भारत में वेयरहाउसिंग मांग तीन साल के उच्चतम स्तर पर, Q3 2026 में 1.058 करोड़ वर्गफुट लीजिंग
सारांश
मुख्य बातें
भारत के वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र ने 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 1.058 करोड़ वर्गफुट वेयरहाउस स्पेस का अवशोषण दर्ज किया — और 2026 के पहले नौ महीनों में यह संचित आंकड़ा बढ़कर 3.26 करोड़ वर्गफुट तक पहुँच गया, जो पिछले तीन वर्षों का सर्वोच्च स्तर है। वेस्टियन की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत औद्योगिक गतिविधि, विस्तृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और सरकारी नीतिगत समर्थन इस उछाल के प्रमुख कारण हैं।
मुख्य आंकड़े और विकास दर
रिपोर्ट के अनुसार, तिमाही आधार पर लीजिंग गतिविधि में 0.2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह प्रदर्शन उल्लेखनीय है क्योंकि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मांग में यह तेज़ी बनी रही।
निवेश के मोर्चे पर, Q3 2026 में इस क्षेत्र ने ₹27,700 करोड़ (33.2 करोड़ डॉलर) का संस्थागत निवेश आकर्षित किया। यह कुल तिमाही रियल एस्टेट निवेश का 17 प्रतिशत हिस्सा रहा — पिछले दो वर्षों की किसी भी तिमाही में सबसे ऊँचा स्तर।
सेक्टोरल हिस्सेदारी: 3PL आगे, मैन्युफैक्चरिंग की बढ़त
थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) क्षेत्र तीसरी तिमाही में भी सबसे बड़ा लीजिंग सेगमेंट रहा, हालाँकि इसकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 41 प्रतिशत से घटकर 29 प्रतिशत पर आ गई। इसके बाद इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स क्षेत्र की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही।
गौरतलब है कि मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि वेयरहाउसिंग की माँग अब केवल ई-कॉमर्स या पारंपरिक 3PL तक सीमित नहीं रही — यह अर्थव्यवस्था की व्यापक औद्योगिक रिकवरी का संकेत है।
शहरों का प्रदर्शन: चेन्नई सबसे आगे
चेन्नई ने इस तिमाही में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जहाँ 28.9 लाख वर्गफुट की लीजिंग दर्ज की गई — तिमाही आधार पर 320 प्रतिशत और सालाना आधार पर 156 प्रतिशत की वृद्धि।
मुंबई 27 लाख वर्गफुट के साथ दूसरे स्थान पर रहा, हालाँकि यहाँ तिमाही आधार पर 46 प्रतिशत और सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। पुणे 22 लाख वर्गफुट के अवशोषण के साथ तीसरे स्थान पर रहा और सालाना आधार पर 245 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
वेस्टियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीनिवास राव ने कहा कि भारत का वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र अब पारंपरिक मांग स्रोतों से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, '3PL के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। लगातार मजबूत मांग, बुनियादी ढाँचे में सुधार और सरकारी नीतिगत समर्थन इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को और मजबूत बना रहे हैं।'
आगे की राह
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती माँग आधुनिक और तकनीक-सक्षम वेयरहाउसिंग सुविधाओं के उपयोग को और बढ़ाएगी। इससे स्थापित लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ-साथ उभरते वेयरहाउसिंग केंद्रों — विशेष रूप से चेन्नई और पुणे जैसे शहरों — को भी लाभ मिलने की संभावना है।