3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया: सपा में स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए कोई जगह नहीं — अवधेश प्रसाद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया: सपा में स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए कोई जगह नहीं — अवधेश प्रसाद

सारांश

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने साफ़ कर दिया — स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी 'परख चुकी है' और अखिलेश यादव ने उनके लिए दरवाज़े बंद कर दिए हैं। मौर्य की 'न पिद्दी न पिद्दी का शोरबा' टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति के साथ प्रसाद ने मौर्य पर 'राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश' का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में कहा कि अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए सपा के दरवाज़े बंद कर दिए हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य के 'अखिलेश यादव इंडी गठबंधन का केवल एक हिस्सा हैं' वाले बयान को अवधेश प्रसाद ने सिरे से खारिज किया।
मौर्य की 'न पिद्दी न पिद्दी का शोरबा' टिप्पणी को अवधेश प्रसाद ने 'छोटी मानसिकता' का प्रतीक बताया।
अवधेश प्रसाद का आरोप — मौर्य इंडी गठबंधन में शामिल नहीं हो पा रहे, इसीलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।
सपा ने एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग (ECI) से तत्काल कार्रवाई की माँग की।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में पूर्व सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के हालिया बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य को पूरी तरह परख चुके हैं और पार्टी में अब उनके लिए कोई स्थान नहीं है।

अवधेश प्रसाद का सीधा संदेश

अवधेश प्रसाद ने कहा, 'परखे हुए को परखा नहीं जाता। स्वामी प्रसाद मौर्य को समाजवादी पार्टी और हमारे नेता अखिलेश यादव ने पूरी तरह परख लिया है। उनकी बातों में कितनी उपयोगिता है और कितनी अनुपयोगिता, यह पार्टी अच्छी तरह समझ चुकी है।' उन्होंने जोड़ा कि अखिलेश यादव ने नपी-तुली बात कहते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में स्वामी प्रसाद मौर्य का कोई स्थान नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार सपा नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं।

इंडी गठबंधन और अखिलेश की भूमिका पर विवाद

स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में कहा था कि अखिलेश यादव इंडी गठबंधन का 'केवल एक हिस्सा हैं, पूरा गठबंधन नहीं।' इस बयान पर अवधेश प्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि यह बात सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरा देश जानता है कि अखिलेश यादव इंडी गठबंधन के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। उनकी राजनीतिक हैसियत किसी से छिपी नहीं है।

मौर्य की 'न पिद्दी न पिद्दी का शोरबा' टिप्पणी पर नाराज़गी

अखिलेश यादव को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य की 'न पिद्दी न पिद्दी का शोरबा' वाली टिप्पणी पर भी अवधेश प्रसाद ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, 'स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे साथ काम कर चुके हैं और नेतृत्व में भी रह चुके हैं — ऐसे में इस तरह की टिप्पणी उनकी छोटी मानसिकता को दर्शाती है।' गौरतलब है कि मौर्य एक समय सपा में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं।

मौर्य की राजनीतिक मजबूरी पर आरोप

अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि स्वामी प्रसाद मौर्य इंडी गठबंधन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं और इसीलिए अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब स्वामी प्रसाद मौर्य को कोई पूछ नहीं रहा और साथ काम कर चुके लोगों के बारे में इस तरह की बयानबाज़ी करना उचित नहीं है।

एसआईआर और मतदाता सूची पर सपा का रुख

इसी संवाददाता सम्मेलन में अवधेश प्रसाद ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार लोगों को जागरूक कर रही है और अखिलेश यादव सहित अन्य नेता सबूतों के साथ मतदाता सूची से नाम कटने का विवरण सामने रख रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके बावजूद कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा रहा है और आयोग को इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के मद्देनज़र मतदाता सूची का यह विवाद सपा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश की ओबीसी राजनीति में बढ़ती दरारों का संकेत है — स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे कुर्मी समुदाय के प्रभावशाली नेता का सपा से पूरी तरह कट जाना अखिलेश की उस जातीय-गठबंधन रणनीति को कमज़ोर कर सकता है जिस पर 2027 की तैयारी टिकी है। दूसरी ओर, मौर्य की 'न पिद्दी न पिद्दी का शोरबा' जैसी भाषा बताती है कि वे इंडी गठबंधन के बाहर रहकर सौदेबाज़ी की कोशिश में हैं। एसआईआर पर सपा की आवाज़ और मतदाता सूची विवाद को एक साथ देखें तो पार्टी दोहरे मोर्चे पर लड़ रही है — भीतर से नेताओं के जाने की चुनौती और बाहर से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के बीच विवाद क्या है?
स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में अखिलेश यादव और सपा पर कई टिप्पणियाँ की हैं, जिनमें उन्हें इंडी गठबंधन का 'केवल एक हिस्सा' बताना और 'न पिद्दी न पिद्दी का शोरबा' जैसी भाषा का इस्तेमाल शामिल है। इस पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने 3 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव ने पार्टी में मौर्य के लिए कोई जगह नहीं रखी है।
अवधेश प्रसाद ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर क्या आरोप लगाए?
अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि स्वामी प्रसाद मौर्य इंडी गठबंधन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं और इसीलिए अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए विवादास्पद बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब मौर्य को कोई 'पूछ' नहीं रहा।
क्या स्वामी प्रसाद मौर्य की सपा में वापसी संभव है?
अवधेश प्रसाद के बयान के अनुसार, अखिलेश यादव ने 'नपी-तुली बात' कहते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सपा में मौर्य के लिए अब कोई स्थान नहीं है। पार्टी नेतृत्व की इस स्थिति को देखते हुए फिलहाल वापसी की कोई संभावना नहीं दिखती।
सपा और एसआईआर (मतदाता सूची पुनरीक्षण) विवाद क्या है?
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम काटे जा रहे हैं। अवधेश प्रसाद ने कहा कि अखिलेश यादव सबूतों के साथ यह विवरण सामने रख रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग कोई सार्थक कदम नहीं उठा रहा।
इंडी गठबंधन में अखिलेश यादव की क्या भूमिका है?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद के अनुसार, अखिलेश यादव इंडी गठबंधन के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और उनकी राजनीतिक हैसियत सर्वविदित है। मौर्य के इस बयान को कि वे गठबंधन का 'केवल एक हिस्सा' हैं, सपा ने सिरे से खारिज किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले