एसआईआर रद्द करो: मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए गए, NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी का केंद्र पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया और कहा कि इन मतदाताओं को दोबारा नामांकित करने की तत्काल ज़रूरत है।
SIR पर मुख्य आरोप
सिद्दीकी ने कहा, 'एसआईआर रद्द होना चाहिए। दुनिया के तमाम देश मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए कवायद करते हैं, मतदाता को नामांकित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत एक ऐसा देश है जो अपने मतदाताओं की सूची को कम करने की बात कर रहा है।' उनके अनुसार, देश की 50 से 60 फीसदी आबादी ही मतदाता होती है — शेष अल्पवयस्क बच्चे होते हैं — और उनमें से भी 20 से 25 फीसदी मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया है।
उन्होंने माँग की कि हटाए गए सभी मतदाताओं को पुनः नामांकित किया जाए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चल रहे SIR की प्रक्रिया पर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष है।
पश्चिम बंगाल और भाजपा पर तंज
एक अन्य सवाल के जवाब में सिद्दीकी ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल में भी भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी — सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, जैसा चाहें वैसा कर लें।' उनका इशारा इस ओर था कि जब सत्ता एक ही दल के हाथों में हो, तो निगरानी और जवाबदेही कमज़ोर पड़ जाती है।
महिला आरक्षण और OBC-मुस्लिम महिलाओं की मांग
सिद्दीकी ने महिला आरक्षण विधेयक पर भी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और इसमें भ्रम फैलाने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक OBC महिलाओं और विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक ग्रामीण, पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाएँ संसद तक नहीं पहुँच पाएंगी।
उन्होंने चेतावनी दी, 'जिनकी आबादी 7 प्रतिशत है, उनकी महिलाएँ 70 प्रतिशत होंगी और देश के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ संसद तक नहीं पहुँच पाएंगी।' उन्होंने किसी भी नेक काम के लिए मुहूर्त की प्रतीक्षा न करने की सलाह देते हुए सरकार से विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया।
परिसीमन विधेयक का विरोध
सिद्दीकी ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की भी कड़ी आलोचना की। उनके अनुसार, इस विधेयक की आड़ में उत्तर भारत में संसदीय सीटें बढ़ाकर दक्षिण भारत की सीटें घटाने की योजना है, जो दक्षिण की राजनीतिक भागीदारी को समाप्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि 'कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना' — इस विधेयक की असली मंशा पर उन्होंने सवाल खड़े किए।
'रिजीम चेंज' और आंदोलन की राह
सत्ता परिवर्तन यानी 'रिजीम चेंज' वाली टिप्पणी को लेकर पूछे जाने पर सिद्दीकी ने कहा कि जब कोई सरकार दमनकारी हो जाए, तो उसे लोकतांत्रिक तरीकों से बदलना ज़रूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, 'भारत में लोकतंत्र है, यहाँ कोई तख्तापलट नहीं हो रहा — यह पाकिस्तान नहीं है।' उनके अनुसार, विरोध आंदोलन जारी रहेगा, गिरफ्तारियाँ भी होंगी और जमानत भी मिलती रहेगी।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग SIR पर विपक्ष की माँगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या सरकार महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर कोई ठोस समयसीमा देती है।