18 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एसआईआर रद्द करो: मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए गए, NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी का केंद्र पर निशाना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एसआईआर रद्द करो: मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए गए, NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी का केंद्र पर निशाना

सारांश

NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी का बड़ा आरोप — SIR के ज़रिए 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। साथ ही महिला आरक्षण में OBC-मुस्लिम कोटे की माँग और परिसीमन विधेयक पर दक्षिण भारत की सीटें घटाने की 'साज़िश' का आरोप। विपक्ष की लड़ाई तेज़।

मुख्य बातें

NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में SIR को तत्काल रद्द करने की माँग की।
उनके अनुसार, 140 करोड़ की आबादी में से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए — यानी लगभग 20 से 25 फीसदी मतदाता प्रभावित।
महिला आरक्षण के भीतर OBC और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण देने की माँग उठाई।
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को दक्षिण भारत की संसदीय सीटें घटाने की योजना बताते हुए विरोध किया।
'रिजीम चेंज' पर कहा — दमनकारी सरकार को लोकतांत्रिक तरीकों से बदलना ज़रूरी; भारत में तख्तापलट नहीं।

राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया और कहा कि इन मतदाताओं को दोबारा नामांकित करने की तत्काल ज़रूरत है।

SIR पर मुख्य आरोप

सिद्दीकी ने कहा, 'एसआईआर रद्द होना चाहिए। दुनिया के तमाम देश मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए कवायद करते हैं, मतदाता को नामांकित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत एक ऐसा देश है जो अपने मतदाताओं की सूची को कम करने की बात कर रहा है।' उनके अनुसार, देश की 50 से 60 फीसदी आबादी ही मतदाता होती है — शेष अल्पवयस्क बच्चे होते हैं — और उनमें से भी 20 से 25 फीसदी मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया है।

उन्होंने माँग की कि हटाए गए सभी मतदाताओं को पुनः नामांकित किया जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चल रहे SIR की प्रक्रिया पर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष है।

पश्चिम बंगाल और भाजपा पर तंज

एक अन्य सवाल के जवाब में सिद्दीकी ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी — सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, जैसा चाहें वैसा कर लें।' उनका इशारा इस ओर था कि जब सत्ता एक ही दल के हाथों में हो, तो निगरानी और जवाबदेही कमज़ोर पड़ जाती है।

महिला आरक्षण और OBC-मुस्लिम महिलाओं की मांग

सिद्दीकी ने महिला आरक्षण विधेयक पर भी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और इसमें भ्रम फैलाने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक OBC महिलाओं और विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक ग्रामीण, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाएँ संसद तक नहीं पहुँच पाएंगी।

उन्होंने चेतावनी दी, 'जिनकी आबादी 7 प्रतिशत है, उनकी महिलाएँ 70 प्रतिशत होंगी और देश के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ संसद तक नहीं पहुँच पाएंगी।' उन्होंने किसी भी नेक काम के लिए मुहूर्त की प्रतीक्षा न करने की सलाह देते हुए सरकार से विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया।

परिसीमन विधेयक का विरोध

सिद्दीकी ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की भी कड़ी आलोचना की। उनके अनुसार, इस विधेयक की आड़ में उत्तर भारत में संसदीय सीटें बढ़ाकर दक्षिण भारत की सीटें घटाने की योजना है, जो दक्षिण की राजनीतिक भागीदारी को समाप्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि 'कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना' — इस विधेयक की असली मंशा पर उन्होंने सवाल खड़े किए।

'रिजीम चेंज' और आंदोलन की राह

सत्ता परिवर्तन यानी 'रिजीम चेंज' वाली टिप्पणी को लेकर पूछे जाने पर सिद्दीकी ने कहा कि जब कोई सरकार दमनकारी हो जाए, तो उसे लोकतांत्रिक तरीकों से बदलना ज़रूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, 'भारत में लोकतंत्र है, यहाँ कोई तख्तापलट नहीं हो रहा — यह पाकिस्तान नहीं है।' उनके अनुसार, विरोध आंदोलन जारी रहेगा, गिरफ्तारियाँ भी होंगी और जमानत भी मिलती रहेगी।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग SIR पर विपक्ष की माँगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या सरकार महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर कोई ठोस समयसीमा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि SIR के तहत मतदाता सूची में हुई कटौती के पीछे प्रशासनिक कारण हैं या राजनीतिक। चुनाव आयोग ने अब तक इन आँकड़ों का कोई खंडन या स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया है, जो निगरानी की कमी को उजागर करता है। महिला आरक्षण में OBC-मुस्लिम उपकोटे की माँग नई नहीं है, लेकिन परिसीमन से जोड़कर इसे उठाना दक्षिण बनाम उत्तर की राजनीतिक फॉल्टलाइन को और गहरा करने की रणनीति भी हो सकती है — जिसका विश्लेषण मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः नदारद रहता है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) क्या है और इसे रद्द करने की माँग क्यों हो रही है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो लोकतांत्रिक भागीदारी के अधिकार का हनन है।
कितने मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं?
नसीम सिद्दीकी के अनुसार 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 से 25 फीसदी है। हालाँकि चुनाव आयोग ने इन आँकड़ों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
NCP-SP ने महिला आरक्षण पर क्या माँग रखी है?
NCP-SP प्रवक्ता ने माँग की है कि महिला आरक्षण के भीतर OBC महिलाओं और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उनका तर्क है कि बिना उपकोटे के ग्रामीण, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाएँ संसद तक नहीं पहुँच पाएंगी।
परिसीमन विधेयक का विरोध क्यों हो रहा है?
सिद्दीकी का आरोप है कि प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की आड़ में उत्तर भारत में संसदीय सीटें बढ़ाकर दक्षिण भारत की सीटें घटाने की योजना है। उनके अनुसार यह दक्षिण भारत की राजनीतिक भागीदारी को संसद में सीमित करने का प्रयास है।
'रिजीम चेंज' पर नसीम सिद्दीकी का क्या कहना है?
सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि 'रिजीम चेंज' का अर्थ तख्तापलट नहीं बल्कि लोकतांत्रिक बदलाव है। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान नहीं है और यहाँ सत्ता परिवर्तन संविधान के दायरे में होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 2 महीने पहले