2030 तक भारत में 62% लोगों के पास होगा 5जी कनेक्शन, एशिया-प्रशांत औसत से 12 अंक आगे
सारांश
मुख्य बातें
जीएसएमए की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की 62 प्रतिशत आबादी के पास 5जी कनेक्शन होने का अनुमान है — जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 50 प्रतिशत के औसत से 12 प्रतिशत अंक अधिक है। यह रिपोर्ट मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को जारी की गई और इसमें भारत को डिजिटल विस्तार की दृष्टि से क्षेत्र के अग्रणी देशों में रखा गया है।
भारत की अग्रणी स्थिति
जीएसएमए की रिपोर्ट में भारत को बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के साथ इस क्षेत्र के 'अग्रणी देशों' में गिना गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन देशों में डिजिटल-अर्थव्यवस्था की वृद्धि को गति देने और मोबाइल उद्योग की स्थिरता बनाए रखने के लिए नियामक आधुनिकीकरण आवश्यक है। गौरतलब है कि दक्षिण एशिया में नेटवर्क कवरेज का अंतर लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जो बताता है कि अब चुनौती कवरेज की नहीं बल्कि उपयोग और अपनाने की है।
डिजिटल अपनाने में मुख्य बाधाएँ
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि मोबाइल इंटरनेट के व्यापक उपयोग में अब खर्च, डिवाइस तक पहुँच, डिजिटल कौशल, भरोसा और ऑनलाइन सुरक्षा प्रमुख अवरोध बने हुए हैं। इन चुनौतियों से निपटने के प्रयासों के उदाहरण के तौर पर रिपोर्ट में भारतनेट और पीएमजीडीआईएसएचए का उल्लेख किया गया है। पीएमजीडीआईएसएचए ने अब तक 6.4 करोड़ से अधिक ग्रामीण नागरिकों को बुनियादी डिजिटल कौशल की प्रशिक्षण दी है।
एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्था पर असर
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक मोबाइल प्रौद्योगिकी और सेवाएँ एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देंगी, जो आज के 1 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मुख्यतः 5जी विस्तार, एआई एकीकरण और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती माँग पर निर्भर करेगी।
डिजिटल भरोसा और साइबर सुरक्षा
रिपोर्ट के अनुसार भारत के लिए डिजिटल भरोसा एक आर्थिक प्राथमिकता बनता जा रहा है। 2026 में सूचना सुरक्षा पर खर्च में 11.7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जो साइबर सुरक्षा, पहचान प्रबंधन, गोपनीयता और संबंधित सेवाओं की बढ़ती माँग को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत के 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स' संवेदनशील डेटा के भंडारण, प्रसंस्करण और प्रबंधन के लिए भरोसेमंद माहौल बनाने में सहायक हैं।
6जी और भविष्य की योजना
रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जिन्होंने 6जी स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया है, जो दीर्घकालिक कनेक्टिविटी नीति के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डिजिटल विकास का अगला चरण चार प्राथमिकताओं — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विस्तार, डिजिटल भरोसे में कमी, मज़बूत डिजिटल अवसंरचना की माँग और डिजिटल संप्रभुता में रुचि — पर सरकारों, ऑपरेटरों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं की प्रतिक्रिया से तय होगा।