भाजपा नियुक्तियाँ उनका आंतरिक मामला, 'दिमागी नक्सल' बयान पर संजय राउत का तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 18 अगस्त 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय संगठनात्मक नियुक्तियों और प्रधानमंत्री के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान — दोनों पर एक साथ तीखी प्रतिक्रिया दी। राउत ने BJP के आंतरिक फेरबदल पर टिप्पणी से परहेज़ करते हुए PM के स्वतंत्रता दिवस भाषण के एक विशेष वाक्यांश को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
भाजपा नियुक्तियों पर राउत का रुख
संजय राउत ने BJP के नए पदाधिकारियों की घोषणा पर कहा, 'कौन वापसी कर रहा है और किसे हटाया जा रहा है, यह पार्टी का आंतरिक संगठनात्मक मामला है। दूसरी पार्टी के लोगों के लिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ पुराने नेताओं की वापसी हुई है, जिनमें स्मृति ईरानी और राम माधव शामिल हैं, और विनोद तावड़े को संगठन के सबसे अनुभवी व्यक्तियों में से एक बताया। राउत ने कहा, 'अब देखेंगे कि संगठन आगे कैसे काम करता है।'
'दिमागी नक्सल' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
राउत की सबसे तीखी प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री के 15 अगस्त के भाषण में इस्तेमाल किए गए 'दिमागी नक्सल' वाक्यांश पर थी। उन्होंने कहा, 'दिमागी नक्सल जिसके दिमाग से आया है, या जिसने भी उन्हें यह शब्द लिखकर दिया है, उनके दिमाग के बारे में देश को बहुत चिंता है। उनकी मानसिक स्थिति ठीक है या नहीं, यह देखना पड़ेगा। अगर ठीक नहीं है, तो उनकी मानसिक स्थिति ठीक करनी पड़ेगी।' यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं में से अब तक की सबसे सीधी और व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं में से एक मानी जा रही है।
PM मोदी ने क्या कहा था
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में 'दिमागी नक्सल' पद का प्रयोग किया था। मोदी ने कहा था कि देश ने हिंसा के रास्ते पर चलने वाले हथियारबंद नक्सलियों के संकट से काफी हद तक मुक्ति पा ली है, लेकिन 'दिमागी नक्सली' मानसिकता अभी भी सक्रिय है और मौके की तलाश में रहती है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब BJP ने हाल ही में व्यापक संगठनात्मक फेरबदल किया है और विपक्षी दल इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) महाराष्ट्र में BJP की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है और राउत पार्टी के मुखर प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं। आने वाले दिनों में 'दिमागी नक्सल' बयान पर राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।