भाजपा सांसद अमरपाल मौर्य का अखिलेश यादव को खुला पत्र, सपा में परिवारवाद पर तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य ने 12 अक्टूबर 2026 को लखनऊ से समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक खुला पत्र लिखकर पार्टी में परिवारवाद, राजनीतिक पदों के वितरण और यादव समाज के कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं। मौर्य का आरोप है कि सपा सामाजिक न्याय का दावा करती है, लेकिन दशकों तक राजनीतिक अवसरों का लाभ एक ही परिवार को मिलता रहा है।
खुले पत्र में क्या पूछा गया
अमरपाल मौर्य ने अपने पत्र में अखिलेश यादव से सीधा सवाल किया कि दशकों तक समाजवादी पार्टी के लिए पोस्टर लगाने, झंडे उठाने, बूथ संभालने, लाठियां खाने और जेल यात्राएं करने वाले कार्यकर्ताओं के परिवारों को कितने राजनीतिक अवसर मिले। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने ऐसे कार्यकर्ताओं के बेटे सांसद या विधायक बन पाए, जिन्होंने अपना जीवन समाजवादी आंदोलन को समर्पित किया।
मौर्य ने लिखा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को राजनीति करने का अधिकार है, इसलिए सवाल यह नहीं है कि किसी परिवार के सदस्य राजनीति में क्यों आए। असली सवाल यह है कि लाखों यादव कार्यकर्ताओं में से कोई ऐसा नहीं था जिसे नेतृत्व का अवसर दिया जा सकता था?
परिवार केंद्रित राजनीति पर आरोप
मौर्य ने मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सांसद, विधायक, मंत्री, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य जैसे पदों तक परिवार की पहुंच लगातार बनी रही।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन जिलों में सैफई परिवार का प्रत्यक्ष राजनीतिक आधार नहीं था, वहाँ भी स्थानीय यादव नेतृत्व पर भरोसा करने के बजाय अवसर परिवार के प्रभाव वाले लोगों को ही मिले। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ पहले से ही शुरू हो चुकी हैं।
सामाजिक न्याय बनाम प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व
मौर्य ने अपने पत्र में कहा कि सामाजिक न्याय की राजनीति में प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व और वास्तविक भागीदारी के बीच बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार, समाजवादी आंदोलन को मजबूती देने वाले कार्यकर्ताओं को राजनीतिक निर्णयों और नेतृत्व में उचित स्थान मिलना चाहिए था।
पत्र में उन्होंने तंज कसते हुए लिखा — 'पद आपके परिवार को, दावा समाज का; टिकट आपके परिवार को, ताली बजाने का काम कार्यकर्ता का; सत्ता आपके परिवार को, संघर्ष कार्यकर्ता का।' मौर्य ने स्पष्ट कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर परिवारवाद अब नहीं चलना चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और आगे क्या
गौरतलब है कि भाजपा पहले भी विपक्षी दलों में परिवारवाद को एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में उठाती रही है। मौर्य का यह खुला पत्र उसी राजनीतिक रणनीति की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य यादव समाज और ओबीसी मतदाताओं के बीच सपा की पकड़ को कमजोर करना है।
मौर्य ने पत्र के अंत में अखिलेश यादव से इन सवालों का सार्वजनिक जवाब देने की मांग की और कहा कि यदि जवाब नहीं मिलता, तो लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता ही करती है। समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।