29 सितंबर 2026
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SIR पर BJP का कांग्रेस को करारा जवाब: सिद्धार्थ यादव बोले — 'सुविधा की राजनीति बंद करे विपक्ष'

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SIR पर BJP का कांग्रेस को करारा जवाब: सिद्धार्थ यादव बोले — 'सुविधा की राजनीति बंद करे विपक्ष'

सारांश

BJP के सिद्धार्थ यादव ने कांग्रेस की 'सुविधा की राजनीति' को आँकड़ों से बेनकाब किया — आंध्र, तेलंगाना, राजस्थान और केरल के उदाहरण देकर दिखाया कि जब SIR से जीत मिली तो 'अच्छा काम' और जब हार मिली तो 'संस्थाओं पर सवाल।' साथ ही राहुल गांधी के बंगाल U-टर्न को भी कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

BJP के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर SIR को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की 50 लाख डुप्लीकेट वोटरों की माँग के बाद SIR में 44.28 लाख नाम हटाए गए; तेलंगाना में 70 लाख की माँग के बाद 73.39 लाख नाम हटे।
राजस्थान में 41.85 लाख और केरल में 8.57 लाख नाम SIR में हटाए गए — दोनों जगह कांग्रेस पहले हटाने की माँग कर चुकी थी।
यादव के अनुसार कांग्रेस सरकारों के दौरान 10 बार SIR हुआ, तब किसी ने प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया।
यादव ने राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल U-टर्न का हवाला देते हुए माँग की कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए आरोपों के लिए सार्वजनिक माफी माँगे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं — विशेषकर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया — पर सवाल उठाना देश के लोकतंत्र को जान-बूझकर कमज़ोर करने का सुनियोजित प्रयास है। यादव ने कांग्रेस से इस व्यवहार के लिए सार्वजनिक माफ़ी की माँग की।

मुख्य आरोप: U-टर्न की राजनीति

यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने स्वयं तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी पर आरोप लगाए थे कि 'उन्होंने रास्ता न खोला होता तो BJP बंगाल में नहीं आती।' किंतु चुनाव परिणाम आते ही राहुल गांधी ने यह कहकर पलटी मारी कि 'SIR और चुनाव आयोग' ज़िम्मेदार हैं। यादव ने इसे 'सुविधा की राजनीति का प्रत्यक्ष प्रमाण' बताया।

राज्यवार आँकड़ों से घेरा

यादव ने कई राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि खुद कांग्रेसी नेता वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम हटाने की माँग कर चुके हैं, लेकिन SIR की प्रक्रिया के बाद वही नेता विरोध में उतर आते हैं।

आंध्र प्रदेश: 2018 में कांग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 50 लाख डुप्लीकेट वोटरों का आरोप लगाया था और इन्हें हटाने की माँग की थी। 2026 में SIR के बाद 44.28 लाख नाम हटाए गए।

तेलंगाना: कांग्रेस नेता ने कहा था कि वोटर लिस्ट में 70 लाख नाम गलत हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। SIR के बाद 73.39 लाख नाम हटाए गए।

राजस्थान: 15 अगस्त 2018 को कांग्रेस ने 42 लाख डुप्लीकेट नामों का आरोप लगाया था। SIR में 41.85 लाख नाम हटाए गए।

केरल: कांग्रेस ने वेबसाइट बनाकर और हाईकोर्ट जाकर 4.34 लाख डुप्लीकेट नामों की शिकायत की थी। SIR में 8.57 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए और हटाए गए। जब केरल में SIR के बाद कांग्रेस की जीत हुई, तो पार्टी ने SIR को 'बहुत अच्छा काम' बताया और कम्युनिस्ट पार्टी पर झूठे नाम डालने का आरोप लगाया।

पुराने उदाहरण और BJP का रुख

यादव ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि 24 अगस्त 2013 को दिल्ली में 13.58 लाख वोट हटाए गए थे और 9 अगस्त 2013 को बिहार में 76 लाख वोटर संदिग्ध पाए गए थे। तब विपक्ष में रहते हुए BJP ने इस प्रक्रिया पर कोई सवाल नहीं उठाया था। इसी तरह 27 अप्रैल 2014 को महाराष्ट्र में बिना SIR के 70.76 लाख वोटर हटाए गए और 74 लाख जोड़े गए — तब भी किसी ने आपत्ति नहीं जताई।

यादव ने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस सरकारों के दौरान 10 बार SIR किया गया और किसी ने प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया।

अवैध प्रवासियों का मुद्दा

यादव ने दावा किया कि कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें कथित अवैध प्रवासियों ने यह स्वीकार किया है कि SIR से पहले वे चुनावों में वोट दिया करते थे। उन्होंने इसे मतदाता सूची शुद्धिकरण की ज़रूरत का और प्रमाण बताया।

विपक्ष की भूमिका पर सवाल

यादव ने अंत में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करना और जमीनी स्तर पर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करना विपक्ष की भूमिका नहीं है। उन्होंने इसे 'देश के साथ अन्याय' करार दिया और कांग्रेस पार्टी से माफी की माँग दोहराई। आगे देखना होगा कि कांग्रेस इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि क्या SIR की प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं। चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर विश्वास बनाए रखना सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की समान जिम्मेदारी है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धार्थ यादव ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
BJP के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने 29 सितंबर 2026 को कहा कि कांग्रेस 'सुविधा की राजनीति' करती है — जब SIR से उनकी जीत होती है तो प्रक्रिया को सराहती है और जब हार होती है तो चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी माँगने की भी माँग की।
SIR क्या है और इसमें कितने नाम हटाए गए?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, भारतीय चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से डुप्लीकेट, मृत या अवैध नाम हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया है। आंध्र प्रदेश में 44.28 लाख, तेलंगाना में 73.39 लाख, राजस्थान में 41.85 लाख और केरल में 8.57 लाख नाम SIR के तहत हटाए गए।
राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल U-टर्न का मामला क्या है?
यादव के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने BJP को बंगाल में आने का रास्ता दिया। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने इसे SIR और चुनाव आयोग की 'गड़बड़ी' बताया। BJP ने इसे स्पष्ट राजनीतिक U-टर्न करार दिया है।
कांग्रेस सरकारों के दौरान SIR कितनी बार हुआ?
यादव के अनुसार, कांग्रेस सरकारों के दौरान देश में 10 बार SIR की प्रक्रिया पूरी की गई और उस दौरान किसी ने — विपक्ष में रहते BJP ने भी नहीं — इस प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया।
BJP ने केरल में SIR के बाद कांग्रेस के रुख पर क्या कहा?
यादव ने बताया कि केरल में SIR के बाद जब कांग्रेस की जीत हुई तो पार्टी ने इसे 'बहुत अच्छा काम' बताया और कम्युनिस्ट पार्टी पर झूठे नाम वोटर लिस्ट में डालने का आरोप लगाया — यह कांग्रेस के दोहरे मापदंड का, उनके अनुसार, सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
राष्ट्र प्रेस
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