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6जी तकनीक 2040 तक वैश्विक GDP में $1.24 ट्रिलियन जोड़ सकती है, स्पेक्ट्रम नीति बनेगी निर्णायक: GSMA रिपोर्ट

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6जी तकनीक 2040 तक वैश्विक GDP में $1.24 ट्रिलियन जोड़ सकती है, स्पेक्ट्रम नीति बनेगी निर्णायक: GSMA रिपोर्ट

सारांश

GSMA की नई रिपोर्ट 6जी को $1.24 ट्रिलियन के आर्थिक अवसर के रूप में पेश करती है — लेकिन साथ में एक कड़ी चेतावनी भी देती है: स्पेक्ट्रम नीति में ढील पड़ी तो $520 अरब का यह मौका हाथ से फिसल सकता है। WRC-2027 से पहले यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

GSMA की रिपोर्ट के अनुसार, 6जी तकनीक वर्ष 2040 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकती है।
पर्याप्त स्पेक्ट्रम न मिलने पर अनुमानित लाभ का 42 प्रतिशत यानी करीब 520 अरब डॉलर हासिल नहीं हो सकेगा।
सबसे अधिक लाभ मैन्युफैक्चरिंग (20%) और वित्तीय सेवाओं (19%) को मिलने का अनुमान।
मिड-बैंड स्पेक्ट्रम का कुल आर्थिक लाभ में 70 प्रतिशत हिस्सा रहेगा।
GSMA ने 2030 तक 2 GHz मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की माँग की।
यह रिपोर्ट WRC-2027 से पहले जारी की गई, जहाँ भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर अंतरराष्ट्रीय निर्णय अपेक्षित हैं।

छठी पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक 6जी वर्ष 2040 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकती है — लेकिन इस संभावना का बड़ा हिस्सा तभी साकार होगा जब सरकारें समय रहते पर्याप्त स्पेक्ट्रम आवंटित करें। उद्योग संगठन GSMA ने 5 नवंबर 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है कि स्पेक्ट्रम नीति में देरी से अनुमानित आर्थिक लाभ का 42 प्रतिशत — यानी करीब 520 अरब डॉलर — हाथ से निकल सकता है।

रिपोर्ट के प्रमुख अनुमान

GSMA के अनुसार, अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), औद्योगिक स्वचालन, इमर्सिव डिजिटल सेवाओं और उन्नत कनेक्टिविटी के ज़रिये 2040 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 0.7 प्रतिशत के बराबर मूल्य जोड़ सकते हैं। रिपोर्ट में कुल आर्थिक योगदान में क्षेत्रवार हिस्सेदारी का भी खुलासा किया गया है — मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सबसे आगे 20 प्रतिशत के साथ, उसके बाद वित्तीय सेवाएँ 19 प्रतिशत, निर्माण क्षेत्र 13 प्रतिशत और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) 12 प्रतिशत के साथ।

स्पेक्ट्रम की भूमिका क्यों है इतनी अहम

GSMA के मुख्य नियामक अधिकारी जॉन जिउस्ती ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में स्पेक्ट्रम नीति से जुड़े फैसले तय करेंगे कि 6जी की आर्थिक संभावनाओं का कितना लाभ वास्तव में प्राप्त किया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, मिड-बैंड स्पेक्ट्रम सबसे महत्वपूर्ण है — 6जी से होने वाले कुल आर्थिक लाभ में इसकी हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं लो-बैंड स्पेक्ट्रम ग्रामीण क्षेत्रों और कम सेवा प्राप्त इलाकों तक पहुँच सुनिश्चित करने में मदद करेगा और कुल योगदान में करीब 25 प्रतिशत हिस्सा देगा।

6जी — 5जी से कितना अलग

GSMA का कहना है कि 6जी तकनीक पिछले मोबाइल नेटवर्क संस्करणों से मौलिक रूप से भिन्न होगी। इसका विकास AI-केंद्रित क्षमताओं पर आधारित है, जिससे नेटवर्क बुद्धिमान निर्णय लेने, एकीकृत सेंसिंग कार्यों और स्थलीय तथा उपग्रह-आधारित नेटवर्कों के बीच सहज कनेक्टिविटी देने में सक्षम होंगे। रिपोर्ट में AI-आधारित कनेक्टिविटी, औद्योगिक रोबोटिक्स, उन्नत ब्रॉडबैंड और गैर-स्थलीय नेटवर्क को भविष्य की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख चालक बताया गया है।

GSMA की सरकारों से माँग

GSMA ने सरकारों से आग्रह किया है कि 2030 तक कम से कम 2 गीगाहर्ट्ज़ मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाए, जिसमें ऊपरी 6 गीगाहर्ट्ज़ बैंड का कुछ हिस्सा भी शामिल हो। कवरेज विस्तार और अधिक कनेक्टेड डिवाइसों को समर्थन देने के लिए 600 मेगाहर्ट्ज़ बैंड उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है। संगठन ने नियामकों से स्पष्ट राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप तैयार करने की माँग की है, ताकि दूरसंचार कंपनियों को निवेश और नेटवर्क विस्तार योजनाओं के लिए नीतिगत स्थिरता मिल सके।

WRC-2027 और आगे की राह

यह रिपोर्ट 2027 में आयोजित होने वाले विश्व रेडियो संचार सम्मेलन (WRC-2027) से पहले जारी की गई है, जहाँ उभरती तकनीकों के लिए भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। गौरतलब है कि 5जी की वैश्विक तैनाती अभी भी कई देशों में अधूरी है — ऐसे में 6जी के लिए स्पेक्ट्रम नियोजन को लेकर यह बहस नीति-निर्माताओं के सामने समयसीमा का दबाव और बढ़ा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह याद दिलाना ज़रूरी है कि ऐसे दीर्घकालिक तकनीकी पूर्वानुमान अक्सर बाज़ार-विकास की जटिलताओं को कम आँकते हैं — 5जी की 'क्रांतिकारी' आर्थिक संभावनाओं के वादे अभी तक पूरी तरह साकार नहीं हुए हैं। असली सवाल यह है कि क्या सरकारें, जो पहले से ही 5जी की अधूरी तैनाती से जूझ रही हैं, 6जी स्पेक्ट्रम के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और संसाधन जुटा पाएँगी। भारत के संदर्भ में यह विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ 5जी रोलआउट अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित है और 6जी अनुसंधान अभी शैशवावस्था में है। WRC-2027 से पहले जारी यह रिपोर्ट एक नीतिगत दबाव-समूह दस्तावेज़ भी है — इसे केवल तटस्थ शोध के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

6जी तकनीक वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितना योगदान दे सकती है?
GSMA की रिपोर्ट के अनुसार, 6जी तकनीक 2040 तक वैश्विक GDP में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकती है, जो वैश्विक GDP का लगभग 0.7 प्रतिशत है। यह लाभ AI, औद्योगिक स्वचालन और इमर्सिव डिजिटल सेवाओं के ज़रिये हासिल होने का अनुमान है।
स्पेक्ट्रम न मिलने पर 6जी से क्या नुकसान होगा?
GSMA के अनुसार, यदि पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराया गया तो अनुमानित आर्थिक लाभ का 42 प्रतिशत — यानी करीब 520 अरब डॉलर — हासिल नहीं हो सकेगा। इसीलिए संगठन ने सरकारों से 2030 तक कम से कम 2 GHz मिड-बैंड स्पेक्ट्रम आवंटित करने की माँग की है।
6जी से किन क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, 6जी से सबसे अधिक लाभ मैन्युफैक्चरिंग (20%) और वित्तीय सेवाओं (19%) को मिलेगा। इसके बाद निर्माण क्षेत्र (13%) और ICT क्षेत्र (12%) का स्थान है।
GSMA की WRC-2027 से पहले यह रिपोर्ट क्यों जारी की गई?
विश्व रेडियो संचार सम्मेलन (WRC-2027) में उभरती तकनीकों के लिए भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। GSMA इस रिपोर्ट के ज़रिये नीति-निर्माताओं पर समय रहते स्पष्ट स्पेक्ट्रम रोडमैप बनाने का दबाव बनाना चाहता है।
6जी तकनीक 5जी से कैसे अलग होगी?
GSMA के अनुसार, 6जी का विकास AI-केंद्रित क्षमताओं पर आधारित है, जो इसे 5जी से मौलिक रूप से अलग बनाता है। 6जी नेटवर्क बुद्धिमान निर्णय लेने, एकीकृत सेंसिंग और स्थलीय व उपग्रह-आधारित नेटवर्कों के बीच सहज कनेक्टिविटी प्रदान करने में सक्षम होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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