शी चिनफिंग की 2025 कूटनीति: ट्रंप से मुलाकात, 160 देशों का समर्थन और 4 बड़ी विशेषताएं
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की इस वर्ष की कूटनीति को 15वीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े देशों के साथ संवाद, पड़ोसी देशों से संपर्क, 'वैश्विक दक्षिण' के साथ सहयोग और वैश्विक शासन प्रस्तावों की प्रस्तुति — ये चार धुरियाँ इस वर्ष चीनी राष्ट्राध्यक्ष की विदेश नीति को परिभाषित करती हैं। बीजिंग से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, इस सक्रिय कूटनीति से 'मानव जाति के साझे भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण की दिशा में नई संभावनाएं उभरी हैं।
चीन-अमेरिका संबंधों में नई दिशा
14 मई को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने चीन-अमेरिका के बीच 'रचनात्मक रणनीतिक स्थिर संबंध' स्थापित करने पर सहमति जताई। इस बैठक को अगले तीन वर्षों और उससे आगे के चीन-अमेरिका संबंधों के लिए एक रणनीतिक रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि निरंतर उच्च-स्तरीय संपर्क से दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को बल मिला है।
रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी की वर्षगांठ
इस वर्ष चीन और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ और 'अच्छे पड़ोसियों जैसे मैत्रीपूर्ण संबंध व सहयोग संधि' पर हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ भी है। इस पृष्ठभूमि में शी चिनफिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ कई स्तरों पर रणनीतिक संपर्क बनाए रखा। गौरतलब है कि यह संपर्क ऐसे समय में आया जब यूक्रेन संकट अभी भी अनसुलझा है और पश्चिमी देश रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं।
पड़ोसी देशों के साथ सक्रिय कूटनीति
चीन की विदेश नीति में पड़ोसी देशों की कूटनीति को सदा प्राथमिकता दी जाती रही है। इस वर्ष शी चिनफिंग ने अपनी पहली राजकीय यात्रा के लिए पड़ोसी देश डीपीआरके (उत्तर कोरिया) को चुना। वहीं, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग इस वर्ष चीन का दौरा करने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बने। इसके अलावा वियतनाम, लाओस और ताजिकिस्तान समेत 10 से अधिक पड़ोसी देशों के नेताओं ने इस वर्ष चीन की राजकीय यात्रा की।
'वैश्विक दक्षिण' और वैश्विक शासन पहल
इस वर्ष 'वैश्विक दक्षिण' देशों और विकासशील देशों के नेताओं ने भी क्रमशः चीन का दौरा किया। शी चिनफिंग ने उनके साथ सौहार्दपूर्ण वार्ता की, जिससे समान विकास की दिशा में सहयोग को बल मिला। अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच शी चिनफिंग ने मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए चार सूत्रीय सुझाव प्रस्तुत किए और यूक्रेन संकट के समाधान के लिए वार्ता का मार्ग सुझाया। चीन की वैश्विक शासन पहल को अब तक लगभग 160 देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है।
आगे की राह
शी चिनफिंग के अनुसार, चीन 'हमेशा इतिहास के सही पक्ष पर खड़ा रहेगा' और विभिन्न देशों के साथ मिलकर 'मानव जाति के साझे भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण की दिशा में काम जारी रखेगा। आलोचकों का कहना है कि चीन की इस सक्रिय बहुपक्षीय कूटनीति का असल परीक्षण उन क्षेत्रों में होगा जहाँ उसके हित पश्चिमी देशों के हितों से टकराते हैं — विशेषकर ताइवान, दक्षिण चीन सागर और व्यापार के मोर्चे पर।