3 नवंबर 2026
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एसआईआर विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — 'फारूक अब्दुल्ला की मानसिकता गलत', मतदाता सूची कटौती पर दिया स्पष्टीकरण

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एसआईआर विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — 'फारूक अब्दुल्ला की मानसिकता गलत', मतदाता सूची कटौती पर दिया स्पष्टीकरण

सारांश

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर छिड़ी राजनीतिक जंग में BJP नेता बृजभूषण शरण सिंह ने फारूक अब्दुल्ला को 'गलत मानसिकता' वाला बताया। उनका तर्क है कि 13 करोड़ में से 10 करोड़ नाम दोहरी प्रविष्टियों के कारण हटाए गए — धर्म के आधार पर नहीं।

मुख्य बातें

बृजभूषण शरण सिंह ने 3 नवंबर 2026 को गोंडा में फारूक अब्दुल्ला की 'मानसिकता गलत' बताते हुए उनके बयान की आलोचना की।
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार SIR में देशभर में कुल 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
इनमें से 3 करोड़ नाम बांग्लादेश या अन्य देशों से आए कथित घुसपैठियों के थे।
शेष 9 से 10 करोड़ नाम एकाधिक स्थानों पर दर्ज दोहरी/तिहरी प्रविष्टियों के कारण हटाए गए।
उत्तर प्रदेश में काटे गए 1 करोड़ हिंदुओं के नाम भी दोहरी प्रविष्टि श्रेणी में — धार्मिक आधार पर नहीं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 3 नवंबर 2026 को गोंडा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े विवाद पर मुखर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के बयान को 'गलत मानसिकता' का परिचायक बताया और गृह मंत्री अमित शाह के एसआईआर संबंधी बयान की व्याख्या की।

विवाद की पृष्ठभूमि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान देशभर में तीन करोड़ घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक हिंदुओं के नाम भी सूची से काटे गए। इस बयान पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने सवाल उठाते हुए कहा था कि 'क्या वे पाकिस्तानी हैं?'

बृजभूषण का पलटवार

बृजभूषण शरण सिंह ने फारूक अब्दुल्ला को 'पुराने और अनुभवी नेता' तो माना, लेकिन कहा कि उनका 'सोचने का तरीका सही नहीं है और उनकी मानसिकता गलत है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम काटने की प्रक्रिया धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि दोहरी या तिहरी प्रविष्टियों के आधार पर की गई है।

मुख्य स्पष्टीकरण: कुल कटौती का विवरण

पूर्व सांसद ने बताया कि देशभर में कुल तेरह करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें से तीन करोड़ ऐसे मतदाता थे जो बांग्लादेश या अन्य देशों से आए हुए घुसपैठियों के रूप में चिह्नित किए गए। शेष नौ से दस करोड़ नाम उन लोगों के थे जिनका नाम एक साथ दो या तीन जगहों पर दर्ज था — जैसे अपने गाँव में, निकट के कस्बे में, जिला मुख्यालय में और व्यवसाय के कारण दिल्ली में भी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश में काटे गए एक करोड़ हिंदुओं के नाम भी इसी श्रेणी — यानी एकाधिक स्थानों पर दर्ज नाम — में आते हैं, न कि धार्मिक आधार पर।

प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बल

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यह संपूर्ण प्रक्रिया 'पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष है।' उनके अनुसार, जिन लोगों के नाम दो या तीन जगह मतदाता सूची में थे, केवल उन्हीं के नाम काटे गए — चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

आगे की स्थिति

SIR को लेकर राजनीतिक बहस थमने के आसार फिलहाल कम हैं। विपक्षी नेताओं द्वारा इस मुद्दे को संसद और राज्य विधानसभाओं में उठाए जाने की संभावना बनी हुई है। चुनाव आयोग (ECI) की ओर से अभी तक विस्तृत श्रेणीवार आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे विवाद और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसमें दोनों पक्ष आधे सच बोल रहे हैं। बृजभूषण का 'दोहरी प्रविष्टि' तर्क तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन चुनाव आयोग ने अभी तक श्रेणीवार विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए — जिससे स्वतंत्र सत्यापन असंभव है। फारूक अब्दुल्ला का 'पाकिस्तानी' वाला सवाल राजनीतिक तौर पर भड़काऊ था, लेकिन उसके मूल में एक वैध चिंता थी: यदि प्रक्रिया पारदर्शी है तो डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं? जब तक ECI समुदाय-वार और राज्य-वार विवरण नहीं देता, यह विवाद हर चुनावी मौसम में नया रूप लेता रहेगा।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या है और इसमें नाम क्यों काटे गए?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की समय-समय पर की जाने वाली विशेष समीक्षा प्रक्रिया है। इसमें फर्जी, दोहरी प्रविष्टियाँ और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।
13 करोड़ नामों में से कितने घुसपैठियों के थे?
गृह मंत्री अमित शाह के बयान के अनुसार, कुल 13 करोड़ में से 3 करोड़ नाम बांग्लादेश या अन्य देशों से आए कथित घुसपैठियों के थे। शेष 9 से 10 करोड़ नाम उन लोगों के थे जिनकी प्रविष्टि दो या तीन जगहों पर दर्ज थी।
फारूक अब्दुल्ला ने SIR पर क्या कहा था?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने उत्तर प्रदेश में एक करोड़ हिंदुओं के नाम काटे जाने की बात पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 'क्या वे पाकिस्तानी हैं?' इस बयान को BJP ने भड़काऊ और भ्रामक बताया।
उत्तर प्रदेश में एक करोड़ हिंदुओं के नाम क्यों काटे गए?
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में काटे गए एक करोड़ हिंदुओं के नाम धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि इसलिए हटाए गए क्योंकि उनका नाम एक से अधिक स्थानों — गाँव, कस्बे, जिला मुख्यालय और दिल्ली — में एक साथ दर्ज था।
SIR प्रक्रिया की निगरानी कौन करता है?
SIR प्रक्रिया की देखरेख चुनाव आयोग (ECI) करता है। हालाँकि, अब तक ECI की ओर से समुदाय-वार या राज्य-वार विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे विपक्षी दलों की आपत्तियाँ बनी हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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