हरसिमरत कौर बादल ने मानसा एसएसपी के खिलाफ लोकसभा स्पीकर से माँगी विशेषाधिकार हनन कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 31 अक्टूबर 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को औपचारिक नोटिस सौंपकर मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वैभव चौधरी के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया है। उनका आरोप है कि एसएसपी ने एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के संवैधानिक कर्तव्यों में जानबूझकर बाधा डाली और नशे से हुई एक युवक की मौत के मामले में उनकी चिंताओं को दरकिनार किया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण मानसा जिले के सीमांत किसान दलजीत सिंह की मृत्यु से जुड़ा है, जिनकी जान कथित तौर पर नशीले पदार्थों के सेवन के बाद चली गई। सांसद बादल के अनुसार, परिवार की स्पष्ट इच्छा के विरुद्ध पुलिस ने बल प्रयोग कर शव को अपने कब्जे में ले लिया और मृतक के पिता जरनैल सिंह को भी साथ ले गई।
परिवार चाहता था कि शव को मानसा के उस धरना स्थल पर ले जाया जाए, जहाँ नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का परिवार प्रदर्शन कर रहा था। पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया। बादल का दावा है कि इसके बाद शव को एम्स बठिंडा में रखा गया और परिवार को स्वयं वहाँ जाकर लेने को कहा गया।
लोकसभा नियम 223 के तहत औपचारिक नोटिस
हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा के नियम 223 के तहत औपचारिक नोटिस देकर विशेषाधिकार हनन का प्रश्न उठाने की अनुमति माँगी है। उन्होंने पंजाब सरकार से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब करने और संबंधित सभी अभिलेख — जिनमें एफआईआर, जाँच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जरनैल सिंह की हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं — लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत करने की माँग भी की है।
29 अक्टूबर की बातचीत की रिकॉर्डिंग सौंपी
सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष को एसएसपी वैभव चौधरी के साथ 29 अक्टूबर को हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी है। उनका दावा है कि इस रिकॉर्डिंग में अधिकारी की लापरवाही और निष्पक्ष जाँच में बाधा डालने के प्रयासों का प्रमाण स्पष्ट रूप से सुनाई देता है।
बादल के अनुसार, बातचीत के दौरान एसएसपी ने बार-बार उनकी बात काटी, उनके कथनों को 'गलत कहानी' बताया और उनकी चिंताओं को अनुचित करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसएसपी ने जरनैल सिंह को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से संबंधित उपलब्ध फोटोग्राफिक साक्ष्यों की जानकारी होने से भी इनकार किया और मामले में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी।
नशे के खिलाफ लड़ाई और प्रशासनिक प्राथमिकता पर सवाल
सांसद बादल ने कहा कि ड्रग्स की आपूर्ति करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन का ध्यान अन्य मुद्दों पर केंद्रित दिखाई दिया, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हुई। गौरतलब है कि पंजाब में नशे की समस्या वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रही है, और यह मामला उसी व्यापक संदर्भ में उभरा है।
आगे क्या होगा
अब निगाहें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर टिकी हैं कि वे विशेषाधिकार हनन प्रश्न उठाने की अनुमति देते हैं या नहीं। यदि अनुमति मिलती है, तो मामला विशेषाधिकार समिति के पास जा सकता है। इस घटनाक्रम से पंजाब में सत्तारूढ़ सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।