11 अगस्त 2026
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प्रीति जिंटा ने एआई फर्जी तस्वीरों पर मेटा-गूगल के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की याचिका

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प्रीति जिंटा ने एआई फर्जी तस्वीरों पर मेटा-गूगल के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की याचिका

सारांश

प्रीति जिंटा का बॉम्बे हाई कोर्ट पहुँचना महज एक सेलेब्रिटी की शिकायत नहीं — यह भारत में एआई-जनित कंटेंट के खिलाफ बढ़ती कानूनी लड़ाई की अगली कड़ी है। मेटा और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों को घेरने की यह कोशिश पर्सनैलिटी राइट्स के लिए एक नई मिसाल कायम कर सकती है।

मुख्य बातें

प्रीति जिंटा ने 18 जून 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट में मेटा और गूगल के खिलाफ याचिका दायर की।
आरोप है कि एआई की मदद से उनकी नकली तस्वीरें और कंटेंट बिना अनुमति बनाकर इंटरनेट पर फैलाए गए।
जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने अभिनेत्री को औपचारिक मुकदमा दायर करने की अनुमति दी।
याचिका में पर्सनैलिटी राइट्स और कॉपीराइट अधिनियम 1957 के तहत नैतिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला दिया गया।
इससे पहले अमिताभ बच्चन , ऋतिक रोशन , सलमान खान सहित 11 से अधिक बॉलीवुड सितारे ऐसे मामलों में अदालत जा चुके हैं।

अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने 18 जून 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर मेटा और गूगल सहित प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली तस्वीरें और कंटेंट तैयार कर इंटरनेट पर प्रसारित किए गए। जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने याचिका पर विचार करते हुए अभिनेत्री को औपचारिक मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

याचिका में क्या है

प्रीति जिंटा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके नाम, पहचान और छवि का बिना अनुमति दुरुपयोग किया गया, जिससे उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन हुआ है। उनका तर्क है कि एआई-जनित कंटेंट को इस पैमाने पर फैलाया गया कि आम दर्शक उसे वास्तविक मान सकते हैं, जिससे गंभीर गलतफहमी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचता है।

अभिनेत्री ने यह भी कहा कि कॉपीराइट अधिनियम 1957 के अंतर्गत उनके नैतिक अधिकारों का भी हनन हुआ है। उनकी पहचान का व्यावसायिक उपयोग बिना किसी सहमति या अनुमति के किया गया, जो कानूनी दृष्टि से अस्वीकार्य है।

अदालत का रुख

बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल कंपनियों के कार्यालय विभिन्न शहरों और देशों में स्थित हैं, इसलिए मामले के कुछ पहलू न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर जा सकते हैं। बावजूद इसके, अदालत ने संपूर्ण मामले की सुनवाई करने और अंतिम निर्णय देने की इच्छा जताई है।

बॉलीवुड में बढ़ता एआई का दुरुपयोग

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में एआई तकनीक के प्रसार के साथ सेलेब्रिटीज की फर्जी तस्वीरें, डीपफेक वीडियो और क्लोन की गई आवाज़ों के मामले तेज़ी से बढ़े हैं। गौरतलब है कि प्रीति जिंटा से पहले अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, आर. माधवन, ऋतिक रोशन और विवेक ओबेरॉय भी अपनी पहचान और छवि की सुरक्षा के लिए अदालतों का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। इन सभी मामलों में न्यायालयों ने उनके पर्सनैलिटी राइट्स को मान्यता देते हुए कानूनी संरक्षण प्रदान किया।

क्या होगा आगे

अब यह देखना होगा कि बॉम्बे हाई कोर्ट मेटा और गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के खिलाफ भारतीय अदालत के अधिकार क्षेत्र को किस हद तक लागू कर पाती है। यह मामला भारत में एआई-जनित कंटेंट के नियमन और सेलेब्रिटी अधिकारों की कानूनी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार अदालतों को इसे नए सिरे से परिभाषित करना पड़ता है। जब तक एआई कंटेंट के लिए स्पष्ट दायित्व ढाँचा नहीं बनता, ये मामले व्यक्तिगत जीत तो दिला सकते हैं, लेकिन व्यापक बदलाव नहीं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रीति जिंटा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में किसके खिलाफ और क्यों याचिका दायर की?
प्रीति जिंटा ने मेटा और गूगल सहित प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ याचिका दायर की है, क्योंकि उनकी सहमति के बिना एआई की मदद से उनकी नकली तस्वीरें और कंटेंट बनाकर इंटरनेट पर फैलाए गए। उनका कहना है कि इससे उनकी पर्सनैलिटी राइट्स और कॉपीराइट अधिनियम 1957 के तहत नैतिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला सुनाया?
जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने प्रीति जिंटा की याचिका पर विचार करते हुए उन्हें औपचारिक मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि संबंधित कंपनियों के कार्यालय अलग-अलग देशों में होने के कारण मामले के कुछ पहलू क्षेत्राधिकार से बाहर जा सकते हैं, फिर भी पूरे मामले की सुनवाई की जाएगी।
एआई-जनित फर्जी कंटेंट के खिलाफ और कौन-से बॉलीवुड सितारे अदालत जा चुके हैं?
अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, आर. माधवन, ऋतिक रोशन और विवेक ओबेरॉय पहले भी अपनी पहचान और छवि की सुरक्षा के लिए अदालतों का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। इन सभी मामलों में न्यायालयों ने उनके अधिकारों को मान्यता देते हुए कानूनी संरक्षण प्रदान किया।
पर्सनैलिटी राइट्स क्या होते हैं और भारत में इनकी कानूनी स्थिति क्या है?
पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति के नाम, चेहरे, आवाज़ और पहचान के व्यावसायिक उपयोग पर उसके नियंत्रण का अधिकार है। भारत में अभी तक इसके लिए कोई समर्पित कानून नहीं है, लेकिन अदालतें कॉपीराइट अधिनियम और संवैधानिक अधिकारों के आधार पर इन्हें मान्यता देती रही हैं।
इस मामले का आगे क्या असर हो सकता है?
यह मामला भारत में एआई-जनित कंटेंट के नियमन और वैश्विक तकनीकी कंपनियों पर भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इसके नतीजे भविष्य में एआई कंटेंट के लिए स्पष्ट कानूनी ढाँचे की माँग को और तेज़ कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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