UP चुनाव 2027: मंत्री दानिश अंसारी का दावा — सपा दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाएगी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने 7 नवंबर 2026 को लखनऊ में दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।
सपा पर सीधा हमला
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एसआईआर (SIR) मुद्दे पर दिए गए बयान की प्रतिक्रिया में कहा कि सपा को 2027 में जो हार दिखाई दे रही है, उसी की खुन्नस में वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'चुनाव जनता का विश्वास जीतकर जीता जाता है। जनता का विश्वास उसके बीच काम करके हासिल किया जाता है।'
अंसारी ने आरोप लगाया कि जब समाजवादी पार्टी के शासनकाल में जनता के लिए कोई काम नहीं हुआ, तो जनता उन पर भरोसा क्यों करेगी। उन्होंने कहा कि जनता ने सपा को नकार दिया है और पार्टी को यह स्वीकार कर लेना चाहिए।
लोकतांत्रिक ढाँचे पर चिंता
मंत्री ने यह भी कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढाँचे को कमज़ोर करने के लिए कुछ 'विरोधी ताकतें' सक्रिय हैं। उनके अनुसार, सभी नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और देश के मूल मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था बनाए रखने की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संवैधानिक ढाँचे को और मज़बूती मिलेगी।
योगी सरकार की उपलब्धियों का दावा
अंसारी ने अयोध्या के दीपोत्सव कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने हर सकारात्मक क्षेत्र में पुराने रिकॉर्ड तोड़े हैं। उन्होंने शिक्षा, सुशासन, रोज़गार और गरीबों के उत्थान में प्रदेश की प्रगति का हवाला दिया।
मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के 'ग्रोथ इंजन' के रूप में आगे बढ़ रहा है और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित तथा आगे बढ़ाने का काम जारी है। गौरतलब है कि अयोध्या दीपोत्सव हर साल एक बड़े आयोजन के रूप में सामने आता है और सरकार इसे अपनी सांस्कृतिक नीति का प्रतीक मानती है।
राजनीतिक संदर्भ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी लगभग डेढ़ वर्ष दूर हैं, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी समाजवादी पार्टी दोनों ने ही जमीनी तैयारी और बयानबाजी के ज़रिए चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा होते हैं। आने वाले महीनों में दोनों दलों की ओर से और तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।