इंडिया गठबंधन के लिए अखिलेश यादव का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए: स्वामी प्रसाद मौर्य का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने 3 नवंबर 2026 को लखनऊ में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात की और इसके बाद इंडिया गठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं पर अपनी राय रखी। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन में रहने या न रहने का निर्णय किसी एक दल का नहीं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व का विशेषाधिकार है।
अखिलेश के बयान पर सीधा पलटवार
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और न ही उनकी सीटों की गिनती में शामिल हैं। इस पर मौर्य ने कड़े शब्दों में जवाब दिया: 'हम गठबंधन में रहेंगे या नहीं रहेंगे, इसके लिए हमें अखिलेश यादव से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।'
उन्होंने आगे कहा कि पूरा इंडिया गठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व में बना है और इस विषय पर निर्णय लेने का अधिकार केवल कांग्रेस नेतृत्व को है। किसी अन्य दल के नेता को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
सपा सांसद के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के उस बयान पर भी मौर्य ने निशाना साधा, जिसमें कहा गया था कि वे इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं हो सकते। मौर्य ने आरोप लगाया कि जो लोग ऐसे बयान दे रहे हैं, वे वास्तव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिताने में मदद करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, 'ये लोग चाहते हैं कि भाजपा सत्ता में बनी रहे, इसलिए जानबूझकर इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।' मौर्य ने यह भी जोड़ा कि जनता ऐसे नेताओं को नकार रही है।
रामलीला मैदान रैली को बताया बदलाव का प्रतीक
राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात के दौरान मौर्य ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली की सफलता पर बधाई दी। उन्होंने इस रैली को 'बदलाव का प्रतीक' बताते हुए कहा कि यह संकेत देती है कि देश एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है।
मौर्य के अनुसार यह रैली लोकतंत्र की रक्षा के लिए आयोजित की गई थी और इसने पूरे देश को यह संदेश दिया कि लोग लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
राहुल गांधी को बताया देश का नेता
स्वामी प्रसाद मौर्य ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 'पूरे देश का नेता और हीरो' बताया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान की रैली राहुल गांधी के आह्वान पर और कांग्रेस के नेतृत्व में हुई थी। मौर्य के दावे के अनुसार उस रैली में 60 प्रतिशत भीड़ कांग्रेस की थी और शेष 40 प्रतिशत गठबंधन के सहयोगी दलों की।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब इंडिया गठबंधन के भीतर सीट बँटवारे और समन्वय को लेकर तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के ताज़ा बयानों से स्पष्ट है कि वे सपा से नहीं, बल्कि सीधे कांग्रेस नेतृत्व से अपनी गठबंधन की स्थिति तय करना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस मामले में क्या रुख अपनाती है।