सुवेंदु अधिकारी का तृणमूल-सीपीआई(एम) गठजोड़ पर तंज: 'यह सुविधा की शादी है'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने 27 सितंबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) के बीच राष्ट्रीय स्तर पर उभरती राजनीतिक समझ को परोक्ष रूप से 'सुविधा की शादी' करार दिया। यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच कथित तौर पर हो रहे संवाद को लेकर चल रही अटकलों के बीच आई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सतह पर आया, जिसमें दावा किया गया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर मतभेदों के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई(एम) दशकों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।
अधिकारी ने इस कथित समझ पर सीधे निशाना साधते हुए कहा, 'एम.ए. बेबी और ममता बनर्जी के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का मकसद साफ तौर पर राजनीतिक समझ बनाना था। एक समय था जब पश्चिम बंगाल की जनता ने सीपीआई(एम) को हटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया था। और अब तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई(एम) दोस्त बन गए हैं।'
अधिकारी का सीधा हमला
अधिकारी ने आगे कहा, 'ममता बनर्जी ने सीपीआई(एम) से हाथ मिला लिया है। यह सब सिर्फ खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इन सबके बावजूद वह राज्य में अपनी स्थिति नहीं बदल पाएंगी।' यह टिप्पणी उस ऐतिहासिक तथ्य की याद दिलाती है जब ममता बनर्जी ने वामपंथी मोर्चे के 34 साल के शासन को चुनौती देकर सत्ता हासिल की थी।
अधिकारी ने SIR पर ममता बनर्जी के रुख को भी निशाने पर लिया। उन्होंने ममता के उस आरोप का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि SIR के कारण पश्चिम बंगाल में 27 लाख से अधिक असली वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट और SIR विवाद
अधिकारी ने कहा, 'अब वह अपनी हार का दोष भाजपा, ECI और SIR पर मढ़ रही हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वह खुद SIR के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय गई थीं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। इन न्यायिक अधिकारियों ने ही फैसले लिए थे।' यह बयान ममता बनर्जी के उस आख्यान को सीधे चुनौती देता है जिसमें वे ECI की प्रक्रिया को विवादित बताती रही हैं।
चुनावी नतीजों पर अधिकारी का दावा
अधिकारी ने चुनावी परिणामों का हवाला देते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल में हमने 208 सीटें जीतीं। तृणमूल कांग्रेस सिमटकर सिर्फ 80 सीटों पर रह गई। ममता बनर्जी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। अब तो उन्होंने उस पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी खो दिया है जिसे उन्होंने ही बनाया था।' यह दावा पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए बड़े उलटफेर को रेखांकित करता है।
श्रीरामपुर रैली पर कटाक्ष
अधिकारी ने शनिवार दोपहर हुगली जिले के श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों की कथित तौर पर बेहद कम मौजूदगी का भी मजाक उड़ाया, जिसे उन्होंने पार्टी की घटती जमीनी ताकत का प्रमाण बताया। आने वाले समय में दोनों दलों के बीच यह राजनीतिक तकरार और तीखी होने के संकेत हैं।