प्रीति जिंटा ने एआई फर्जी तस्वीरों पर मेटा-गूगल के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की याचिका
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने 18 जून 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर मेटा और गूगल सहित प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली तस्वीरें और कंटेंट तैयार कर इंटरनेट पर प्रसारित किए गए। जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने याचिका पर विचार करते हुए अभिनेत्री को औपचारिक मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
याचिका में क्या है
प्रीति जिंटा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके नाम, पहचान और छवि का बिना अनुमति दुरुपयोग किया गया, जिससे उनके पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन हुआ है। उनका तर्क है कि एआई-जनित कंटेंट को इस पैमाने पर फैलाया गया कि आम दर्शक उसे वास्तविक मान सकते हैं, जिससे गंभीर गलतफहमी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचता है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि कॉपीराइट अधिनियम 1957 के अंतर्गत उनके नैतिक अधिकारों का भी हनन हुआ है। उनकी पहचान का व्यावसायिक उपयोग बिना किसी सहमति या अनुमति के किया गया, जो कानूनी दृष्टि से अस्वीकार्य है।
अदालत का रुख
बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल कंपनियों के कार्यालय विभिन्न शहरों और देशों में स्थित हैं, इसलिए मामले के कुछ पहलू न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर जा सकते हैं। बावजूद इसके, अदालत ने संपूर्ण मामले की सुनवाई करने और अंतिम निर्णय देने की इच्छा जताई है।
बॉलीवुड में बढ़ता एआई का दुरुपयोग
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में एआई तकनीक के प्रसार के साथ सेलेब्रिटीज की फर्जी तस्वीरें, डीपफेक वीडियो और क्लोन की गई आवाज़ों के मामले तेज़ी से बढ़े हैं। गौरतलब है कि प्रीति जिंटा से पहले अमिताभ बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, आर. माधवन, ऋतिक रोशन और विवेक ओबेरॉय भी अपनी पहचान और छवि की सुरक्षा के लिए अदालतों का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। इन सभी मामलों में न्यायालयों ने उनके पर्सनैलिटी राइट्स को मान्यता देते हुए कानूनी संरक्षण प्रदान किया।
क्या होगा आगे
अब यह देखना होगा कि बॉम्बे हाई कोर्ट मेटा और गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के खिलाफ भारतीय अदालत के अधिकार क्षेत्र को किस हद तक लागू कर पाती है। यह मामला भारत में एआई-जनित कंटेंट के नियमन और सेलेब्रिटी अधिकारों की कानूनी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।