शुभ-अशुभ समय और ग्रह स्थिति
सारांश
मुख्य बातें
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि तड़के 4:07 बजे से आरंभ होकर गुरुवार की रात 1:06 बजे तक रहेगी। इस दिन सूर्यदेव तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में संचार करेंगे। शुभ कार्यों की योजना बना रहे लोगों के लिए यह दिन कई महत्त्वपूर्ण मुहूर्त लेकर आ रहा है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:33 बजे और सूर्यास्त शाम 5:47 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 7:31 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 9:47 बजे होगा। तृतीया तिथि के समापन के पश्चात कृष्ण पक्ष चतुर्थी प्रारंभ होगी, जो 29 अक्टूबर की रात 10:10 बजे तक रहेगी।
शुभ मुहूर्त — अमृतकाल और अभिजीत मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, बुधवार को अमृतकाल सुबह 11:14 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण समयावधि होती है, जिसमें नया व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ एवं महत्त्वपूर्ण यात्रा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
इसी क्रम में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। यह दिन का आठवाँ और सर्वाधिक शुभ मुहूर्त माना गया है — जब सूर्य ठीक शीर्ष पर होते हैं। मान्यता है कि इस कालखंड में किए गए कार्यों के समस्त अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
योग और नक्षत्र स्थिति
बुधवार को सुबह 7:18 बजे तक व्यतिपात योग रहेगा। इसके पश्चात वरीयान योग प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में वरीयान योग को पंचांग के 27 नित्य योगों में से 18वाँ योग माना गया है, जिसके अधिपति देवता कुबेर हैं। यह योग सुख-सुविधा, ऐश्वर्य और आर्थिक सफलता का प्रतीक कहलाता है।
सूर्यदेव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे, जिसके अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) और स्वामी राहु हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति से लोगों में पुरानी बाधाओं से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रवृत्ति प्रबल होती है।
अशुभ काल — राहुकाल, यमगंड और गुलिक
इस दिन राहुकाल दोपहर 12:10 बजे से 1:34 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को नए या शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है; हालाँकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल सुबह 7:58 बजे से 9:22 बजे तक रहेगा। यह काल मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है और इस दौरान नया व्यापार, यात्रा तथा धन-लेनदेन टालने की सलाह दी जाती है। इसके अतिरिक्त गुलिक काल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। गुलिक को 'विषैला समय' भी कहा जाता है, किंतु इस काल में बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना शुभ माना गया है।
ग्रह स्थिति — सूर्य तुला में, चंद्रमा वृषभ में
ज्योतिष के अनुसार, तुला राशि में सूर्य का होना 'नीचस्थ' स्थिति कहलाती है। सूर्य अग्नि तत्व के कारक हैं, जबकि तुला वायु तत्व और शुक्र के अधीन है — दोनों का स्वभाव परस्पर विपरीत माना जाता है। इस स्थिति में आत्मबल और निर्णय-क्षमता में कुछ शिथिलता महसूस हो सकती है।
वहीं चंद्रमा वृषभ राशि में संपूर्ण दिन रहेंगे, जो ज्योतिष में चंद्रमा की उच्च राशि मानी जाती है। वृषभ के स्वामी शुक्र हैं। इस स्थिति में मन शांत, स्थिर और भावनात्मक रूप से संतुलित रहता है।
दिशाशूल इस दिन उत्तर दिशा में रहेगा, इसलिए ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा में यात्रा आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। कुल मिलाकर, 28 अक्टूबर को शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग करते हुए अशुभ कालों में नए कार्यों से परहेज करना उचित रहेगा।