23 सितंबर 2026
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अखिलेश के बयान पर भाजपा का पलटवार: 'जनादेश न मिले तो लोकतंत्र का अपमान करने का हक नहीं'

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अखिलेश के बयान पर भाजपा का पलटवार: 'जनादेश न मिले तो लोकतंत्र का अपमान करने का हक नहीं'

सारांश

2027 के UP चुनाव अभी डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन बयानों की जंग अभी से छिड़ गई है। अखिलेश के चुनाव को 'आखिरी' बताने और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बाद BJP ने तीन मंत्रियों के ज़रिए पलटवार किया — लोकतंत्र, जनादेश और सपा के पाँच साल के 'काले अध्याय' को केंद्र में रखकर।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव के 2027 चुनाव बयान और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बाद BJP ने 23 सितंबर 2026 को तीखा पलटवार किया।
कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने कहा — जनादेश हासिल न कर पाने वालों को लोकतंत्र का अपमान करने का अधिकार नहीं।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने आरोप लगाया कि सपा चुनाव दर चुनाव हार के बाद चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है।
मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने सपा से 2012-2017 के दंगों, महिला अपराध और नौकरियों के आँकड़े सार्वजनिक करने की माँग की।
BJP ने पिछड़े, दलित और पसमांदा समाज को मेडिकल कॉलेज व स्कॉलरशिप का लाभ मिलने का दावा किया।

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर दिए गए बयान और सरकार व संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए गए सवालों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा पलटवार किया है। 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में BJP नेताओं ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल जनादेश हासिल नहीं कर पा रहा, उसे लोकतंत्र पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।

मनोज पांडेय का सीधा वार

योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव के 2027 के चुनाव को 'आखिरी चुनाव' बताए जाने पर कहा कि लोकतंत्र में कोई चुनाव न 'आखिरी' होता है, न 'नया'। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना चाहिए और जो लोग जनादेश हासिल नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें जनादेश का अपमान करने का अधिकार नहीं है।'

पांडेय ने सपा शासनकाल (2012-2017) का हवाला देते हुए नौकरियों में अनियमितता, छात्रों पर कार्रवाई, दंगों और बिगड़ी कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता यह सब देख चुकी है और अब एक ऐसा प्रदेश चाहती है जहाँ शांति और सुरक्षा के साथ खेती, कारोबार और जीवनयापन संभव हो।

कपिल देव अग्रवाल का चुनाव आयोग पर बयान

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अखिलेश द्वारा चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर कहा कि सपा का संवैधानिक संस्थाओं पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव दर चुनाव हार के बाद सपा निर्वाचन आयोग, पुलिस व्यवस्था और संविधान को कठघरे में खड़ा करती है।

पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मुद्दे पर अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों का चयन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और क्षमता के आधार पर होता है। उन्होंने राम मंदिर और कारसेवकों का उल्लेख करते हुए भी सपा पर निशाना साधा।

दानिश आज़ाद अंसारी का सपा पर हमला

मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने सपा नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें 'एसी कमरों में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, भ्रम फैलाने और गलत आँकड़े जनता के सामने रखने की आदत हो गई है।' उन्होंने सपा से 2012 से 2017 के बीच हुए दंगों, महिलाओं के खिलाफ अपराध और सरकारी नौकरियों से जुड़े आँकड़े सार्वजनिक करने की माँग की।

अंसारी ने दावा किया कि पिछड़े, दलित और पसमांदा समाज को मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कॉलरशिप का वास्तविक लाभ मिल रहा है। एसआईआर (विशेष जाँच रिपोर्ट) पर सपा के सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि 'केवल सवाल खड़े करना और भ्रम फैलाना सपा का मूल चरित्र बन गया है।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव अभी डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाज़ी का दौर तेज़ हो गया है। अखिलेश यादव ने हाल के दिनों में BJP सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमले बोले हैं, जिसके जवाब में BJP मंत्रियों ने सपा के पाँच साल के शासनकाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

यह ऐसे समय में आया है जब सपा अपने पीडीए गठबंधन को और मज़बूत करने की कोशिश में है, और BJP योगी सरकार की उपलब्धियों को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने में जुटी है। आने वाले महीनों में दोनों दलों की यह नोकझोंक और तेज़ होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 की पूर्व-चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है — सपा के पीडीए आख्यान को काटना और 2012-17 के शासनकाल की यादें ताज़ा रखना। विडंबना यह है कि BJP खुद संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस से बचती दिखती है, जबकि विपक्ष के इसी सवाल को 'अविश्वास' करार देती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह बयानबाज़ी ज़मीनी मुद्दों — बेरोज़गारी, किसान संकट, महँगाई — से ध्यान हटाने में कामयाब होगी, या जनता इस बार मुद्दों पर वोट करेगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने 2027 चुनाव को लेकर क्या कहा था?
अखिलेश यादव ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को 'आखिरी चुनाव' बताया था और सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर भी सवाल उठाए थे। इन्हीं बयानों के जवाब में BJP ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
BJP ने अखिलेश के बयान पर क्या जवाब दिया?
कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र में कोई चुनाव 'आखिरी' नहीं होता और जो दल जनादेश हासिल नहीं कर पाता, उसे लोकतंत्र का अपमान करने का अधिकार नहीं है। साथ ही मंत्री कपिल देव अग्रवाल और दानिश आज़ाद अंसारी ने भी सपा पर निशाना साधा।
BJP ने चुनाव आयोग पर सपा के सवालों को लेकर क्या कहा?
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सपा का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है और यह दल हर चुनावी हार के बाद निर्वाचन आयोग, पुलिस व्यवस्था और संविधान पर सवाल उठाता है।
BJP ने सपा के पीडीए एजेंडे पर क्या कहा?
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि अधिकारियों का चयन जाति नहीं, योग्यता के आधार पर होता है। मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने दावा किया कि पिछड़े, दलित और पसमांदा समाज को मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कॉलरशिप का वास्तविक लाभ मिल रहा है।
2027 के UP चुनाव से पहले BJP-SP की यह नोकझोंक क्यों अहम है?
2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव अभी करीब डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन दोनों दलों की बयानबाज़ी से साफ है कि चुनावी तैयारी अभी से शुरू हो गई है। BJP जहाँ सपा के पुराने शासनकाल के मुद्दे उठा रही है, वहीं सपा पीडीए गठबंधन के ज़रिए नया सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश में है।
राष्ट्र प्रेस
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