27 सितंबर 2026
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बिहार SIR विवाद: CM सम्राट चौधरी का विपक्ष को जवाब — 'आरोप नहीं, तथ्य और दस्तावेज लाएं'

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बिहार SIR विवाद: CM सम्राट चौधरी का विपक्ष को जवाब — 'आरोप नहीं, तथ्य और दस्तावेज लाएं'

सारांश

बिहार CM सम्राट चौधरी ने SIR पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा — 2003 में भी यही प्रक्रिया हुई थी, चुनाव आयोग की व्यवस्था मौजूद है, आंदोलन नहीं, तथ्य लाइए।

मुख्य बातें

CM सम्राट चौधरी ने 27 सितंबर 2026 को पटना में SIR पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार में SIR 2003 में भी हुई थी और 2025 की प्रक्रिया में उसी सूची को आधार बनाया गया।
BLO ने घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया; मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई।
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के आरोपों पर चौधरी ने कहा — आपत्ति के लिए चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेज रखें।
चुनाव रद्द करने की माँग खारिज; मतदाता सेवा पोर्टल पर शिकायत-सुधार की व्यवस्था उपलब्ध बताई।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 27 सितंबर 2026 को पटना में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को केवल आरोप लगाने की बजाय ठोस तथ्य और दस्तावेज सामने रखने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR बिहार में कोई नई या विवादास्पद प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका पहला चरण 2003 में भी संपन्न हुआ था।

SIR प्रक्रिया का ब्यौरा

मुख्यमंत्री चौधरी ने बताया कि बिहार में 2025 में पूरी की गई SIR प्रक्रिया में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधा संपर्क किया। इसके बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की, दावे और आपत्तियों के लिए पर्याप्त समय दिया गया, और अंततः अंतिम सूची प्रकाशित की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के जुलाई 2025 के आँकड़ों में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं की पहचान की प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख था। इस आधार पर बड़ी संख्या में अनियमित प्रविष्टियाँ हटाई गईं।

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के आरोपों पर पलटवार

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव द्वारा SIR को लेकर उठाए गए सवालों का सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों के नाम सूची से हटने का दावा किया गया था, उनके लिए ठोस दस्तावेजों के साथ चुनाव आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर था।

चौधरी ने यह भी जोड़ा कि जहाँ भी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी सामने आई, उसे निर्धारित नियमों के तहत सुधारा गया। उनके अनुसार, राजनीतिक बयानबाजी की तुलना में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशना कहीं अधिक प्रभावी और लोकतांत्रिक है।

चुनाव रद्द करने की माँग पर सरकार का रुख

विपक्ष की चुनाव रद्द करने की माँग को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए चुनाव आयोग और न्यायालय की व्यवस्था पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने का अधिकार है, परंतु प्रत्येक दावे के समर्थन में तथ्य भी अनिवार्य हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय संस्थागत प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए अपनी बात रखनी चाहिए।

मतदाताओं के अधिकार और आयोग की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से जुड़ी शिकायत होने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल का उल्लेख किया, जहाँ नए पंजीकरण, संशोधन, शिकायत और अपील जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी चुनावी वर्ष को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हैं और विपक्ष ने SIR के खिलाफ आंदोलन की घोषणा कर रखी है। चौधरी ने कहा कि आंदोलन का अधिकार है, किंतु उठाए जाने वाले मुद्दों को प्रमाण और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में SIR को लेकर यह राजनीतिक विमर्श और तीव्र होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आक्रामक अधिक है — जो संकेत देती है कि SIR विवाद बिहार में आगामी चुनावी मौसम की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों में से एक बन सकता है। 'तथ्य लाओ' की माँग जितनी तार्किक लगती है, उतनी ही यह उस असली सवाल को टालती भी है — कि सूची से हटाए गए मतदाताओं की संख्या किस श्रेणी की थी और सुधार की प्रक्रिया कितनी सुलभ रही। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पोर्टल-आधारित व्यवस्था उन्हीं नागरिकों के लिए प्रभावी है जो डिजिटल रूप से सक्षम हैं — बिहार की बड़ी ग्रामीण आबादी के लिए यह कितनी पहुँच में है, यह प्रश्न अनुत्तरित रहता है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें BLO घर-घर जाकर मतदाता सूची को अद्यतन करते हैं — मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाता जोड़े जाते हैं। बिहार में यह प्रक्रिया 2003 और फिर 2025 में संपन्न हुई।
विपक्ष SIR पर सवाल क्यों उठा रहा है?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। विपक्ष ने SIR के खिलाफ आंदोलन की भी घोषणा की है।
CM सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब दिया?
मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि SIR पूरी तरह पारदर्शी और स्थापित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जिनके नाम हटे उनके लिए चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज कराने का मौका था, और जहाँ गड़बड़ी मिली वहाँ सुधार किया गया।
मतदाता सूची में गलती होने पर क्या करें?
चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर नए पंजीकरण, संशोधन, शिकायत और अपील की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा संबंधित BLO या जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष भी आवेदन किया जा सकता है।
क्या बिहार में SIR की वजह से चुनाव रद्द हो सकते हैं?
CM सम्राट चौधरी ने इस माँग को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में शिकायत के लिए चुनाव आयोग और न्यायालय की व्यवस्था मौजूद है, और लोकतंत्र में सवाल उठाने के साथ-साथ तथ्य भी प्रस्तुत करने होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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