सुवेंदु अधिकारी का CPI(M)-TMC गठबंधन पर तीखा कटाक्ष, 'बेबी और आंटी दोस्त बन गए'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 31 अक्टूबर 2026 को पश्चिम मिदनापुर जिले के गरबेटा में एक जनसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नव-निर्मित राष्ट्रीय गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया। यह गठबंधन विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर बना है। अधिकारी ने दोनों दलों को सार्वजनिक रूप से राज्य की जनता द्वारा 'महत्वहीन' कर दिए जाने की चेतावनी दी।
मुख्य बयान और कटाक्ष
अधिकारी ने CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, 'आज दिल्ली में 'बेबी' और 'आंटी' दोस्त बन गए हैं। दोनों के बीच राजनीतिक जुड़ाव पैदा हो गया है। इसीलिए जब विकास होता है, तो अशांति भी फैलती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष वर्ग के लोग अब अपना वेश बदलकर 'लाल वस्त्र' पहनने की कोशिश कर रहे हैं, जो कथित तौर पर वैचारिक अवसरवाद की ओर इशारा है।
पाँच साल के संघर्ष का ज़िक्र
अधिकारी ने स्मरण दिलाया कि 2021 से 2026 के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने पश्चिम मिदनापुर में TMC और CPI(M) दोनों के विरुद्ध संघर्ष किया। उन्होंने इसी वर्ष जनवरी में पश्चिम मिदनापुर के चंद्रकोना रोड पर अपने काफिले पर हुए हमले का भी उल्लेख किया और कहा, 'मैं किसी को नहीं भूला हूँ।' उन्होंने उस दौरान अपने साथ खड़े रहने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेताओं को 'सलाम' किया।
CPI(M) के खिलाफ पुरानी फाइलें खोलने की चेतावनी
मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि उनकी सरकार वाम मोर्चा शासनकाल के दौरान पश्चिम मिदनापुर में CPI(M) नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा आम जनता पर किए गए कथित अत्याचारों से जुड़ी फाइलें फिर से खोलेगी। इसके अतिरिक्त, जिले में CPI(M) नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित दस्तावेज़ भी दोबारा जाँचे जाएँगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद BJP सरकार विपक्षी दलों पर प्रशासनिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि CPI(M) और TMC दशकों से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं — वाम मोर्चा के 34 वर्षों के शासन के बाद 2011 में ममता बनर्जी ने सत्ता हासिल की थी। दोनों दलों का राष्ट्रीय मंच पर एकजुट होकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और CEC की नियुक्ति पर सवाल उठाना भारतीय जनता पार्टी को उन्हें 'सुविधाजनक राजनीति' का उदाहरण बताने का अवसर दे रहा है।
आगे की राजनीति
अधिकारी के इस बयान को आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और राज्य की राजनीतिक पुनर्संरचना के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनकी सरकार द्वारा पुरानी फाइलें खोलने की घोषणा यदि अमल में आती है, तो यह विपक्षी दलों के लिए बड़ी कानूनी और राजनीतिक चुनौती बन सकती है।