8 अगस्त 2026
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परिवारवाद पर ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार, लोहिया के विचारों को त्यागने का आरोप

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परिवारवाद पर ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार, लोहिया के विचारों को त्यागने का आरोप

सारांश

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक्स पर अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया — लोहिया के परिवारवाद-विरोधी दर्शन की याद दिलाते हुए सपा पर उन्हीं के विचारों को त्यागने का आरोप लगाया। 2027 चुनावों से पहले BJP-सपा के बीच वैचारिक संग्राम और तेज़ होता दिख रहा है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 8 अगस्त को एक्स पर अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला।
राममनोहर लोहिया परिवारवाद के कट्टर विरोधी थे और सपा ने उनके विचारों को त्याग दिया है।
अखिलेश की 'मिश्राजी, कुछ तो शर्म करो' वाली जातिगत टिप्पणी को पाठक ने फिर उठाया।
BJP ने अपनी राजनीति को 'राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि, अंत्योदय' पर आधारित बताया, सपा को परिवारवादी करार दिया।
अखिलेश यादव की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार, 8 अगस्त को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आज डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने ही लोहिया के मूल विचारों — विशेषकर परिवारवाद-विरोध — को सबसे पहले ताक पर रख दिया है।

एक्स पर किया सीधा वार

पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'राजनीति में विचारों का उत्तर विचारों से दिया जाता है, व्यक्तिगत कटुता और असत्य आरोपों से नहीं।' उन्होंने लोहिया के उस कथन का स्मरण कराया जिसमें कहा गया था: 'जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा।' पाठक ने कहा कि लोहिया का स्पष्ट मत था कि जब परिवार ही सर्वाधिक शक्तिशाली हो जाता है, तब समाज कमज़ोर पड़ जाता है।

लोहिया होते तो परिवारवादियों से पूछते कठोर सवाल

पाठक ने कहा कि यदि डॉ. लोहिया आज जीवित होते, तो परिवार को सत्ता दिलाने की राजनीति करने वालों को सबसे पहले 'कठोर प्रश्नों के कटघरे में खड़ा करते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार को सत्ता का केंद्र बनाने की राजनीति को लोहिया कभी स्वीकार नहीं करते। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा सपा के बीच वैचारिक संघर्ष और तीखा होता जा रहा है।

ब्राह्मण समाज और जातिगत टिप्पणी पर निशाना

पाठक ने अखिलेश यादव पर ब्राह्मण समाज के प्रति 'स्वांग' रचने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि अखिलेश ने एक बार पत्रकारों से जाति पूछकर 'मिश्राजी, कुछ तो शर्म करो' जैसी टिप्पणी की थी, जो आलोचकों के अनुसार ब्राह्मण समाज के लिए अपमानजनक थी। पाठक ने कहा कि ऐसे वाक्य 'समाज की छाती में बरछी की तरह आज भी चुभे हुए हैं।'

BJP का सिद्धांत बनाम परिवारवाद

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति 'राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय' के सिद्धांत पर टिकी है, जबकि परिवारवादी राजनीति का एकमात्र उद्देश्य सत्ता को एक परिवार तक सीमित रखना है। उन्होंने कहा कि जनता इस अंतर को 'भली-भाँति समझती है।' साथ ही उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन पर लगाए गए किसी भी आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनका मूल्यांकन जनता करती है और वे सदैव संगठन, संविधान तथा जनसेवा को सर्वोपरि रखते आए हैं।

आगे क्या

पाठक का यह हमला सपा और BJP के बीच बढ़ते वाक्-युद्ध की नवीनतम कड़ी है। गौरतलब है कि लखनऊ में दोनों दलों के बीच वैचारिक और जातीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। अखिलेश यादव की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि BJP की सुनियोजित वैचारिक रणनीति का हिस्सा है — जो सपा को लोहिया की विरासत से काटने की कोशिश करती है। विडंबना यह है कि परिवारवाद का यह आरोप तब लगाया जा रहा है जब BJP स्वयं भी कई राज्यों में पारिवारिक नेताओं को टिकट देती रही है। असली सवाल यह है कि क्या लोहिया के विचारों की यह याद चुनावी मौसम में महज़ एक हथियार है, या वाकई वैचारिक बहस की शुरुआत — क्योंकि 2027 से पहले उत्तर प्रदेश में हर बयान एक चुनावी चाल भी है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
पाठक ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और सपा ने डॉ. राममनोहर लोहिया के परिवारवाद-विरोधी विचारों को त्याग दिया है और राजनीति को एक ही परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश ब्राह्मण समाज के प्रति 'स्वांग' रच रहे हैं।
लोहिया का परिवारवाद पर क्या मत था जिसका पाठक ने हवाला दिया?
पाठक ने लोहिया के उस विचार का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि 'जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा' और जब परिवार सर्वाधिक शक्तिशाली हो जाता है तब समाज कमज़ोर पड़ता है। पाठक के अनुसार, लोहिया आज होते तो परिवारवादी राजनीति करने वालों से कठोर सवाल पूछते।
अखिलेश यादव की किस टिप्पणी पर पाठक ने निशाना साधा?
पाठक ने अखिलेश की उस टिप्पणी का संदर्भ दिया जिसमें उन्होंने एक पत्रकार की जाति पूछकर 'मिश्राजी, कुछ तो शर्म करो' कहा था। पाठक ने इसे ब्राह्मण समाज के प्रति अपमानजनक बताया और कहा कि यह वाक्य 'समाज की छाती में बरछी की तरह आज भी चुभा हुआ है।'
BJP और सपा के बीच यह विवाद क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दलों के बीच वैचारिक और जातीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। लोहिया की विरासत और परिवारवाद का यह विमर्श पिछड़े वर्ग और ब्राह्मण मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
अखिलेश यादव ने पाठक के आरोपों पर क्या कहा?
8 अगस्त तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव की ओर से पाठक के इस हमले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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