6जी तकनीक 2040 तक वैश्विक GDP में $1.24 ट्रिलियन जोड़ सकती है, स्पेक्ट्रम नीति बनेगी निर्णायक: GSMA रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
छठी पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक 6जी वर्ष 2040 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकती है — लेकिन इस संभावना का बड़ा हिस्सा तभी साकार होगा जब सरकारें समय रहते पर्याप्त स्पेक्ट्रम आवंटित करें। उद्योग संगठन GSMA ने 5 नवंबर 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है कि स्पेक्ट्रम नीति में देरी से अनुमानित आर्थिक लाभ का 42 प्रतिशत — यानी करीब 520 अरब डॉलर — हाथ से निकल सकता है।
रिपोर्ट के प्रमुख अनुमान
GSMA के अनुसार, अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), औद्योगिक स्वचालन, इमर्सिव डिजिटल सेवाओं और उन्नत कनेक्टिविटी के ज़रिये 2040 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 0.7 प्रतिशत के बराबर मूल्य जोड़ सकते हैं। रिपोर्ट में कुल आर्थिक योगदान में क्षेत्रवार हिस्सेदारी का भी खुलासा किया गया है — मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सबसे आगे 20 प्रतिशत के साथ, उसके बाद वित्तीय सेवाएँ 19 प्रतिशत, निर्माण क्षेत्र 13 प्रतिशत और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) 12 प्रतिशत के साथ।
स्पेक्ट्रम की भूमिका क्यों है इतनी अहम
GSMA के मुख्य नियामक अधिकारी जॉन जिउस्ती ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में स्पेक्ट्रम नीति से जुड़े फैसले तय करेंगे कि 6जी की आर्थिक संभावनाओं का कितना लाभ वास्तव में प्राप्त किया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, मिड-बैंड स्पेक्ट्रम सबसे महत्वपूर्ण है — 6जी से होने वाले कुल आर्थिक लाभ में इसकी हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं लो-बैंड स्पेक्ट्रम ग्रामीण क्षेत्रों और कम सेवा प्राप्त इलाकों तक पहुँच सुनिश्चित करने में मदद करेगा और कुल योगदान में करीब 25 प्रतिशत हिस्सा देगा।
6जी — 5जी से कितना अलग
GSMA का कहना है कि 6जी तकनीक पिछले मोबाइल नेटवर्क संस्करणों से मौलिक रूप से भिन्न होगी। इसका विकास AI-केंद्रित क्षमताओं पर आधारित है, जिससे नेटवर्क बुद्धिमान निर्णय लेने, एकीकृत सेंसिंग कार्यों और स्थलीय तथा उपग्रह-आधारित नेटवर्कों के बीच सहज कनेक्टिविटी देने में सक्षम होंगे। रिपोर्ट में AI-आधारित कनेक्टिविटी, औद्योगिक रोबोटिक्स, उन्नत ब्रॉडबैंड और गैर-स्थलीय नेटवर्क को भविष्य की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख चालक बताया गया है।
GSMA की सरकारों से माँग
GSMA ने सरकारों से आग्रह किया है कि 2030 तक कम से कम 2 गीगाहर्ट्ज़ मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाए, जिसमें ऊपरी 6 गीगाहर्ट्ज़ बैंड का कुछ हिस्सा भी शामिल हो। कवरेज विस्तार और अधिक कनेक्टेड डिवाइसों को समर्थन देने के लिए 600 मेगाहर्ट्ज़ बैंड उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है। संगठन ने नियामकों से स्पष्ट राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप तैयार करने की माँग की है, ताकि दूरसंचार कंपनियों को निवेश और नेटवर्क विस्तार योजनाओं के लिए नीतिगत स्थिरता मिल सके।
WRC-2027 और आगे की राह
यह रिपोर्ट 2027 में आयोजित होने वाले विश्व रेडियो संचार सम्मेलन (WRC-2027) से पहले जारी की गई है, जहाँ उभरती तकनीकों के लिए भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि 5जी की वैश्विक तैनाती अभी भी कई देशों में अधूरी है — ऐसे में 6जी के लिए स्पेक्ट्रम नियोजन को लेकर यह बहस नीति-निर्माताओं के सामने समयसीमा का दबाव और बढ़ा देती है।