5 अक्टूबर 2026
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6जी पेटेंट में भारत का 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य, सिंधिया बोले — अब 'स्टैंडर्ड मेकर' बनेगा भारत

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6जी पेटेंट में भारत का 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य, सिंधिया बोले — अब 'स्टैंडर्ड मेकर' बनेगा भारत

सारांश

दशकों तक दूसरों के तय मानक मानने के बाद, भारत पहली बार 6जी की वैश्विक मानक निर्धारण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन रहा है। संचार मंत्री सिंधिया ने वैश्विक 6जी पेटेंट में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है — यह बदलाव सांकेतिक नहीं, रणनीतिक है।

मुख्य बातें

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत अब 6जी में 'स्टैंडर्ड मेकर' बन रहा है।
भारत का लक्ष्य वैश्विक 6जी पेटेंट में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है।
भारत 6जी एलायंस पहले ही कई वैश्विक पेटेंट दाखिल कर चुका है।
2जी से 5जी तक भारत वैश्विक मानक निर्धारण प्रक्रिया से बाहर रहा; 6जी के साथ यह पहली बार बदल रहा है।
आईएफक्यूएम संगोष्ठी 2026 में सिंधिया ने 'विकसित भारत 2047' को गुणवत्ता और तकनीकी नेतृत्व से जोड़ा।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत अब 6जी तकनीक में वैश्विक मानकों को केवल अपनाने वाला नहीं, बल्कि उन्हें निर्धारित करने वाला देश बन रहा है। उन्होंने घोषणा की कि भारत का लक्ष्य 6जी से जुड़े वैश्विक पेटेंट में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है — एक ऐसा लक्ष्य जो 2जी से 5जी तक की पूरी यात्रा में अकल्पनीय था।

मानक निर्धारण में ऐतिहासिक बदलाव

सिंधिया ने आईएफक्यूएम (इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट) संगोष्ठी 2026 को संबोधित करते हुए कहा, "2जी, 3जी, 4जी और 5जी के दौर में भारत मानक निर्धारण की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, लेकिन 6जी के लिए स्थिति पूरी तरह बदल रही है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि मोबाइल प्रौद्योगिकी के इतिहास में पहली बार भारत इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन रहा है।

गौरतलब है कि दशकों तक भारत दूसरे देशों — मुख्यतः अमेरिका, यूरोप, चीन और दक्षिण कोरिया — द्वारा तय किए गए दूरसंचार मानकों का अनुसरण करता रहा। 6जी के साथ यह समीकरण पहली बार बदलता दिख रहा है।

6जी एलायंस और पेटेंट अभियान

मंत्री ने बताया कि भारत 6जी एलायंस इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है और भारत पहले ही कई वैश्विक पेटेंट दाखिल कर चुका है। उनके अनुसार, यह केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत को नेतृत्वकारी भूमिका दिलाने का व्यापक प्रयास है।

सिंधिया ने कहा कि भारत अब 'स्टैंडर्ड टेकर' नहीं बल्कि 'स्टैंडर्ड मेकर' और तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने वाला देश बन रहा है। यह देश की तकनीकी क्षमता और अनुसंधान शक्ति का बड़ा संकेत है।

गुणवत्ता और 'ब्रांड इंडिया' की नींव

आईएफक्यूएम संगोष्ठी में सिंधिया ने ज़ोर देकर कहा कि गुणवत्ता मानक किसी भी देश के ब्रांड मूल्य को निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा, "गुणवत्ता, नवाचार और तकनीकी नेतृत्व का संयोजन भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकता है। यदि भारत विश्वस्तरीय मानकों को अपनाने के साथ साथ उन्हें निर्धारित करने में भी अग्रणी भूमिका निभाता है, तो 'ब्रांड इंडिया' की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।"

उन्होंने आपूर्ति शृंखलाओं, उद्योगों और संस्थानों में गुणवत्ता आधारित संस्कृति विकसित करने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि आईएफक्यूएम इस राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण है।

विकसित भारत 2047 और तकनीकी नेतृत्व

सिंधिया ने रेखांकित किया कि 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है — इसमें गुणवत्ता, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक पहचान उत्पादन क्षमता से नहीं, बल्कि गुणवत्ता और विश्वसनीयता से बनेगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के दूरसंचार क्षेत्र में 5जी का विस्तार अभी भी जारी है और 6जी के लिए वैश्विक मानकीकरण प्रक्रिया अपने प्रारंभिक चरण में है। भारत की 10% पेटेंट हिस्सेदारी की महत्वाकांक्षा इस प्रतिस्पर्धा में देश की दावेदारी को मज़बूती से स्थापित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सत्यापन योग्य मील के पत्थरों से जोड़ा जाना अभी बाकी है — यही इसकी असली कसौटी होगी। भारत की 6जी यात्रा में IIT, C DOT और निजी दूरसंचार कंपनियों की भागीदारी कितनी गहरी है, यह स्पष्ट नहीं किया गया। गौरतलब है कि चीन पहले ही 6जी पेटेंट में 40% से अधिक की वैश्विक हिस्सेदारी का दावा कर रहा है, जिसके मुकाबले 10% का लक्ष्य भी कठिन परंतु सार्थक है। बिना एक पारदर्शी पेटेंट ट्रैकिंग ढाँचे के, यह घोषणा नीतिगत इरादे से आगे नहीं जाएगी।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का 6जी पेटेंट में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य क्या है?
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, भारत का लक्ष्य वैश्विक 6जी तकनीक से जुड़े कुल पेटेंट में 10 प्रतिशत योगदान देना है। इसके लिए भारत 6जी एलायंस सक्रिय रूप से काम कर रहा है और कई वैश्विक पेटेंट पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं।
भारत पहले 6जी मानकों में भागीदार क्यों नहीं था?
2जी, 3जी, 4जी और 5जी के दौर में भारत के पास मानक निर्धारण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए आवश्यक तकनीकी अनुसंधान और पेटेंट आधार नहीं था। सिंधिया के अनुसार, 6जी पहला ऐसा दौर है जब भारत इस प्रक्रिया में 'स्टैंडर्ड मेकर' की भूमिका निभा रहा है।
भारत 6जी एलायंस क्या है?
भारत 6जी एलायंस एक राष्ट्रीय स्तर की पहल है जो 6जी तकनीक के अनुसंधान, विकास और वैश्विक मानक निर्धारण में भारत की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। इसमें सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग की साझेदारी शामिल है।
आईएफक्यूएम संगोष्ठी 2026 में और क्या कहा गया?
सिंधिया ने कहा कि गुणवत्ता मानक 'ब्रांड इंडिया' के वैश्विक मूल्य को निर्धारित करते हैं और 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करने के लिए गुणवत्ता आधारित सोच को हर क्षेत्र में बढ़ावा देना होगा। उन्होंने आईएफक्यूएम को राष्ट्र निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
6जी में भारत की भूमिका 'विकसित भारत 2047' से कैसे जुड़ती है?
सिंधिया के अनुसार, 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है — इसमें गुणवत्ता, तकनीक और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना भी शामिल है। 6जी में पेटेंट हिस्सेदारी इसी दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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