आईएसआई की नई चाल: फिलिस्तीन-कश्मीर को जोड़कर आतंकी भर्ती बढ़ाने की कोशिश, सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक नई वैचारिक रणनीति अपनाई है — फिलिस्तीन के मुद्दे को कश्मीर से जोड़कर घाटी के युवाओं को पुनः आतंकी संगठनों की ओर आकर्षित करने का प्रयास। जाँच एजेंसियों का कहना है कि इस अभियान के तहत हमास, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को एक साझा मंच पर लाया जा रहा है, जो परिचालन बदलावों से कहीं अधिक खतरनाक वैचारिक खतरा पैदा कर सकता है।
रावलकोट बैठक: तीन संगठन, एक एजेंडा
5 फरवरी 2025 को रावलकोट में हमास, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का शीर्षक था — 'कश्मीर एकजुटता और हमास ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड'। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में ड्रोन के इस्तेमाल जैसे परिचालन मुद्दों पर भी चर्चा हुई, लेकिन मूल उद्देश्य फिलिस्तीन और कश्मीर के संघर्षों को एक 'प्रतिरोध आंदोलन' के रूप में एकीकृत रूप से प्रस्तुत करना था।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन बैठकों की तस्वीरें और वीडियो अब कश्मीर से जुड़े सोशल मीडिया समूहों में फैलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय लोगों में यह भावना पैदा की जा सके कि उनका मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जा रहा है।
आईएसआई की बदलती रणनीति का कारण
अधिकारियों के अनुसार, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी भर्ती में उल्लेखनीय गिरावट आई है और कई ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क ध्वस्त किए जा चुके हैं। इससे आईएसआई समर्थित तत्वों के लिए घाटी में काम करना कठिन हो गया है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान का पारंपरिक प्रचार तंत्र अब कमज़ोर पड़ रहा है, क्योंकि घाटी के लोगों को यह समझ आ रहा है कि हिंसा का रास्ता उनके लिए लाभकारी नहीं है। ऐसे में आईएसआई को हमास के 'ब्रांड' की ज़रूरत पड़ रही है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचाना जाता है।
वैचारिक खतरा: परिचालन बदलावों से भी बड़ा
सुरक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि जैश और लश्कर द्वारा अपनाए जा रहे परिचालन बदलावों की तुलना में यह वैचारिक अभियान कहीं अधिक दीर्घकालिक खतरा उत्पन्न कर सकता है। अधिकारी ने कहा, 'संभावना है कि कुछ लोग इस प्रचार के जाल में फंस जाएं और हमास के नाम को जोड़कर चलाया जा रहा यह अभियान भर्ती बढ़ाने में मददगार साबित हो।'
यह ऐसे समय में आया है जब हमास-जैश-लश्कर गठजोड़ कश्मीर में हमलों के तरीकों में बदलाव की कोशिश भी कर रहा है। हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार, हमास-शैली के हमलों को अपनाने की चर्चा तो है, लेकिन असली दाँव वैचारिक पुनर्जागरण पर लगाया गया है।
अनुच्छेद 370 के बाद कश्मीर में बदलाव
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में कमी और पर्यटन में वृद्धि दोनों दर्ज की गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नई भर्तियों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो आईएसआई के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने कश्मीर के मुद्दे को किसी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष से जोड़ने की कोशिश की हो — लेकिन हमास जैसे संगठन को सीधे इस अभियान में शामिल करना एक नया और चिंताजनक आयाम है। आने वाले समय में भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इस वैचारिक प्रचार अभियान की काट के लिए अपनी रणनीति और पुख्ता करने की दिशा में काम कर रही हैं।