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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया महाभारत का सुभाषित: तप, त्याग और सत्य से मिलती है सच्ची सफलता

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया महाभारत का सुभाषित: तप, त्याग और सत्य से मिलती है सच्ची सफलता

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने महाभारत के शांतिपर्व का एक संस्कृत श्लोक एक्स पर साझा किया, जो मन, वाणी और आचरण में संयम को सच्ची सफलता की कुंजी बताता है। तप, त्याग और सत्य — ये तीन मूल्य ही श्रेष्ठ उपलब्धियों का मार्ग हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर 2026 को एक्स पर महाभारत के शांतिपर्व से संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: वाणी और मन का संयम , तप , त्याग और सत्य — ये चारों गुण जीवन की सभी श्रेष्ठ उपलब्धियाँ दिलाते हैं।
गीता प्रेस प्रकाशित 'गीतार्थ संग्रह' सहित कई शास्त्रीय संकलनों में यह श्लोक उद्धृत है।
श्लोक का मूल संदेश है कि वास्तविक सफलता आंतरिक अनुशासन से आती है, बाहरी साधनों से नहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें मन और वाणी के संयम को जीवन की सर्वोच्च उपलब्धियों का आधार बताया गया है। यह श्लोक प्रसिद्ध ग्रंथ महाभारत के शांतिपर्व से लिया गया है और आंतरिक अनुशासन की महत्ता को रेखांकित करता है।

कौन-सा श्लोक साझा किया गया

मोदी ने संस्कृत का यह श्लोक पोस्ट किया — 'यस्य वाङ्मनसी स्यातां सम्यक् प्रणिहिते सदा। तपस्त्यागश्च सत्यं च स वै सर्वमवाप्नुयात्॥' इसका हिंदी भावार्थ है: जिस मनुष्य की वाणी और मन दोनों सदा भली-भाँति संयमित और एकाग्र रहते हैं, जिसका जीवन तप, त्याग और सत्य से संपन्न है, वह निश्चय ही जीवन की सभी श्रेष्ठ उपलब्धियाँ प्राप्त करता है।

गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित 'गीतार्थ संग्रह' जैसे संकलनों में भी इस श्लोक का उल्लेख मिलता है, जो इसकी शास्त्रीय प्रामाणिकता को पुष्ट करता है।

श्लोक की मूल शिक्षाएँ

इस सुभाषित में कई स्तरों पर जीवन-मार्गदर्शन समाहित है। वाणी का संयम — कटु वचन से परहेज और सदा हितकर व मधुर बोलना। मन की एकाग्रता — भटकते मन को सकारात्मक दिशा में स्थिर करना, और मन व वाणी में एकरूपता रखना।

तपस्या का अर्थ है अपने लक्ष्य के लिए अनथक प्रयास करना, कष्टों को सहते हुए अनुशासित जीवन जीना। त्याग का अर्थ है स्वार्थ, अहंकार और बुरी आदतों को छोड़ना — दूसरों की भलाई के लिए व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का बलिदान देना। सत्य का अर्थ है आचरण और विचारों में पूर्ण ईमानदारी।

संदेश का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में आंतरिक मूल्यों की चर्चा पुनः प्रासंगिक हो रही है। गौरतलब है कि मोदी समय-समय पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों से उद्धरण साझा करते रहे हैं — यह उनकी सांस्कृतिक संवाद-शैली का अभिन्न हिस्सा है।

श्लोक यह संकेत देता है कि वास्तविक शक्ति और सफलता किसी बाहरी साधन से नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन से उत्पन्न होती है। जिसने अपने मन, वाणी और आचरण को सत्य व तप के मार्ग पर ढाल लिया, उसके लिए कोई लक्ष्य असंभव नहीं रह जाता।

आम जनता पर असर

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पर साझा किए गए ऐसे सुभाषित प्रायः व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचते हैं और भारतीय दर्शन में रुचि रखने वाले युवाओं के बीच विशेष रूप से चर्चित होते हैं। महाभारत के शांतिपर्व से लिया गया यह श्लोक विद्यार्थियों, साधकों और पेशेवरों — सभी के लिए समान रूप से प्रासंगिक है।

यह पोस्ट भारत की उस समृद्ध ज्ञान-परंपरा की याद दिलाती है जो हजारों वर्षों से जीवन-प्रबंधन का मार्गदर्शन करती आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक विशिष्ट राजनीतिक पहचान को सुदृढ़ करने का माध्यम भी है। महाभारत के शांतिपर्व से लिया यह श्लोक आंतरिक अनुशासन की बात करता है, परंतु मुख्यधारा की कवरेज प्रायः यह नहीं पूछती कि ऐसे संदेशों को किस राजनीतिक संदर्भ में चुना जाता है। जो उल्लेखनीय है वह यह है कि ये पोस्ट करोड़ों अनुयायियों तक भारतीय दर्शन की पहुँच बढ़ाते हैं — यह सांस्कृतिक साक्षरता के नजरिए से एक सकारात्मक परिघटना है, चाहे इसकी राजनीतिक व्याख्या कोई भी करे।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने एक्स पर कौन-सा सुभाषित साझा किया?
मोदी ने महाभारत के शांतिपर्व से संस्कृत श्लोक 'यस्य वाङ्मनसी स्यातां सम्यक् प्रणिहिते सदा। तपस्त्यागश्च सत्यं च स वै सर्वमवाप्नुयात्॥' साझा किया। इसका भावार्थ है कि जिसकी वाणी और मन संयमित हों तथा जीवन तप, त्याग और सत्य से युक्त हो, वह सभी श्रेष्ठ उपलब्धियाँ प्राप्त करता है।
यह श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह श्लोक महाभारत के शांतिपर्व से लिया गया है। गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित 'गीतार्थ संग्रह' जैसे शास्त्रीय संकलनों में भी इसका उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्रामाणिकता को पुष्ट करता है।
इस श्लोक में तप, त्याग और सत्य का क्या अर्थ बताया गया है?
तप का अर्थ है अपने लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास और अनुशासित जीवन; त्याग का अर्थ है स्वार्थ और अहंकार को छोड़कर दूसरों की भलाई के लिए बलिदान देना; और सत्य का अर्थ है आचरण व विचारों में पूर्ण ईमानदारी। श्लोक के अनुसार इन तीनों के साथ मन और वाणी का संयम भी आवश्यक है।
मोदी ने यह पोस्ट कब किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुभाषित मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया।
इस श्लोक की मुख्य सीख क्या है?
श्लोक की मुख्य सीख यह है कि वास्तविक शक्ति और सफलता बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन से मिलती है। जो व्यक्ति अपने मन, वाणी और आचरण को सत्य व तप के मार्ग पर ढाल लेता है, उसके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
राष्ट्र प्रेस
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