स्वामी प्रसाद मौर्य का अखिलेश यादव पर पलटवार: आजम खान मुद्दे पर सपा का 'असली चेहरा' बेनकाब
सारांश
मुख्य बातें
अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने 31 अक्टूबर 2026 को जौनपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर कड़ा पलटवार किया और कहा कि अभी सर्टिफिकेट देने का नहीं, बल्कि अखिलेश की बातों का जवाब देने का समय है। मौर्य ने आरोप लगाया कि आजम खान के कठिन वक्त में सपा ने उनका साथ छोड़ दिया और भाजपा से जुड़े व्यक्ति को राज्यसभा भेज दिया।
आजम खान मुद्दे पर सपा पर हमला
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, 'पूरा मुस्लिम समाज देख रहा है कि आजम खान के साथ जिस राजनीतिक द्वेष भावना से काम किया गया है, वह लोकतंत्र पर एक बड़ा दाग है। आने वाले समय में भाजपा को यह सौदा बहुत महंगा पड़ेगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान जैसे वरिष्ठ नेता को तथ्यहीन आरोपों के आधार पर पूरे परिवार सहित परेशान किया गया और जेल भेजा गया।
मौर्य ने यह भी कहा कि इतने बुरे वक्त में भी समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के पुराने साथी आजम खान के साथ सपा कभी मजबूती से खड़ी नहीं दिखी। जब राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने का अवसर आया तब आजम खान की पत्नी को भेजने के बजाय कथित तौर पर भाजपा से जुड़े व्यक्ति को राज्यसभा भेजा गया।
अखिलेश यादव पर सीधा निशाना
स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीखे शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव का असली चेहरा अब सामने आ चुका है। उन्होंने कहा, 'पूरा प्रदेश देख रहा है और जान रहा है कि अखिलेश यादव किसके इशारे पर काम कर रहे हैं।' मौर्य ने आरोप लगाया कि देश का दलित, पिछड़ा और मुस्लिम समाज समझ गया है कि अखिलेश यादव कहीं न कहीं भाजपा के इशारे पर गठबंधन को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
रामलीला मैदान रैली की तैयारी
मौर्य ने बताया कि इंडिया ब्लॉक का एक बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने जा रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों मतदाताओं को सूची से बाहर करने की साजिश के विरोध में यह ऐतिहासिक प्रदर्शन होगा। उन्होंने कहा कि वे इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो रहे हैं।
तीन प्रमुख मांगें
मौर्य ने 'ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ, लोकतंत्र बचाओ' के बैनर तले तीन मांगें रखीं। पहली मांग — मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा। दूसरी मांग — एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से हटाए गए करोड़ों मतदाताओं के नाम पुनः सूची में शामिल किए जाएं। तीसरी मांग — ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं।
विधान परिषद चुनाव पर तंज
गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रभाव कोई नहीं हटा सकता, मौर्य ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में भाजपा की जो किरकिरी हुई है, उस पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन की दरारें और विपक्षी दलों के आंतरिक टकराव खुलकर सामने आ रहे हैं।