7 नवंबर 2026
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद ISI की नई मल्टी-कैंप रणनीति: जैश, लश्कर और हिजबुल के लिए बिखरे ठिकाने

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद ISI की नई मल्टी-कैंप रणनीति: जैश, लश्कर और हिजबुल के लिए बिखरे ठिकाने

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को सबक दिया — और ISI ने सबक सुन लिया। बहावलपुर और मुरीदके जैसे प्रतिष्ठित ठिकानों को ध्वस्त होते देख ISI अब विकेंद्रीकृत, बिखरे हुए शिविरों की ओर बढ़ रही है, जहाँ हाफिज सईद और मसूद अजहर का नाम प्रतीकात्मक है — असली डोर ISI के हाथों में है।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सिंदूर में बहावलपुर (JeM) और मुरीदके (LeT) के केंद्रों पर भारतीय हमलों के बाद ISI ने केंद्रीकृत ठिकाने छोड़कर मल्टी-कैंप रणनीति अपनाई।
इस्लामाबाद , रावलपिंडी , मुजफ्फराबाद और रावलकोट में नए शिविर बनाए गए; प्रत्येक स्थान पर 4 से 5 अलग सुविधाएँ।
बहावलपुर और मुरीदके के पुनर्निर्मित केंद्र अब प्रतीकात्मक हैं — वास्तविक अभियान यहाँ से संचालित नहीं होंगे।
हाफिज सईद , मसूद अजहर और सैयद सलाहुद्दीन केवल वैचारिक नेतृत्व तक सीमित; असली नियंत्रण ISI के ब्रिगेडियर इकबाल और कर्नल ओवैज के पास।
कमांड सेंटर खैबर पख्तूनख्वा (KP) में; PoK के कोटली में हिजबुल के मार्कज राहील शहीद का भी पुनर्निर्माण।
आतंकियों को लगातार अलग-अलग शिविरों में भेजा जाएगा ताकि भारतीय एजेंसियों की निगरानी कठिन हो।

खुफिया आकलन के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचने के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के लिए एक केंद्रीकृत बड़े ठिकाने की जगह पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में कई छोटे प्रशिक्षण और संचालन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। यह रणनीतिक बदलाव सीधे तौर पर उस सबक का नतीजा है जो भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा बड़े, स्थायी ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के बाद पाकिस्तान को मिला।

क्यों बदली ISI की रणनीति

खुफिया आकलन के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और मुरीदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र पर भारतीय हमलों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि एक ही स्थान पर बड़े आतंकी ठिकाने बनाए रखना जोखिम भरा है। भारतीय सशस्त्र बलों ने इन केंद्रीकृत ठिकानों को आसानी से निशाना बनाया था, जिससे ISI को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने पर मजबूर होना पड़ा।

इसके बाद ISI ने तीनों आतंकी संगठनों के प्रमुखों के साथ मिलकर नई वितरित रणनीति तैयार की, जिसका मूल उद्देश्य यह है कि किसी एक ठिकाने पर हमले की स्थिति में कुल नुकसान सीमित रहे और अन्य शिविरों से गतिविधियाँ अबाधित रूप से जारी रखी जा सकें।

प्रतीकात्मक पुनर्निर्माण और वास्तविकता

एक अधिकारी के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर स्थित अपने मुख्यालय का तेज़ी से पुनर्निर्माण तो किया है, लेकिन वहाँ गतिविधियाँ बेहद सीमित हैं। यह मुख्यालय अब केवल प्रतीकात्मक ढाँचे के रूप में खड़ा है। अधिकारी ने बताया कि यदि इसका पुनर्निर्माण नहीं किया जाता तो पहले से हताश आतंकियों के मनोबल पर और नकारात्मक असर पड़ सकता था।

मुरीदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रशिक्षण केंद्र के साथ भी यही स्थिति है। खुफिया इंटरसेप्ट के अनुसार, वहाँ गतिविधियाँ काफी कम हैं और इस केंद्र का पुनर्निर्माण मुख्य रूप से इस संदेश के लिए किया गया कि संगठन का पुराना नेटवर्क अभी भी जीवित है। गौरतलब है कि मुरीदके केंद्र का 26/11 मुंबई हमले, 2005 के दिल्ली बम धमाकों, 2000 के लाल किले पर हमले और 2001 के संसद हमले से सीधा संबंध रहा है — इन सभी हमलों में शामिल आतंकियों को यहीं प्रशिक्षित किया गया था।

ISI ने हिजबुल मुजाहिदीन के प्रशिक्षण और ट्रांजिट केंद्र मार्कज राहील शहीद का भी पुनर्निर्माण कराया है, जो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) के कोटली में स्थित है। इसके अतिरिक्त, सियालकोट स्थित महमूना जया शिविर को भी हिजबुल मुजाहिदीन और ISI ने पुनः तैयार किया है।

नई विकेंद्रीकृत संरचना

एक खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी के अनुसार, पुनर्निर्माण से जुड़े सभी इंटरसेप्ट संकेत देते हैं कि इन केंद्रों को मुख्यतः प्रतीकात्मक रूप में बनाए रखा जाएगा। बड़े हमलों की योजना और संचालन इन केंद्रों से नहीं किया जाएगा। ISI ने इन शिविरों में प्रशिक्षण के दौरान बेहद कम गतिविधियाँ रखने और लो प्रोफाइल बनाए रखने का निर्देश दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, इन संगठनों का कमांड सेंटर खैबर पख्तूनख्वा (KP) में स्थित है, जबकि प्रशिक्षण केंद्र पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं। इस्लामाबाद, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलकोट में नए प्रशिक्षण शिविर और संचालन केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक स्थान पर एक बड़े केंद्र की जगह चार से पाँच अलग-अलग सुविधाएँ विकसित की गई हैं।

संगठनों में आपसी समन्वय और नियंत्रण

नई रणनीति के तहत जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन अब संयुक्त रूप से काम करेंगे। इनके बीच पहले की तरह अलग-अलग जिम्मेदारियों का विभाजन नहीं होगा और हमलों की योजना साझा रूप से तैयार की जाएगी। हाफिज सईद, मसूद अजहर और सैयद सलाहुद्दीन जैसे नाम केवल प्रतीकात्मक और वैचारिक नेतृत्व तक सीमित रहेंगे, जबकि वास्तविक नियंत्रण सीधे ISI के हाथों में होगा।

अधिकारियों के मुताबिक, इन संगठनों के सभी अभियानों और रोज़मर्रा के कामकाज की निगरानी सीधे ISI के ब्रिगेडियर इकबाल और कर्नल ओवैज कर रहे हैं।

आतंकियों की लगातार आवाजाही की नई नीति

अधिकारी के मुताबिक, आतंकियों को अब किसी एक ठिकाने पर लंबे समय तक नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें लगातार अलग-अलग केंद्रों पर भेजा जाएगा। इससे न केवल उन्हें विभिन्न स्थानों का अनुभव मिलेगा, बल्कि उनकी निरंतर आवाजाही के कारण भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए उनकी गतिविधियों पर नज़र रखना भी कठिन हो जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की खुफिया और सैन्य निगरानी क्षमताएँ ऑपरेशन सिंदूर के बाद और अधिक सतर्क हो गई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दरअसल एक ज़्यादा परिष्कृत और टिकाऊ खतरे की ओर बदलाव है। विकेंद्रीकृत ढाँचे को नष्ट करना कहीं अधिक कठिन है — यही वह सबक है जो अमेरिका ने अफगानिस्तान में एक दशक से अधिक लड़कर सीखा था। भारत के लिए असली चुनौती यह है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे सटीक हमले तब सबसे प्रभावी होते हैं जब लक्ष्य केंद्रीकृत हों — बिखरे हुए, लो-प्रोफाइल शिविरों पर वही दबाव बनाना खुफिया और निगरानी की गुणवत्ता पर कहीं अधिक निर्भर करेगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे नामों को प्रतीकात्मक बनाकर ISI अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी बचने की कोशिश कर रही है — FATF और अन्य निकायों को यह दिखाने के लिए कि 'संगठन कमज़ोर हो गए हैं', जबकि ज़मीनी हकीकत इसके उलट है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ISI ने अपनी रणनीति में क्या बदलाव किया है?
ऑपरेशन सिंदूर में बड़े, केंद्रीकृत ठिकानों पर भारतीय हमलों के बाद ISI ने पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में कई छोटे प्रशिक्षण और संचालन केंद्र बनाने की रणनीति अपनाई है। इस्लामाबाद, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलकोट में प्रत्येक जगह 4 से 5 अलग सुविधाएँ विकसित की गई हैं ताकि किसी एक पर हमले में नुकसान सीमित रहे।
बहावलपुर और मुरीदके के ठिकानों का अब क्या होगा?
खुफिया इंटरसेप्ट के अनुसार, बहावलपुर (JeM का मुख्यालय) और मुरीदके (LeT का प्रशिक्षण केंद्र) का तेज़ी से पुनर्निर्माण तो किया गया है, लेकिन अब ये केवल प्रतीकात्मक ढाँचे के रूप में बने रहेंगे। बड़े हमलों की योजना और संचालन इन केंद्रों से नहीं होगा — इनका मकसद आतंकियों का मनोबल बनाए रखना है।
हिजबुल मुजाहिदीन के किन केंद्रों का पुनर्निर्माण हुआ है?
ISI ने हिजबुल मुजाहिदीन के प्रशिक्षण और ट्रांजिट केंद्र 'मार्कज राहील शहीद' का पुनर्निर्माण कराया है, जो PoK के कोटली में स्थित है। इसके अतिरिक्त सियालकोट स्थित महमूना जया शिविर को भी हिजबुल और ISI ने दोबारा तैयार किया है।
ISI के इस नए ढाँचे में हाफिज सईद और मसूद अजहर की क्या भूमिका है?
नई रणनीति के तहत हाफिज सईद, मसूद अजहर और सैयद सलाहुद्दीन जैसे नाम केवल प्रतीकात्मक और वैचारिक नेतृत्व तक सीमित रहेंगे। वास्तविक नियंत्रण ISI के ब्रिगेडियर इकबाल और कर्नल ओवैज के हाथों में होगा, जो सभी अभियानों और रोज़मर्रा के कामकाज की सीधे निगरानी करते हैं।
नई मल्टी-कैंप रणनीति भारत की सुरक्षा के लिए कितनी बड़ी चुनौती है?
अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों को लगातार अलग-अलग शिविरों में भेजा जाएगा, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए उनकी गतिविधियों पर नज़र रखना कठिन हो जाएगा। बिखरे हुए, लो-प्रोफाइल ठिकानों को निशाना बनाना केंद्रीकृत ठिकानों की तुलना में कहीं अधिक जटिल चुनौती है।
राष्ट्र प्रेस
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