रूपाली गांगुली का बॉम्बे हाईकोर्ट में एआई डीपफेक मामला, 4 नवंबर को जस्टिस जामदार की बेंच सुनेगी
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल उनकी तस्वीरों और कंटेंट का बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली और अश्लील तस्वीरें तथा मॉर्फ किए गए वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इस याचिका पर 4 नवंबर 2026 को जस्टिस माधव जामदार की बेंच सुनवाई करेगी।
याचिका में क्या है
रूपाली गांगुली ने अपनी याचिका में कहा है कि कुछ वेबसाइटें उनकी पहचान, तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के साथ कर रही हैं। उन्होंने इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का सीधा उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान, छवि या आवाज का व्यावसायिक या किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग उसकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।
बढ़ता हुआ रुझान — पहले भी आ चुकी हैं अभिनेत्रियाँ कोर्ट
यह ऐसे समय में आया है जब एआई डीपफेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई अब एक स्थापित रास्ता बनती जा रही है। इससे पहले अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि वेबसाइटें और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी पहचान का दुरुपयोग कर एआई-निर्मित नकली वीडियो और अश्लील कंटेंट बना रहे हैं। उस मामले में अदालत ने गूगल, मेटा और अन्य प्लेटफॉर्म को चिह्नित आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश देते हुए सामंथा को अंतरिम राहत दी थी।
गौरतलब है कि जुलाई 2026 में अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी एआई से तैयार डीपफेक वीडियो और मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई में अदालत ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे।
पर्सनैलिटी राइट्स और कानूनी ढाँचा
भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट केंद्रीय कानून नहीं है, लेकिन अदालतें इसे संवैधानिक अधिकारों और कॉपीराइट कानून के दायरे में देखती रही हैं। सामंथा और प्रीति जिंटा के मामलों में मिली अंतरिम राहत से यह संकेत मिला है कि अदालतें इस विषय को गंभीरता से ले रही हैं। रूपाली का यह मामला इस उभरते कानूनी क्षेत्र को और आकार देने में सहायक हो सकता है।
आम जनता और डिजिटल सुरक्षा पर असर
एआई डीपफेक का खतरा अब केवल मशहूर हस्तियों तक सीमित नहीं है — विशेषज्ञों के अनुसार आम नागरिक भी इसके शिकार हो सकते हैं। इन हाई-प्रोफाइल मामलों से डिजिटल सुरक्षा और सहमति के बिना कंटेंट उपयोग पर व्यापक जन-जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। 4 नवंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्या रूपाली को भी अंतरिम राहत मिलती है।