सुप्रीम कोर्ट ने SIR को वैध ठहराया: गिरिराज सिंह बोले — राहुल गांधी, ममता, तेजस्वी बेनकाब
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर अपना हमला तेज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 27 मई को मीडिया से बातचीत में कहा कि इस फैसले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव समेत तमाम विपक्षी नेताओं की असलियत सामने ला दी है।
गिरिराज सिंह का विपक्ष पर सीधा हमला
गिरिराज सिंह ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में SIR के नाम पर चुनाव लड़े गए और जनता में भ्रम फैलाया गया। उनके अनुसार, लालू यादव, तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और ममता बनर्जी सभी अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग ने संवैधानिक तरीके से SIR किया था और सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।'
गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया के विरोध में विपक्षी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दायर की थीं, जिन्हें अदालत ने खारिज करते हुए इस अभियान को वैध करार दिया।
संजय सेठ और जेडीयू का समर्थन
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि देश के 140 करोड़ नागरिक SIR का समर्थन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अद्यतन करना है — जिसमें मृत व्यक्तियों और स्थान बदल चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। सेठ ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के जरिए उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जिन पर दूसरे देशों से आकर यहाँ बसने का आरोप है।
जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के राष्ट्रीय प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को हरी झंडी देकर चुनाव आयोग के अभियान को सही ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मृत व्यक्तियों के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखना विपक्ष की रणनीति थी। नीरज कुमार ने यह भी अनुरोध किया कि SIR के नाम पर भ्रम फैलाने वालों पर न्यायिक कार्रवाई होनी चाहिए।
BJP सांसद जगदंबिका पाल की प्रतिक्रिया
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि बिहार चुनाव से लेकर बंगाल चुनाव तक विपक्ष ने SIR के नाम पर मतदाताओं में भय और भ्रम फैलाया तथा वोट कटने का डर दिखाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कई याचिकाएँ दायर कीं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि SIR पूरी तरह वैध प्रक्रिया है और वोटर लिस्ट सुधारना चुनाव आयोग (ECI) का संवैधानिक अधिकार है।
पाल ने माँग की कि SIR के मुद्दे पर देशभर में भ्रम फैलाने के लिए विपक्ष को अब शर्मसार होना चाहिए और जनता से माफी माँगनी चाहिए।
SIR विवाद की पृष्ठभूमि
SIR यानी विशेष गहन समीक्षा, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चलाया जाने वाला अभियान है। विपक्षी दलों ने इस पर आरोप लगाया था कि इससे अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों के वैध मतदाताओं के नाम कटने का खतरा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया जारी रखने का कानूनी आधार मिल गया है। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले चुनावी मौसम में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच प्रमुख बहस का केंद्र बना रहेगा।