नसीम सिद्दीकी का BJP पर आरोप: मतदाता सूची से नाम काटे, ज्ञानेश कुमार इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) — एनसीपी-एसपी — के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 17 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार विरोध प्रदर्शनों को जानबूझकर कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पूरी होने तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर गंभीर आरोप
सिद्दीकी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और SSR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम पहले काटे गए और बाद में 3 करोड़ नए नाम जोड़ने को 'उपलब्धि' बताया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना कीमत बढ़ाने के बाद छूट देने से की — पहले नुकसान, फिर आंशिक राहत को श्रेय लेना।
उनके अनुसार, दुनिया भर में नए मतदाता जोड़ने के अभियान चलाए जाते हैं, जबकि भारत में कथित तौर पर मतदाताओं के नाम काटने की मुहिम चल रही है, जिसे उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
व्यापारियों के नुकसान का मुद्दा: सिद्दीकी का जवाब
प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को हो रहे नुकसान के सवाल पर सिद्दीकी ने कहा कि यह तर्क आंदोलन को विफल करने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय दिल्ली में हुए विरोध के दौरान व्यापारी नुकसान को इस तरह प्रचारित नहीं किया गया था।
सिद्दीकी के अनुसार, व्यापारी वर्ग का बड़ा हिस्सा BJP का समर्थक है और सरकार इसी मुद्दे का उपयोग जनांदोलन को कमज़ोर करने के लिए कर रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश की तरक्की के लिए साहू, फुले और अंबेडकर के विचारों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
गिरफ्तारियों पर प्रतिक्रिया और आंदोलन की स्थिति
प्रदर्शन के दौरान हुई गिरफ्तारियों पर सिद्दीकी ने कहा कि सरकार गिरफ्तारियाँ करती रहेगी, लोग जेल से बाहर आते रहेंगे और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि कई प्रदर्शनकारियों को रास्तों, ट्रेनों और बसों में रोका गया, फिर भी लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर विरोध दर्ज कराया।
मुंबई के आज़ाद मैदान में अनुमति लेकर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई ऐतिहासिक आंदोलनों का शहर है और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की तरह, एक प्रदर्शन की संख्या से किसी संघर्ष का भविष्य तय नहीं होता।
राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विरोध प्रदर्शनों को 'अराजकता' और 'सरकार बदलने की साजिश' बताने पर सिद्दीकी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत में तख्तापलट नहीं, सत्ता परिवर्तन होता है — और यह जनता के मतों से तय होता है। संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों के विरोध को 'अराजकता' कहना संविधान और देश की जनता का अपमान है।
शिंदे के बयान पर उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि उनसे ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी।
परिसीमन, महिला आरक्षण और 2029 का राजनीतिक दावा
परिसीमन के मुद्दे पर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि BJP दक्षिण भारत में अपनी कमज़ोर राजनीतिक स्थिति के चलते वहाँ के राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व घटाना चाहती है और उत्तर भारत में सीटें बढ़ाना चाहती है। महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था, इसलिए BJP को अकेले श्रेय लेने की ज़रूरत नहीं। उन्होंने माँग की कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
सिद्दीकी ने दावा किया कि 2029 में इंडिया गठबंधन को नहीं, बल्कि BJP को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा और विरोध प्रदर्शनों तथा जनता की नाराज़गी का असर आने वाले समय में सामने आएगा।