राजनाथ सिंह: रक्षा बजट ₹7.85 लाख करोड़, 2029 तक उत्पादन ₹3 लाख करोड़ का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक अब केवल सहायक नहीं, बल्कि अभिन्न अंग बन चुकी है। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश के कुल रक्षा बजट के ₹7 लाख 85 हज़ार करोड़ तक पहुँचने की जानकारी दी और 2029 तक रक्षा उत्पादन को ₹3 लाख करोड़ एवं निर्यात को ₹50 हज़ार करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य दोहराया।
मुख्य घोषणाएँ और आँकड़े
राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के रक्षा बजट में सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण और खरीद के लिए ₹2 लाख 19 हज़ार करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार ने आधुनिकीकरण बजट में वर्ष-दर-वर्ष बढ़ोतरी की है और इसका पूरा उपयोग भी सुनिश्चित किया है।
रक्षा मंत्री ने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसा रक्षा तंत्र तैयार करना है जिसमें हमारी सेनाओं की जरूरतों के अनुरूप तकनीक का विकास हो, भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश की रणनीतिक निर्भरता कम हो।"
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति को आँकड़ों से रेखांकित किया। वित्त वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹46,429 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड ₹1 लाख 78 हज़ार करोड़ हो गया है — यानी लगभग चार गुना की वृद्धि। इसी अवधि में रक्षा निर्यात ₹2,000 करोड़ से कम से बढ़कर लगभग ₹40 हज़ार करोड़ तक पहुँच गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर रक्षा खर्च में उछाल देखा जा रहा है और भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-तनाव के मद्देनज़र आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग खड़ा करने की कोशिश में है।
तीनों सेनाओं में संरचनात्मक सुधार
रक्षा मंत्री ने बताया कि तीनों सेनाओं ने अपनी संरचनाओं और सैन्य गठन में निरंतर सुधार किए हैं। भारतीय सेना में असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी नई सैन्य टुकड़ियाँ आज की परिचालन आवश्यकताओं और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी साबित हो रही हैं।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से नई योजनाएँ शुरू की जा रही हैं और नए हथियारों, मिसाइलों तथा प्रणालियों का परीक्षण जारी है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से लेकर बड़े कॉर्पोरेट समूह तक — सभी अब भागीदारी कर रहे हैं।
निजी क्षेत्र को समान अवसर
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी उद्योगों की साझेदारी को 'होल ऑफ द नेशन अप्रोच' बताया। उन्होंने कहा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब मुझे सरकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के कार्यक्रमों में भी बराबर जाने का अवसर मिलता है और उनका काम देखकर दिल खुश होता है, गौरव की अनुभूति होती है।"
सरकार ने निजी क्षेत्र को समान अवसर उपलब्ध कराने और उसे रक्षा उत्पादन की मुख्यधारा में लाने की नीति अपनाई है, जो पहले केवल सरकारी इकाइयों तक सीमित थी।
आगे की राह
रक्षा मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि सरकार की प्राथमिकता रणनीतिक आयात-निर्भरता घटाना और स्वदेशी रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। 2029 तक के निर्धारित लक्ष्य — उत्पादन में ₹3 लाख करोड़ और निर्यात में ₹50 हज़ार करोड़ — इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन लक्ष्यों की प्राप्ति DRDO की परियोजनाओं की गति और निजी क्षेत्र में निवेश की निरंतरता पर निर्भर करेगी।