खंडवा में अंतरधार्मिक विवाह के बाद युवती को जबरन उठाने का आरोप, पति ने पुलिस से माँगी सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के खंडवा में 27 अक्टूबर 2026 को एक अंतरधार्मिक विवाह के बाद विवाद का मामला सामने आया है, जिसमें एक हिंदू युवक ने आरोप लगाया है कि उसकी मुस्लिम पत्नी को उसके परिजनों ने जबरन उठाकर अपने साथ ले गए। युवक ने खंडवा कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मारपीट तथा पत्नी के अपहरण का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जाँच जारी है और युवती की तलाश की जा रही है।
घटनाक्रम: कैसे हुई पूरी घटना
आरोपों के अनुसार, युवक और युवती दोनों खंडवा जिले के ही निवासी हैं। बताया जा रहा है कि दोनों पिछले कई दिनों से इंदौर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। मंगलवार दोपहर दोनों ने खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में विवाह संपन्न किया। इसके बाद वे विवाह के वैधानिक दस्तावेज तैयार कराने के लिए मालीकुआं क्षेत्र स्थित एक नोटरी कार्यालय पहुँचे थे।
आरोप है कि उसी दौरान युवती के परिवार के 8 से 10 लोग वहाँ पहुँच गए, युवती को जबरन कार में बैठाया और अपने साथ ले गए। युवक के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोग युवती को ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
पुलिस में शिकायत और दस्तावेज
घटना के तुरंत बाद युवक कोतवाली थाने पहुँचा और पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। उसने लिव-इन रिलेशनशिप तथा विवाह से संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए। युवक ने अपनी और पत्नी की सुरक्षा की माँग करते हुए युवती को वापस लाने की गुहार लगाई है। मंदिर में विवाह के दौरान मौजूद संरक्षक अशोक पालीवाल भी युवक के साथ थाने पहुँचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी।
पुलिस की प्रतिक्रिया
डीएसपी (मुख्यालय) दुर्गेश आर्मो ने बताया कि घटना से संबंधित एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ लोग युवती को अपने साथ ले जाते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज की गई है और उसकी जाँच की जा रही है। युवती के परिजनों से संपर्क किया जा रहा है और उसे ढूँढने के प्रयास जारी हैं।
आगे क्या होगा
डीएसपी आर्मो के अनुसार, युवती के मिलने के बाद न्यायालय के समक्ष उसके बयान दर्ज कराए जाएँगे। युवती के बयान और जाँच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि युवती का पक्ष सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। यह मामला अंतरधार्मिक विवाह और परिवार की सहमति से जुड़े उन संवेदनशील प्रकरणों की श्रेणी में आता है, जिनमें न्यायपालिका ने बार-बार व्यक्तिगत स्वायत्तता के अधिकार को प्राथमिकता दी है।