नसीम सिद्दीकी का BJP-RSS पर हमला: 'सवाल उठाने वाले को दिमागी नक्सल कहना लोकतंत्र का अपमान'
सारांश
मुख्य बातें
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति के कई ज्वलंत मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा प्रहार किया। उनका कहना था कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले किसी भी बुद्धिजीवी को 'दिमागी नक्सल' की संज्ञा देना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है, बल्कि करोड़ों जागरूक नागरिकों का अपमान भी है।
दिमागी नक्सल वाले बयान पर सीधा हमला
सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि BJP और प्रधानमंत्री की दृष्टि में कोई भी व्यक्ति जो बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक नीति, विदेश नीति या कानून-व्यवस्था पर प्रश्न उठाए, उसे 'दिमागी नक्सल' करार दे दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'यदि इस परिभाषा को सही मान लिया जाए, तो देश में करोड़ों नागरिकों को इस श्रेणी में रखा जा सकता है।' उनके अनुसार, असहमति को अपराध की तरह पेश करने की यह प्रवृत्ति स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
RSS की विचारधारा पर विवादास्पद टिप्पणी
सिद्दीकी ने विचारधारा के स्तर पर RSS की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से करते हुए आरोप लगाया कि इन संगठनों की सोच लोगों को एकजुट करने के बजाय विभाजित करने और हिंसा को बढ़ावा देने वाली है। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कुछ लोग महात्मा गांधी के हत्यारे का महिमामंडन करते हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी तत्काल राजनीतिक विवाद का विषय बन सकती है।
गोपीनाथ मुंडे और एकनाथ शिंदे प्रकरण पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के गोपीनाथ मुंडे को लेकर दिए गए बयान पर सिद्दीकी ने कहा कि मुंडे एक बड़े और होनहार नेता थे, जो केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनके निधन के इतने वर्षों बाद इस प्रकार की राजनीतिक चर्चाएं निरर्थक हैं और इन्हें बंद किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के उस दावे पर — जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि एकनाथ शिंदे कभी कांग्रेस में शामिल होने को तैयार थे — सिद्दीकी ने कहा कि वह इस घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी नहीं रहे। उन्होंने जोड़ा कि आज दल-बदल की राजनीति इतनी सामान्य हो चुकी है कि यह कहना मुश्किल है कि कौन नेता कब किस दल में जाएगा।
फडणवीस-मोदी मुलाकात और पालकमंत्री विवाद
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रधानमंत्री से मुलाकात पर सिद्दीकी ने कहा कि यह स्वाभाविक है, क्योंकि महाराष्ट्र और केंद्र दोनों में BJP की सरकार है। उन्होंने इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह दी।
भरत गोगावले को रायगढ़ का पालकमंत्री बनाए जाने पर महायुति में मतभेद की अटकलों पर सिद्दीकी ने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है और महायुति का आंतरिक मामला है।
सोनिया गांधी और वंदे मातरम विवाद
वंदे मातरम को लेकर BJP द्वारा सोनिया गांधी और कांग्रेस पर उठाए गए सवालों पर सिद्दीकी ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उनके अनुसार, सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से विवाह के बाद भारतीय परंपराओं और मूल्यों को पूरी तरह अपनाया और जीवन भर भारत को समर्पित रहीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक समय सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बन सकती थीं, लेकिन उन्होंने स्वयं यह पद अस्वीकार कर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का रास्ता चुना। सिद्दीकी ने उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने को 'राजनीतिक रूप से अनर्गल' बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच वैचारिक टकराव तेज हो रहा है। आने वाले दिनों में इन बयानों पर BJP और RSS की ओर से तीखी प्रतिक्रिया की संभावना है।