गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन को उनकी इच्छा बताया, ममता बनर्जी पर किया हमला
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन उनका व्यक्तिगत निर्णय है।
- गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- बंगाल की राजनीति में वर्तमान स्थिति को लेकर चिंताएँ प्रकट की गई हैं।
कोलकाता, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के प्रमुख नेता गिरिराज सिंह ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन को उनके स्वयं के निर्णय के रूप में पेश किया। साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे आरोप लगाए।
गिरिराज सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजद और तेजस्वी यादव को निशाना बनाते हुए कहा, "राजद के नेता और तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जो गालियाँ दीं और जो उनकी बीमारी पर टिप्पणी की, वही अब आंसू बहा रहे हैं। अगर सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया है, तो यह उनकी खुद की मर्जी है। बिहार की सरकार भी उनकी इच्छा के अनुसार ही चलेगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का यह निर्णय एक व्यक्तिगत और राजनीतिक कदम है, जिसमें कोई दबाव नहीं है। उन्होंने राजद पर आरोप लगाया कि पहले वे नीतीश कुमार का अपमान करते थे और अब उनकी अनुपस्थिति पर रो रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की नेता ममता बनर्जी की सरकार पर भी सवाल उठाए और कहा, "ममता बनर्जी बंगाल को धोखा देने का काम कर रही हैं। वे घुसपैठियों को भारत की नागरिकता दिलाने के प्रयास में हैं। मेरा मानना है कि चुनाव आयोग को इस मामले में गहराई से जांच करने की आवश्यकता है।"
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, "1946 में जिन्ना ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' लाया था। उस समय हुसैन शहीद सुहरावर्दी बंगाल प्रांत के मुख्यमंत्री थे और हिंदुओं का कत्लेआम हुआ था। मुझे लगता है कि ममता बनर्जी आज उसी स्थिति में मुख्यमंत्री बनी हैं। वे हिंदुओं का कत्लेआम कर रही हैं। अगर हमें पश्चिम बंगाल और देश को बचाना है तो हर घर से एक-एक को गोपाल पाठा बनना होगा।"
उन्होंने गोपाल पाठा का उल्लेख करते हुए कहा कि 1946 के दंगों में उन्होंने हिंदुओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गिरिराज सिंह ने इसे दोहराते हुए कहा कि आज फिर वही स्थिति है और हिंदुओं को संगठित होकर अपनी रक्षा करनी होगी।