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ब्रजेश पाठक का सपा पर प्रहार: 'ब्राह्मण वोट के लिए, सत्ता परिवार के लिए'

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ब्रजेश पाठक का सपा पर प्रहार: 'ब्राह्मण वोट के लिए, सत्ता परिवार के लिए'

सारांश

यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा के ब्राह्मण सम्मेलन को 'चुनावी नाटक' करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी वोट ब्राह्मणों से लेती है और सत्ता परिवार को देती है। 2027 चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर BJP और सपा की सियासी जंग तेज हो गई है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 7 अगस्त को सपा के ब्राह्मण सम्मेलन और जनेश्वर मिश्र जयंती कार्यक्रम पर तीखा हमला बोला।
पाठक ने आरोप लगाया कि सपा ब्राह्मण समाज को केवल चुनावी वोट बैंक मानती है और सत्ता का लाभ एक परिवार तक सीमित रखती है।
उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सपा पर 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप लगाया।
पाठक ने कहा कि सपा डॉ.
राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के समाजवादी आदर्शों से पूरी तरह भटक चुकी है।
यह विवाद 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर जारी सियासी प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 7 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के ब्राह्मण सम्मेलन और जनेश्वर मिश्र जयंती कार्यक्रम को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ब्राह्मण समाज को केवल चुनावी वोट बैंक मानती है और सत्ता का लाभ सिर्फ एक परिवार तक सीमित रखती है।

मुख्य आरोप: वोट ब्राह्मणों के, राज परिवार का

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को ब्राह्मण समाज की याद केवल चुनाव के मौसम में आती है। उन्होंने कहा, 'ब्राह्मण वोट देकर सत्ता दिलाएं और उस सत्ता पर सपा अपने परिवार की खड़ाऊं रखकर शासन करे — यही उसकी राजनीति बन गई है।' उनके अनुसार, चुनाव समाप्त होते ही वही समाज उपेक्षा का शिकार हो जाता है।

एक्स पर पोस्ट: 'बांटो और राज करो' की नीति का आरोप

पाठक ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सपा आज भी अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति पर चल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी को ब्राह्मण वोट के लिए 'छोटे लोहिया' जनेश्वर मिश्र की याद आती है, लेकिन शासन के लिए केवल अपना परिवार दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे जितनी गालियां देनी हों दीजिए, लेकिन ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस मत पहुंचाइए।'

जनेश्वर मिश्र जयंती पर विरासत के अपमान का आरोप

पाठक ने कहा कि जनेश्वर मिश्र की जयंती उनके समाजवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर होनी चाहिए थी। लेकिन उनके अनुसार, कार्यक्रम में विचार-विमर्श की जगह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमलों ने ले ली, जिससे न केवल मिश्र की विरासत का अपमान हुआ, बल्कि पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा भी आहत हुई।

लोहिया-मिश्र के आदर्शों से भटकाव का दावा

उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मौजूदा सपा, डॉ. राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के समाजवादी आदर्शों से पूरी तरह भटक चुकी है। उनके अनुसार, लोहिया और मिश्र दोनों ने संसदीय संवाद और लोकतांत्रिक परंपराओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जबकि आज की सपा संसद और विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय हंगामे और अवरोध की राजनीति कर रही है।

आगे क्या

पाठक की यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर जारी सियासी खींचतान की पृष्ठभूमि में आई है। यह ऐसे समय में आया है जब सपा ब्राह्मण सम्मेलनों के ज़रिए अपना जनाधार विस्तार करने की कोशिश कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सपा के बीच ब्राह्मण वोटों को लेकर तीखी प्रतिस्पर्धा आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पाठक की प्रतिक्रिया बताती है कि BJP इसे गंभीरता से ले रही है। असली सवाल यह है कि क्या जनेश्वर मिश्र जैसे समाजवादी प्रतीकों की विरासत पर दावेदारी केवल चुनावी बयानबाज़ी है, या दोनों दलों में से कोई उनके विचारों को नीतिगत धरातल पर उतारने को तैयार है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रजेश पाठक ने सपा पर क्या आरोप लगाए?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि सपा ब्राह्मण समाज को केवल चुनावी वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है और सत्ता का लाभ सिर्फ एक परिवार तक सीमित रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी 'बांटो और राज करो' की नीति पर चल रही है।
जनेश्वर मिश्र जयंती कार्यक्रम पर विवाद क्यों हुआ?
पाठक के अनुसार, जनेश्वर मिश्र की जयंती पर उनके समाजवादी विचारों की चर्चा की बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमले किए गए। उन्होंने कहा कि इससे मिश्र की विरासत का अपमान हुआ और पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा आहत हुई।
ब्रजेश पाठक ने एक्स पर क्या लिखा?
पाठक ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा कि सपा को ब्राह्मण वोट के लिए जनेश्वर मिश्र की याद आती है, लेकिन शासन के लिए केवल अपना परिवार दिखाई देता है। उन्होंने सपा पर अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप भी लगाया।
क्या सपा वाकई लोहिया और जनेश्वर मिश्र के आदर्शों से भटकी है?
पाठक का दावा है कि मौजूदा सपा, डॉ. राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के समाजवादी आदर्शों से पूरी तरह भटक चुकी है। उनके अनुसार, दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक संवाद को प्राथमिकता दी, जबकि आज की सपा संसद और विधानसभा में हंगामे और अवरोध की राजनीति कर रही है।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगा?
यह टकराव 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर BJP और सपा के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। दोनों दल ब्राह्मण समाज को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं, और आने वाले महीनों में यह सियासी जंग और तेज होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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