श्रीनगर में ईडी की बड़ी कार्रवाई: आतंकी फंडिंग केस में लश्कर-ए-तैयबा के कथित ओजीडब्ल्यू के 4 ठिकानों पर छापा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 नवंबर 2026 को श्रीनगर में आतंकी फंडिंग मामले में बड़ी तलाशी कार्रवाई की है। ईडी के श्रीनगर जोनल ऑफिस ने शहर के चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। यह कार्रवाई कथित रूप से प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) के रूप में काम करने वाले उमर आदिल डार और उसके सहयोगियों से जुड़े मामले में की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
जाँच एजेंसी के अनुसार, उमर आदिल डार पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर सक्रिय था और संगठन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहा। कथित तौर पर उसे पहले भारी मात्रा में नकदी और प्रतिबंधित संगठन से संबंधित आपत्तिजनक साहित्य के साथ उसके साथियों सहित पकड़ा जा चुका है। गौरतलब है कि डार जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और भारत-विरोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के चलते पहले भी लगभग चार वर्षों तक जेल में रह चुका है।
छापेमारी के उद्देश्य
ईडी की यह तलाशी कार्रवाई कई मोर्चों पर साक्ष्य एकत्र करने के लिए की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी का लक्ष्य अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता लगाना, वित्तीय नेटवर्क और फंडिंग चैनलों की पहचान करना, तथा सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स के साथ डार के संबंधों से जुड़े और सबूत जुटाना है। इस कार्रवाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अंजाम दिया जा रहा है।
ईडी की हालिया कार्रवाइयों का सिलसिला
यह छापेमारी ऐसे समय में आई है जब ईडी ने देशभर में एक के बाद एक बड़ी कार्रवाइयाँ की हैं। इससे पहले 2 नवंबर 2026 को एजेंसी ने सॉफ्टवेयर आयात की आड़ में विदेशों में अवैध रूप से धन भेजने के मामले में दिल्ली और कोलकाता के सात ठिकानों पर छापा मारा था। उस कार्रवाई में ₹47 लाख नकद और विदेशी मुद्रा जब्त की गई थी। ईडी के विशाखापत्तनम सब-जोनल कार्यालय द्वारा की गई उस कार्रवाई में अपराध से अर्जित धन की प्रारंभिक अनुमानित राशि करीब ₹1,500 करोड़ बताई गई थी।
व्यापक संदर्भ और असर
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के वित्तीय ढाँचे पर शिकंजा कसने के प्रयास तेज़ कर रही है। ओवरग्राउंड वर्करों की भूमिका पिछले कई वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों की जाँच के केंद्र में रही है — ये वे लोग हैं जो सक्रिय आतंकवादियों को रसद, धन और सूचना मुहैया कराते हैं। ईडी की यह कार्रवाई सीधे उस वित्तीय कड़ी को तोड़ने की कोशिश है। आगे की जाँच में और गिरफ्तारियाँ और संपत्तियों की कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।