3 नवंबर 2026
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मेजर सोमनाथ शर्मा बलिदान दिवस: देश के पहले परमवीर चक्र विजेता को नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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मेजर सोमनाथ शर्मा बलिदान दिवस: देश के पहले परमवीर चक्र विजेता को नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के बलिदान दिवस पर 3 नवंबर को देशभर के नेताओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 1947 में बड़गाम की लड़ाई में घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक लड़ने वाले इस वीर की गाथा आज भी राष्ट्र को प्रेरित करती है।

मुख्य बातें

मेजर सोमनाथ शर्मा ने 3 नवंबर 1947 को बड़गाम, जम्मू-कश्मीर में सर्वोच्च बलिदान दिया और भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता बने।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने उन्हें 'अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक' बताया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई मुख्यमंत्रियों ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्रियों और उत्तराखंड BJP ने भी सोशल मीडिया पर नमन किया।
बड़गाम युद्ध में मेजर शर्मा ने श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा में निर्णायक भूमिका निभाई, जो कश्मीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।

मेजर सोमनाथ शर्मा — 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बड़गाम की लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान देने वाले और भारत के प्रथम परमवीर चक्र से सम्मानित वीर — के बलिदान दिवस पर 3 नवंबर 2026 को देशभर के राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तक — सभी ने उनके अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा को नमन किया।

मेजर सोमनाथ शर्मा: एक अमर गाथा

मेजर सोमनाथ शर्मा ने 3 नवंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में पाकिस्तानी कबाइली हमलावरों के विरुद्ध असाधारण युद्धकौशल का प्रदर्शन किया। एक हाथ में प्लास्टर बंधी चोट के बावजूद वे अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते रहे और अंतिम सांस तक मोर्चे पर डटे रहे। उनकी वीरता और बलिदान को देखते हुए स्वतंत्र भारत ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया — और वे इस सर्वोच्च वीरता पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता बने।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की श्रद्धांजलि

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'अदम्य साहस, अद्वितीय वीरता और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण के प्रतीक, भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा जी के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन।' उन्होंने आगे कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मेजर शर्मा अंतिम सांस तक अपने सैनिकों का नेतृत्व करते हुए दुश्मन के सामने अडिग रहे और उनका बलिदान पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों ने किया नमन

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, '1947 में बड़गाम के ऐतिहासिक युद्ध में आपने अंतिम सांस और अंतिम गोली तक जिस वीरता से मातृभूमि की रक्षा की, उसकी गाथा युगों-युगों तक प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्र-सेवा की अलख जगाती रहेगी।' बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मेजर शर्मा का अदम्य शौर्य और समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मेजर शर्मा की कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को अतुलनीय बताया। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भी एक्स पोस्ट के माध्यम से शहीद मेजर को नमन किया।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मेजर शर्मा को 'प्रथम भारत-पाक युद्ध के महान योद्धा' बताते हुए कहा कि उनका शौर्य, समर्पण एवं बलिदान राष्ट्रभक्ति की शाश्वत प्रेरणा है।

विधानसभा अध्यक्ष और पार्टी नेताओं की भावांजलि

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेजर सोमनाथ शर्मा का शौर्य और समर्पण भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि उनका जीवन भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी एक्स पर पोस्ट कर मेजर शर्मा को 'मां भारती की रक्षा में जीवन समर्पित करने वाले' वीर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

बलिदान का ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि 3 नवंबर 1947 को हुई बड़गाम की लड़ाई उस निर्णायक दौर में लड़ी गई थी जब पाकिस्तान समर्थित कबाइली लड़ाकों ने श्रीनगर हवाई अड्डे की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। मेजर शर्मा की टुकड़ी ने उस आक्रमण को रोककर हवाई अड्डे की रक्षा की, जिससे भारतीय सेना के लिए रसद और सुदृढ़ीकरण संभव हो सका। यह बलिदान केवल एक व्यक्ति की वीरता नहीं, बल्कि कश्मीर के भारत में विलय की रक्षा का निर्णायक क्षण था। उनकी शहादत के 79 वर्ष बाद भी यह दिन राष्ट्रीय स्मृति में उतनी ही गहराई से अंकित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके बिना भारतीय सेना का कश्मीर में टिकना असंभव होता। आज जब भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव और कश्मीर की भू-राजनीति समसामयिक बहस के केंद्र में हैं, तब इस बलिदान का स्मरण केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक इतिहास की याद दिलाना भी है। नेताओं की श्रद्धांजलियाँ स्वागतयोग्य हैं, पर यह भी ज़रूरी है कि युवा पीढ़ी तक इस वीरगाथा का ऐतिहासिक विस्तार पाठ्यक्रमों और राष्ट्रीय स्मारकों के माध्यम से पहुँचे।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेजर सोमनाथ शर्मा कौन थे और उन्हें परमवीर चक्र क्यों दिया गया?
मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना के अधिकारी थे, जिन्होंने 3 नवंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में पाकिस्तान समर्थित कबाइली हमलावरों के विरुद्ध असाधारण वीरता दिखाई और सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया और वे इस पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता बने।
बड़गाम की लड़ाई 1947 में क्यों महत्वपूर्ण थी?
बड़गाम की लड़ाई श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा के लिए लड़ी गई थी, जो भारतीय सेना की कश्मीर में रसद और सुदृढ़ीकरण के लिए अनिवार्य था। मेजर शर्मा की टुकड़ी ने पाकिस्तान समर्थित कबाइली आक्रमणकारियों को रोककर हवाई अड्डे की रक्षा की, जिससे कश्मीर की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।
3 नवंबर 2026 को किन-किन नेताओं ने मेजर सोमनाथ शर्मा को श्रद्धांजलि दी?
3 नवंबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा तथा बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी सहित कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी।
परमवीर चक्र पुरस्कार क्या है और यह किसे दिया जाता है?
परमवीर चक्र भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है, जो दुश्मन के सामने असाधारण शौर्य दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है। यह पुरस्कार जीवित या मरणोपरांत प्रदान किया जा सकता है और मेजर सोमनाथ शर्मा इसके पहले प्राप्तकर्ता थे।
मेजर सोमनाथ शर्मा का बलिदान दिवस कब मनाया जाता है?
मेजर सोमनाथ शर्मा का बलिदान दिवस प्रतिवर्ष 3 नवंबर को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1947 में उन्होंने बड़गाम की लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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