दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा को दी मंजूरी

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दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा को दी मंजूरी

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर के नाम और तस्वीरों का बिना अनुमति उपयोग करने वाले ऑनलाइन कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला उनके पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। जानें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

गौतम गंभीर के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा का मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनधिकृत सामग्री हटाने का आदेश जस्टिस ज्योति सिंह का महत्वपूर्ण फैसला एआई और डीपफेक तकनीकी का संदर्भ हाई-प्रोफ़ाइल हस्तियों की पहचान की सुरक्षा

नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को यह स्पष्ट किया कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स साइट्स को निर्देशित करेगा कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान हेड कोच गौतम गंभीर के नाम और तस्वीरों का बिना अनुमति उपयोग कर निर्मित ऑनलाइन सामग्री को हटाया जाए।

जस्टिस ज्योति सिंह की एकल न्यायाधीश बेंच ने कहा कि मेटा और गूगल जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए जाएंगे कि वे गंभीर द्वारा बताए गए आपत्तिजनक लिंक्स को हटा दें और ऐसे कंटेंट को अपलोड करने वाली संस्थाओं की जानकारी उपलब्ध कराएं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर के पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की पुष्टि करते हुए उनकी सहमति के बिना चल रहे आपत्तिजनक पोस्ट और कंटेंट को हटाने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान, गंभीर ने यह तर्क दिया कि उनके नाम, आवाज़ और तस्वीरों का बिना इजाजत के व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए गलत इस्तेमाल हो रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरणों और डीपफेक तकनीक का उपयोग भी शामिल है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा, गूगल और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे गंभीर की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले आपत्तिजनक यूआरएल (लिंक) और ऑनलाइन पोस्ट को हटाएं। जस्टिस सिंह ने बताया कि एक व्यापक आदेश जारी किया जाएगा, जिसमें ऐसे कंटेंट के पीछे की संस्थाओं की बुनियादी सब्सक्राइबर जानकारी (बीएसआई) देने के निर्देश भी शामिल होंगे।

यह मामला गंभीर द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के कमर्शियल डिवीजन में दायर की गई एक याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने 'डिजिटल रूप से किसी और की पहचान अपनाने के एक सुनियोजित अभियान' का आरोप लगाया है, जिसमें एआई-सक्षम फेस-स्वैपिंग और वॉइस-क्लोनिंग उपकरण शामिल हैं।

गंभीर ने तर्क किया है कि इंस्टाग्राम, एक्स, यू-ट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसमें वायरल डीपफेक वीडियो भी शामिल हैं जिन्हें झूठे तौर पर उनसे जोड़ा गया है, और जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है। इस याचिका में सभी प्रतिवादियों पर बिना सहमति के उनके नाम, तस्वीर, आवाज़ या व्यक्तित्व का इस्तेमाल करने पर स्थायी रोक लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही, २.५ करोड़ रुपए के हर्जाने और उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।

गंभीर का मामला उन उच्च-प्रोफ़ाइल हस्तियों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का हवाला दिया है।

गंभीर से पहले भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर, आध्यात्मिक गुरु और 'आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, अभिनेता नागार्जुन, काजोल, ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन, गायक जुबिन नौटियाल, फिल्म निर्माता करण जौहर और पॉडकास्टर राज शमानी ने अपनी पहचान, रूप-रंग या एआई-जनित नकल के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत से सुरक्षा प्राप्त की है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम गंभीर का मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जो यह दर्शाता है कि तकनीकी प्लेटफॉर्म्स को अपने उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को गौतम गंभीर के नाम और तस्वीरों का बिना अनुमति उपयोग करने वाले कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस