क्या पाकिस्तानी आतंकी संगठन ढांचा पुनर्निर्माण और नई भर्ती में जुटे हैं?

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क्या पाकिस्तानी आतंकी संगठन ढांचा पुनर्निर्माण और नई भर्ती में जुटे हैं?

सारांश

क्या पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन गाजा संकट का लाभ उठाकर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं? एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ये संगठन नए सदस्यों की भर्ती और अपने ढांचे के पुनर्निर्माण में जुटे हैं। जानिए पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा संकट का लाभ उठा रहे हैं।
  • ये संगठन डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से धन जुटा रहे हैं।
  • इनकी गतिविधियों का प्रभाव भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

एथेंस, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों का संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) गाजा में चल रहे संकट का लाभ उठाकर अपने आतंकी ढांचे को फिर से बनाने और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नए सदस्यों की भर्ती में व्यस्त हैं। एक विस्तृत रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी प्रणाली में मौजूद खामियों का पता लगाया है। इसके बाद, पाकिस्तान की पिछले ग्रे-लिस्टिंग के अनुभव से सीख लेते हुए, आतंकवादी संगठनों ने अपने धन जुटाने के तरीकों में बदलाव किया है।

थिंक टैंक 'जियोपॉलिटिको' की रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तान में एक खतरनाक प्रवृत्ति उभर रही है, जहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा में राहत के नाम पर धन जुटाकर उसे आतंकवादी गतिविधियों में उपयोग कर रहे हैं। यह चिंताजनक है कि जैश के प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों की भी इन नए वित्तीय अभियानों में सीधी भूमिका रही है।”

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एफएटीएफ जैसे अंतरराष्ट्रीय निगरानी संगठनों की निगाहों से बचने के लिए, इन आतंकी संगठनों ने अपने कार्य करने के तरीके में बदलाव किया है। अब ये संगठन सीधे डिजिटल वॉलेट्स में धन एकत्र कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय जांच से बचा जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए इज़राइल-हमास युद्ध ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों को अपने धन जुटाने के प्रयासों को तेज करने का एक सुविधाजनक बहाना प्रदान किया है।

जियोपॉलिटिको ने यह भी बताया है कि मसूद अजहर का बेटा हम्माद अजहर और भाई तल्हा अल-सैफ गाजा में सहायता के नाम पर आतंक के लिए धन जुटाने की मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके लिए वे ईज़ीपैसा, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल वॉलेट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों का प्रयोग कर रहे हैं। इन दोनों का धन धार्मिक कार्यों, 300 से अधिक मस्जिदों के पुनर्निर्माण और अन्य सुविधाओं के नाम पर इकट्ठा किया जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये आतंकवादी संगठन 1990 के दशक से ही खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों में बसे पाकिस्तानी प्रवासी नेटवर्क के माध्यम से फर्जी चैरिटी संगठनों के जरिए धन जुटाते रहे हैं। राहत कार्यों के नाम पर इकट्ठा किया गया धन जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने और 2008 के मुंबई हमलों जैसे बड़े आतंकी हमलों में उपयोग किया गया है।

Point of View

NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा संकट का फायदा उठा रहे हैं?
जी हां, ये संगठन गाजा में चल रहे संकट का लाभ उठाकर अपने ढांचे के पुनर्निर्माण और नए सदस्यों की भर्ती कर रहे हैं।
इन संगठनों के धन जुटाने के तरीके क्या हैं?
ये संगठन अब डिजिटल वॉलेट्स और ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग कर धन जुटा रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचा जा सके।
इनकी गतिविधियों का प्रभाव क्या है?
इनकी गतिविधियों से भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
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