ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई से कच्चा तेल उछला, ब्रेंट 107 डॉलर के पार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के नए दौर के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 3 नवंबर को शुरुआती कारोबार में तेज उछाल दर्ज किया गया। यह तेजी तब आई जब अमेरिकी सेना ने कथित तौर पर ईरान के केशम द्वीप पर कार्रवाई की, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएँ एक बार फिर गहरा गईं।
कीमतों में उछाल का मौजूदा स्तर
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ $107.21 प्रति बैरल पर पहुँच गया। इसी दौरान अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.15 प्रतिशत की तेजी के साथ $98.62 प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। गौरतलब है कि सोमवार को ब्रेंट क्रूड $8.66 यानी 7.6 प्रतिशत टूटकर $104.77 प्रति बैरल पर बंद हुआ था — इसलिए यह उछाल एक बड़ी पिछली गिरावट के बाद आया है।
केशम द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई और उसका असर
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने केशम द्वीप को निशाना बनाया। कुछ अधिकारियों ने इस अभियान को रक्षात्मक कार्रवाई बताया है, जिसका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को सीमित करना है जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन मार्ग है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों में फिर से 'जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम' जोड़ना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि बाजार आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को गंभीरता से देख रहा है।
कूटनीतिक प्रयास और वार्ता की स्थिति
सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ईरान ने कहा है कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन के साथ बातचीत चल रही है। हालाँकि कतर की मध्यस्थता में हुई हालिया वार्ताएँ किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकीं, भले ही ईरान ने संशोधित प्रस्ताव पेश किए। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शांति वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को कुछ अतिरिक्त अधिकार सौंपे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि तेहरान के साथ समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और वार्ता का रास्ता अभी भी खुला है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब फरवरी के आखिर से शुरू हुए इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर लगातार पड़ रहा है। अक्टूबर में ब्रेंट क्रूड छह महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ था। विश्लेषकों के अनुसार लंबे समय तक जारी व्यवधान ने ईंधन कीमतों को ऊँचे स्तर पर बनाए रखा है, जिसका असर उपभोक्ताओं और सरकारों दोनों पर पड़ रहा है — विशेष रूप से अमेरिका में, जहाँ पेट्रोल की कीमतें एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा हैं।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की घटनाएँ, अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्थिति वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी। बाजार को आशंका है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है, जिससे तेल कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।