4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या पाकिस्तान में आईएसआई की निगरानी में जिहादी और सांप्रदायिक आतंकी समूह एकजुट हो रहे हैं?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या पाकिस्तान में आईएसआई की निगरानी में जिहादी और सांप्रदायिक आतंकी समूह एकजुट हो रहे हैं?

सारांश

क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई जिहादी और सांप्रदायिक आतंकियों को एकजुट कर रही है? जानें लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट के बढ़ते संबंधों के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट का बढ़ता तालमेल आईएसआई की जिहादी गुटों को एकजुट करने की साजिश पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के बीच संबंध भारतीय सुरक्षा बलों की तत्परता दुनिया के सामने चुनौती

नई दिल्ली, २२ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के बीच बढ़ता सहयोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की एक रणनीतिक साजिश को दिखाता है। हाल ही में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के समन्वयक मीर शफीक मंगल द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के नेता राना मोहम्मद अशफाक को हथियार भेंट करना इस सहयोग का प्रतीक है, जो आईएसआई की निगरानी में जिहादी और सांप्रदायिक गुटों को एक मंच पर लाने का काम कर रहा है।

इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की डीप स्टेट ने आतंकवाद को केवल सहन नहीं किया है, बल्कि उसे राज्य नीति का एक सुनियोजित औजार बना लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएसआई इस पूरे तंत्र का केंद्र है, जो न केवल आतंकी संगठनों को संरक्षण देती है, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत और हमास जैसे संगठनों को जोड़कर एक अपवित्र गठबंधन तैयार कर रही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जिसमें मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को गंभीर नुकसान पहुंचा और इन संगठनों के आपसी संबंध उजागर हुए, आईएसआई ने अपने प्रयासों को तेज किया है। आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को अलग-अलग काम करने के बजाय एक पैक के रूप में मिलकर काम करने का निर्देश दिया है। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी खुले तौर पर आतंकियों के जनाजों में शामिल होते देखे जा रहे हैं, वहीं राजनेता लश्कर-ए-तैयबा के उपनेता सैफुल्लाह कसूरी के साथ मंच साझा कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ नेता रऊफ ने परेड के दौरान राज्य के संरक्षण में जिहाद के लिए भर्ती को आसान बताया, जहां हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद की भी मौजूदगी रही।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईएसआई से जुड़े इस नेटवर्क में लश्कर-ए-तैयबा की शहरी लॉजिस्टिक्स और ऑपरेटिव क्षमताओं को जैश-ए-मोहम्मद की आत्मघाती हमलों की क्षमता के साथ जोड़ा गया है, जिसे हमास से मिलने वाले सामरिक सहयोग से और मजबूती मिली है। इस गठजोड़ का उद्देश्य भारत के खिलाफ लंबे समय तक हिंसा की रणनीति को आगे बढ़ाना है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस भारतीय सुरक्षा बल इस नई चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ड्रोन जैमर, एंटी-ड्रोन स्वार्म और लेजर काउंटरमेजर्स आईईडी गिराने जैसी साजिशों को नाकाम करने के लिए तैनात हैं। इसके साथ ही, सटीक तोपखाने, मानव प्रदर्शन बढ़ाने वाले एक्सो-सूट और पैरा स्पेशल फोर्सेज की त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयां हाइब्रिड फिदायीन हमलों और शहरी घेराबंदी जैसी स्थितियों से निपटने को तैयार हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सेंसर ग्रिड और रणनीतिक हेलीकॉप्टर पैड त्वरित कार्रवाई को संभव बनाते हैं, जबकि साइबर यूनिट्स हवाला नेटवर्क और दुष्प्रचार अभियानों को बाधित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। भारतीय सशस्त्र बल जम्मू-कश्मीर में किसी भी प्रकार के हवाई समर्थन को रोकने के लिए आसमान की निगरानी कर रहे हैं और विदेशी खुफिया सूचनाओं के संभावित दुरुपयोग से भी सतर्क हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि यह रिपोर्ट हमें एक गंभीर खतरे की ओर इशारा करती है। पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा आतंकवाद का समर्थन एक चिंताजनक स्थिति है। हमें इस पर ध्यान देना होगा और अपनी सुरक्षा को मजबूत करना होगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएसआई का आतंकवाद में क्या भूमिका है?
आईएसआई आतंकवाद को राज्य नीति का एक औजार मानती है और विभिन्न आतंकवादी समूहों को सहयोग देती है।
लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट के बीच क्या संबंध है?
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों समूह आईएसआई की निगरानी में एकजुट हो रहे हैं।
पाकिस्तान की डीप स्टेट क्या है?
डीप स्टेट से तात्पर्य उन गुप्त शक्तियों से है, जो सरकार के नियंत्रण से बाहर काम करती हैं।
क्या भारत इस खतरे से निपट सकता है?
हां, भारतीय सुरक्षा बल अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और इस खतरे का सामना करने के लिए तैयार हैं।
इस गठजोड़ का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य भारत के खिलाफ लंबे समय तक हिंसा की रणनीति को आगे बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले