ब्राह्मण सम्मेलन पर मनोज पांडेय का अखिलेश यादव से तीखा सवाल: 'सम्मान या सिर्फ वोट की राजनीति?'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने 19 जून 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर ब्राह्मण समाज के प्रति दोहरी राजनीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। पांडेय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए सवाल किया कि सपा की नीति ब्राह्मण समाज का सम्मान है या उसे महज वोट बैंक मानने की।
मंत्री के आरोप: क्या है पूरा मामला
मंत्री मनोज पांडेय ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि एक ओर सपा नेताओं द्वारा ब्राह्मण समाज के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर चुनावी मौसम में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर सम्मान का संदेश देने की कोशिश होती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अखिलेश यादव ने एक पत्रकार से उसका सरनेम पूछा और 'मिश्रा' बताने पर उसे सार्वजनिक रूप से 'बाहर जाओ' कहकर अपमानित किया।
वरिष्ठ प्रवक्ता के बयान पर उठे सवाल
पांडेय ने आरोप लगाया कि सपा के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने ब्राह्मण समाज के लिए अत्यंत आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन न तो अखिलेश यादव की ओर से कोई खंडन आया और न ही पार्टी ने कोई आपत्ति जताई या माफी माँगी। उन्होंने कहा, 'ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या आपकी पार्टी उस बयान से सहमत है?'
ब्राह्मण सम्मेलन पर निशाना
मंत्री ने यह भी उठाया कि सपा ने ब्राह्मण सम्मेलन तो बुलाया, परंतु अखिलेश यादव स्वयं उसमें उपस्थित नहीं हुए। पांडेय ने इसे सम्मान का दिखावा बताते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज केवल चुनाव के समय याद नहीं आना चाहिए। उन्होंने सपा पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के बीच ब्राह्मणों को लेकर नकारात्मक संदेश फैलाने का भी आरोप लगाया।
सामाजिक एकता का दावा
पांडेय ने अपनी पोस्ट में कहा कि आज पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और ब्राह्मण — सभी वर्ग सपा से जवाब माँग रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 'सनातन समाज सम्मान, स्वाभिमान और सामाजिक समरसता के साथ एकजुट हो रहा है' और जनता अब दिखावे तथा वास्तविकता का फर्क समझ चुकी है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर जातीय समीकरणों पर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी हुई है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता एक निर्णायक वर्ग माने जाते हैं और विभिन्न दल समय-समय पर इस समुदाय को साधने की कोशिश करते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सपा दोनों के बीच ब्राह्मण समर्थन को लेकर प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चली आ रही है। मनोज पांडेय का यह बयान इसी राजनीतिक संघर्ष की नई कड़ी है, जिसमें सत्तारूढ़ दल विपक्ष पर सामाजिक विभाजन का आरोप लगा रहा है।