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एसआईआर पर भूपेंद्र यादव का विपक्ष पर तीखा वार: 'हारने पर ही क्यों उठते हैं सवाल?'

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एसआईआर पर भूपेंद्र यादव का विपक्ष पर तीखा वार: 'हारने पर ही क्यों उठते हैं सवाल?'

सारांश

दरभंगा में भूपेंद्र यादव ने विपक्ष के उस दोहरे रवैये को उजागर किया, जहाँ एसआईआर पर आपत्ति केवल हार के बाद उठती है — जीत पर नहीं। 1950 से 9वीं बार चल रही इस प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय भी वैध बता चुका है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 5 नवंबर 2026 को दरभंगा में विपक्ष पर एसआईआर को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
एसआईआर वर्ष 1950 से जारी है — यह नौवीं बार पुनरीक्षण हो रहा है।
बिहार में RJD के 35 हज़ार और कांग्रेस के 17 हज़ार बूथ स्तरीय एजेंट थे, फिर भी आपत्तियाँ मात्र दो रहीं — यह आँकड़ा सर्वोच्च न्यायालय के हलफनामे में दर्ज है।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को निरंतर चलने वाली वैधानिक प्रक्रिया करार दिया है।
BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च लहरियासराय टावर , लोहिया चौक , बकरगंज और जीएन गंज से होकर गुज़रा।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 5 नवंबर 2026 को दरभंगा, बिहार में विपक्षी गठबंधन पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल तभी मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सवाल उठाता है, जब उसे चुनाव में हार मिलती है — जीत वाली सीटों पर वह चुप्पी साध लेता है।

मुख्य आरोप और बयान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च के तहत दरभंगा के पोलो ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी रही है और वैशाली का गणतंत्र विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने जोर दिया कि मतदाता सूची की शुद्धता ही सच्चे लोकतंत्र की नींव है।

यादव ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है — वर्ष 1950 से अब तक आठ बार यह पूरी हो चुकी है और वर्तमान में नौवीं बार पुनरीक्षण जारी है। इसका उद्देश्य मृत व्यक्तियों के नाम हटाना और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को सुधारना है।

प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुनरीक्षण के दौरान किसी का नाम मनमाने ढंग से नहीं काटा जा सकता। राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 35 हज़ार और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के 17 हज़ार बीएलए मौजूद थे, फिर भी आपत्तियों की संख्या मात्र दो रही। यादव ने कहा कि ये आँकड़े सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में दर्ज हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि विपक्ष ने एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था, जहाँ जाँच के बाद इसे निरंतर चलने वाली वैधानिक प्रक्रिया करार दिया गया।

विपक्ष के दोहरे मापदंड पर सवाल

यादव ने तर्क दिया कि एसआईआर के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में चुनाव हुए हैं। केरल में कांग्रेस की सरकार भी इसी प्रक्रिया के बाद बनी। उन्होंने पूछा कि जब विपक्ष जीतता है तो एसआईआर पर मौन क्यों, और हारने पर आपत्ति क्यों? उनके अनुसार, एसआईआर का विरोध करने वाले घुसपैठियों के पक्ष में खड़े हैं — हालाँकि यह उनका राजनीतिक आरोप है।

आपातकाल और मोदी सरकार की तुलना

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर आपातकाल लगाने का आरोप भी दोहराया और कहा कि एनडीए के नेताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर लोकतंत्र के नाम पर झूठे हमले करने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया।

मार्च का मार्ग और कार्यकर्ताओं की भागीदारी

पदयात्रा लहरियासराय टावर, लोहिया चौक, बकरगंज और जीएन गंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुज़री। बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ता इस मार्च में शामिल हुए। यादव ने कहा कि पार्टी घुसपैठियों को दूर करने और देश की अखंडता बनाए रखने के लिए सड़क पर उतरी है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है, जब विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ परवान चढ़ेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह असली सवाल से ध्यान हटाता है — कि क्या एसआईआर की प्रक्रिया में कमज़ोर तबकों, विशेषकर प्रवासी मज़दूरों और बेघर लोगों के नाम कटने का जोखिम है। विपक्ष का सर्वोच्च न्यायालय जाना और वहाँ प्रक्रिया का वैध ठहरना यह तो बताता है कि कानूनी आधार मज़बूत है, पर पारदर्शिता के दावे और बीएलए की निष्क्रियता के बीच का अंतर्विरोध अनुत्तरित है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और मतदाता सूची की हर हेरफेर पर नज़रें टिकी हैं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक वैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाते हैं और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को सुधारा जाता है। यह प्रक्रिया वर्ष 1950 से जारी है और अब तक नौ बार हो चुकी है।
भूपेंद्र यादव ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष एसआईआर पर केवल तभी सवाल उठाता है जब उसे चुनाव में हार मिलती है, जबकि जीत वाले राज्यों में वह चुप रहता है। उन्होंने केरल और तमिलनाडु के उदाहरण दिए जहाँ एसआईआर के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव जीते।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर पर क्या कहा है?
भूपेंद्र यादव के अनुसार, विपक्ष ने एसआईआर को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था, जहाँ जाँच के बाद इसे निरंतर चलने वाली वैधानिक प्रक्रिया करार दिया गया।
बिहार में बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) की क्या भूमिका रही?
यादव के दावे के अनुसार, बिहार में RJD के 35 हज़ार और कांग्रेस के 17 हज़ार बीएलए पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल थे, फिर भी दोनों दलों की ओर से कुल मात्र दो आपत्तियाँ दर्ज की गईं। ये आँकड़े सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में हैं।
BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च क्यों निकाला गया?
BJP ने यह मार्च घुसपैठियों को मतदाता सूची से बाहर रखने, देश की अखंडता बनाए रखने और एसआईआर के समर्थन में जनजागरण के उद्देश्य से आयोजित किया। मार्च दरभंगा के प्रमुख इलाकों से होकर गुज़रा।
राष्ट्र प्रेस
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