परिवारवाद पर ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार, लोहिया के विचारों को त्यागने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार, 8 अगस्त को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आज डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने ही लोहिया के मूल विचारों — विशेषकर परिवारवाद-विरोध — को सबसे पहले ताक पर रख दिया है।
एक्स पर किया सीधा वार
पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा, 'राजनीति में विचारों का उत्तर विचारों से दिया जाता है, व्यक्तिगत कटुता और असत्य आरोपों से नहीं।' उन्होंने लोहिया के उस कथन का स्मरण कराया जिसमें कहा गया था: 'जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा।' पाठक ने कहा कि लोहिया का स्पष्ट मत था कि जब परिवार ही सर्वाधिक शक्तिशाली हो जाता है, तब समाज कमज़ोर पड़ जाता है।
लोहिया होते तो परिवारवादियों से पूछते कठोर सवाल
पाठक ने कहा कि यदि डॉ. लोहिया आज जीवित होते, तो परिवार को सत्ता दिलाने की राजनीति करने वालों को सबसे पहले 'कठोर प्रश्नों के कटघरे में खड़ा करते।' उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार को सत्ता का केंद्र बनाने की राजनीति को लोहिया कभी स्वीकार नहीं करते। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा सपा के बीच वैचारिक संघर्ष और तीखा होता जा रहा है।
ब्राह्मण समाज और जातिगत टिप्पणी पर निशाना
पाठक ने अखिलेश यादव पर ब्राह्मण समाज के प्रति 'स्वांग' रचने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि अखिलेश ने एक बार पत्रकारों से जाति पूछकर 'मिश्राजी, कुछ तो शर्म करो' जैसी टिप्पणी की थी, जो आलोचकों के अनुसार ब्राह्मण समाज के लिए अपमानजनक थी। पाठक ने कहा कि ऐसे वाक्य 'समाज की छाती में बरछी की तरह आज भी चुभे हुए हैं।'
BJP का सिद्धांत बनाम परिवारवाद
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति 'राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय' के सिद्धांत पर टिकी है, जबकि परिवारवादी राजनीति का एकमात्र उद्देश्य सत्ता को एक परिवार तक सीमित रखना है। उन्होंने कहा कि जनता इस अंतर को 'भली-भाँति समझती है।' साथ ही उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन पर लगाए गए किसी भी आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनका मूल्यांकन जनता करती है और वे सदैव संगठन, संविधान तथा जनसेवा को सर्वोपरि रखते आए हैं।
आगे क्या
पाठक का यह हमला सपा और BJP के बीच बढ़ते वाक्-युद्ध की नवीनतम कड़ी है। गौरतलब है कि लखनऊ में दोनों दलों के बीच वैचारिक और जातीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। अखिलेश यादव की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।