चीन की वाई-फाई रणनीति पर अमेरिकी सांसद सतर्क, 19 लॉ मेकर्स ने ट्रंप प्रशासन से WRC-27 योजना माँगी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी कांग्रेस के 19 द्विदलीय सांसदों ने ट्रंप प्रशासन को एक संयुक्त पत्र भेजकर 2027 में शंघाई में आयोजित होने वाले वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस (WRC-27) के लिए अमेरिका की ठोस रणनीति की माँग की है। सांसदों की आशंका है कि चीन इस वैश्विक मंच का उपयोग 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम समेत वैश्विक रेडियो नियमों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कर सकता है, जिसका सीधा असर वाई-फाई, 6जी नेटवर्क और अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों के भविष्य पर पड़ेगा।
पत्र की पहल और प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता
इस पहल का नेतृत्व प्रतिनिधि एप्रिल मैक्लेन डिलेनी और जे. ओबरनोल्टे ने किया। पत्र आर्थिक मामलों के अवर विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग, नेशनल टेलीकम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (NTIA) की प्रमुख एरियल रोथ और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के चेयरमैन ब्रेंडन कैर को संबोधित है। इस पर राजा कृष्णमूर्ति, डॉन बेकन, कैथी कास्टर, डेबी डिंगेल, सारा एलफ्रेथ, जोश गॉटहाइमर, क्रिसी हूलाहन और डैरिन ला हूड सहित कई अन्य सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
सांसदों ने 22 अगस्त तक लिखित जवाब देने की समयसीमा निर्धारित की है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर दूरसंचार मानकों पर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।
6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम — विवाद का केंद्र
सांसदों ने 6 गीगाहर्ट्ज बैंड को इस पूरे विवाद का सबसे अहम मुद्दा बताया है। उनका तर्क है कि इस बैंड तक बिना लाइसेंस पहुँच बनाए रखना वाई-फाई की क्षमता विस्तार, तकनीकी नवाचार और अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के लिए अनिवार्य है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि अमेरिका में करीब 90 प्रतिशत स्मार्टफोन डेटा वाई-फाई के माध्यम से उपयोग होता है — हालाँकि यह आँकड़ा ऑपरेटर के अनुसार भिन्न हो सकता है। बढ़ती डेटा माँग को देखते हुए पर्याप्त अनलाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम की उपलब्धता सुनिश्चित करना ज़रूरी है।
सांसदों ने आरोप लगाया कि चीन और उसके समर्थक देश ऊपरी 6 गीगाहर्ट्ज बैंड में केवल लाइसेंस-आधारित मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं। यदि यह मॉडल वैश्विक स्तर पर स्वीकृत हुआ, तो अनलाइसेंस्ड वाई-फाई के विस्तार को झटका लगेगा और कनेक्टिविटी क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव कमज़ोर पड़ सकता है।
अमेरिकी नेतृत्व की माँग
प्रतिनिधि एप्रिल मैक्लेन डिलेनी ने कहा, "जब चीन समेत अन्य देश वैश्विक स्पेक्ट्रम नीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, तब अमेरिका को पीछे नहीं, बल्कि नेतृत्व करना चाहिए।" उन्होंने संघीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोगी देशों के साथ करीबी साझेदारी को अमेरिकी नवाचार और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के लिए अनिवार्य बताया।
सांसदों ने प्रशासन से यह भी पूछा है कि सम्मेलन की तैयारियाँ वरिष्ठ स्तर पर किस प्रकार समन्वित की जा रही हैं, और WRC-27 के लिए अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति की स्थिति क्या है।
सहयोगी देशों का गठबंधन और मेक्सिको-ब्राजील की भूमिका
पत्र में समान सोच वाले देशों का गठबंधन बनाने की योजना के बारे में भी जानकारी माँगी गई है। विशेष रूप से मेक्सिको और ब्राजील के साथ बातचीत की स्थिति पर स्पष्टता माँगी गई है, क्योंकि सांसदों के अनुसार इन दोनों देशों ने पूर्व में 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के कुछ मामलों में चीन का समर्थन किया था।
गौरतलब है कि वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) द्वारा किया जाता है और इसमें लिए गए फैसले वैश्विक स्तर पर दशकों तक प्रभावी रहते हैं।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह
द इंटरनेट एंड टेलीविजन एसोसिएशन ने सांसदों की इस पहल का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि पूरे 6 गीगाहर्ट्ज बैंड तक निरंतर अनलाइसेंस्ड पहुँच अगली पीढ़ी के वाई-फाई, उपभोक्ताओं और कारोबारों के व्यापक हित में है।
अब सभी की नज़रें 22 अगस्त की समयसीमा पर टिकी हैं — जब ट्रंप प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि वह WRC-27 में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए किस रणनीति के साथ उतरेगा।