80वें शौर्य दिवस पर राजनाथ सिंह ने इन्फैंट्री के जवानों को किया नमन, 1947 की वीरगाथा को किया याद
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 अक्टूबर 2026 को 80वें शौर्य दिवस पर भारतीय सेना की इन्फैंट्री के अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वर्ष 1947 के ऐतिहासिक रणक्षेत्रों से लेकर आज की चुनौतीपूर्ण सीमाओं तक, इन्फैंट्री के जवानों ने हर विषम परिस्थिति में मातृभूमि की रक्षा की है।
27 अक्टूबर 1947 — शौर्य दिवस का ऐतिहासिक महत्त्व
गौरतलब है कि ठीक 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना की इन्फैंट्री के जवान श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे थे और पाकिस्तानी घुसपैठियों से कश्मीर की रक्षा की थी। यह वह ऐतिहासिक क्षण था जिसने कश्मीर को भारत के साथ बनाए रखा। तब से प्रत्येक वर्ष यह दिन इन्फैंट्री की वीरता के स्मरण में शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
रक्षा मंत्री के उद्गार
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी राष्ट्र को इन्फैंट्री की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ी, वीर जवान पूरी दृढ़ता के साथ मोर्चे पर डटे रहे और सर्वोच्च बलिदान देने से कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा, 'इन्फैंट्री के जवानों का कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण, असाधारण साहस और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने का जज्बा भारतीय सशस्त्र बलों की सबसे गौरवशाली परंपराओं का प्रतीक है।' उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र अपनी इन्फैंट्री पर अपार गर्व करता है और उनकी सेवा तथा बलिदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा।
थल सेना और वायु सेना का संयुक्त सम्मान
थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और भारतीय सेना के सभी रैंकों ने भी 80वें शौर्य दिवस पर इन्फैंट्री के सेवारत जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। भारतीय वायु सेना ने भी इस अवसर पर इन्फैंट्री के जवानों और उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। तीनों सेनाओं की यह साझा अभिव्यक्ति आपसी सम्मान और राष्ट्र-रक्षा के साझे संकल्प को रेखांकित करती है।
इन्फैंट्री की भूमिका और विरासत
'इन्फैंट्री – द अल्टीमेट' के गौरवपूर्ण ध्येय के साथ यह दिवस उन बहादुर जवानों के साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करने का अवसर है जो हर चुनौती का सामना करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन वीर सैनिकों ने कठिनतम परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है और उनका साहस व समर्पण भारतीय सेना की ताकत का अटूट आधार है।
आगे की राह
शौर्य दिवस केवल स्मरण का पर्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सतर्कता का स्तर ऊँचा बना हुआ है। भारतीय सेना की इन्फैंट्री का यह गौरव-दिवस आने वाले वर्षों में भी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना रहेगा।