3 नवंबर 2026
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रूपाली गांगुली का बॉम्बे हाईकोर्ट में एआई डीपफेक मामला, 4 नवंबर को जस्टिस जामदार की बेंच सुनेगी

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रूपाली गांगुली का बॉम्बे हाईकोर्ट में एआई डीपफेक मामला, 4 नवंबर को जस्टिस जामदार की बेंच सुनेगी

सारांश

रूपाली गांगुली बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँची हैं — एआई डीपफेक और अश्लील कंटेंट के खिलाफ। सामंथा रुथ प्रभु और प्रीति जिंटा के बाद यह तीसरा बड़ा मामला है जो पर्सनैलिटी राइट्स की लड़ाई को और धार दे रहा है। 4 नवंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एआई डीपफेक और अश्लील कंटेंट के खिलाफ याचिका दायर की।
याचिका में पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन का आरोप — बिना सहमति तस्वीर, आवाज व पहचान के इस्तेमाल पर आपत्ति।
मामले की सुनवाई 4 नवंबर 2026 को जस्टिस माधव जामदार की बेंच करेगी।
इससे पहले सामंथा रुथ प्रभु को अदालत ने अंतरिम राहत दी थी; गूगल व मेटा को कंटेंट हटाने के निर्देश मिले थे।
जुलाई 2026 में प्रीति जिंटा भी इसी मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँची थीं और राहत पाई थीं।

टीवी अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल उनकी तस्वीरों और कंटेंट का बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली और अश्लील तस्वीरें तथा मॉर्फ किए गए वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इस याचिका पर 4 नवंबर 2026 को जस्टिस माधव जामदार की बेंच सुनवाई करेगी।

याचिका में क्या है

रूपाली गांगुली ने अपनी याचिका में कहा है कि कुछ वेबसाइटें उनकी पहचान, तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के साथ कर रही हैं। उन्होंने इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का सीधा उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान, छवि या आवाज का व्यावसायिक या किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग उसकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।

बढ़ता हुआ रुझान — पहले भी आ चुकी हैं अभिनेत्रियाँ कोर्ट

यह ऐसे समय में आया है जब एआई डीपफेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई अब एक स्थापित रास्ता बनती जा रही है। इससे पहले अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि वेबसाइटें और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी पहचान का दुरुपयोग कर एआई-निर्मित नकली वीडियो और अश्लील कंटेंट बना रहे हैं। उस मामले में अदालत ने गूगल, मेटा और अन्य प्लेटफॉर्म को चिह्नित आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश देते हुए सामंथा को अंतरिम राहत दी थी।

गौरतलब है कि जुलाई 2026 में अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी एआई से तैयार डीपफेक वीडियो और मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई में अदालत ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे।

पर्सनैलिटी राइट्स और कानूनी ढाँचा

भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट केंद्रीय कानून नहीं है, लेकिन अदालतें इसे संवैधानिक अधिकारों और कॉपीराइट कानून के दायरे में देखती रही हैं। सामंथा और प्रीति जिंटा के मामलों में मिली अंतरिम राहत से यह संकेत मिला है कि अदालतें इस विषय को गंभीरता से ले रही हैं। रूपाली का यह मामला इस उभरते कानूनी क्षेत्र को और आकार देने में सहायक हो सकता है।

आम जनता और डिजिटल सुरक्षा पर असर

एआई डीपफेक का खतरा अब केवल मशहूर हस्तियों तक सीमित नहीं है — विशेषज्ञों के अनुसार आम नागरिक भी इसके शिकार हो सकते हैं। इन हाई-प्रोफाइल मामलों से डिजिटल सुरक्षा और सहमति के बिना कंटेंट उपयोग पर व्यापक जन-जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। 4 नवंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्या रूपाली को भी अंतरिम राहत मिलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर बार पीड़ित को खुद अदालत जाना पड़ा — कोई स्वतःसंज्ञान तंत्र नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या भारत का डिजिटल कानूनी ढाँचा उस रफ्तार से विकसित हो पा रहा है जिस रफ्तार से एआई टूल्स आम हो रहे हैं — और अगर नहीं, तो यह बोझ हर बार पीड़ित के कंधों पर ही क्यों पड़े?
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की?
रूपाली गांगुली ने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल बिना उनकी अनुमति के उनकी तस्वीरों और कंटेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं और एआई की मदद से उनकी नकली व अश्लील तस्वीरें-वीडियो बनाई जा रही हैं। उन्होंने इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन बताते हुए अदालत से दखल देने की माँग की है।
इस मामले की सुनवाई कब और किसके सामने होगी?
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 4 नवंबर 2026 को सुनवाई होगी। यह मामला जस्टिस माधव जामदार की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है।
पर्सनैलिटी राइट्स क्या होते हैं और इनका उल्लंघन कैसे होता है?
पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति का यह अधिकार है कि उसकी पहचान, तस्वीर, आवाज और छवि का व्यावसायिक या किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाए। एआई डीपफेक तकनीक से नकली कंटेंट बनाकर उसे अश्लील वेबसाइटों पर डालना इसका सीधा उल्लंघन माना जाता है।
क्या पहले भी किसी अभिनेत्री को इस मामले में राहत मिली है?
हाँ, अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु को बॉम्बे हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी और अदालत ने गूगल, मेटा व अन्य प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे। इसी तरह जुलाई 2026 में प्रीति जिंटा को भी डीपफेक वीडियो के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली थी।
एआई डीपफेक के खिलाफ भारत में क्या कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं?
भारत में अभी एआई डीपफेक के खिलाफ कोई विशेष केंद्रीय कानून नहीं है, लेकिन अदालतें पर्सनैलिटी राइट्स को संवैधानिक अधिकारों और कॉपीराइट कानून के तहत संरक्षित मानती हैं। पीड़ित अदालत में याचिका दायर कर अंतरिम राहत, कंटेंट हटवाने और हर्जाने की माँग कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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