31 अक्टूबर 2026
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कोयंबटूर जेल से विचाराधीन कैदी राघवन फरार, तमिलनाडु में तीसरी जेल-सुरक्षा चूक

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कोयंबटूर जेल से विचाराधीन कैदी राघवन फरार, तमिलनाडु में तीसरी जेल-सुरक्षा चूक

सारांश

कोयंबटूर में जेल-प्रवेश के दौरान हथकड़ी हटाते ही कैदी राघवन फरार — यह तमिलनाडु में कुछ हफ्तों में तीसरी जेल-सुरक्षा चूक है और मुख्यमंत्री की चेतावनी के कुछ घंटों बाद ही हुई। विपक्ष ने जवाबदेही और तत्काल सुधार की माँग उठाई।

मुख्य बातें

31 अक्टूबर 2026 की रात कोयंबटूर केंद्रीय जेल में दाखिले के दौरान विचाराधीन कैदी राघवन पुलिस हिरासत से फरार हो गया।
राघवन को अन्नूर पुलिस ने डकैती मामले में गिरफ्तार किया था; जेल-प्रवेश के दौरान हथकड़ियाँ हटाई गईं तभी वह भागा।
यह राघवन का भागने का दूसरा प्रयास था — पहले वह अन्नूर में गिरफ्तारी के वक्त भागा था, लेकिन पकड़ा गया था।
यह घटना चेन्नई पुझल जेल और थेनी थेक्कम्पट्टी उप-जेल की ऐसी ही हालिया घटनाओं के बाद राज्य में तीसरी ऐसी चूक है।
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास और AIADMK महासचिव एडप्पाडी के.
पलानीस्वामी ने कड़ी कार्रवाई व जेल-सुरक्षा सुधार की माँग की।

तमिलनाडु के कोयंबटूर केंद्रीय जेल में 31 अक्टूबर 2026 की देर रात एक विचाराधीन कैदी राघवन पुलिस हिरासत से फरार हो गया — और यह राज्य में कुछ ही हफ्तों में जेल-सुरक्षा की तीसरी बड़ी चूक है। अन्नूर पुलिस द्वारा डकैती के मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे गए राघवन को जेल में दाखिल कराने की प्रक्रिया के दौरान उसने मौका पाकर सुरक्षाकर्मियों से छूट लिया।

घटनाक्रम: कैसे हुई चूक

पुलिस अधिकारी राघवन को कोयंबटूर जेल के बाहरी द्वार से भीतरी द्वार की ओर ले जा रहे थे। इसी प्रवेश-प्रक्रिया के दौरान उसकी हथकड़ियाँ हटा दी गईं, जिसे राघवन ने भागने के अवसर के रूप में भुनाया और सुरक्षाकर्मियों की पकड़ से निकलकर फरार हो गया। रेस कोर्स पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी सक्रिय तलाश शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि राघवन का यह भागने का दूसरा प्रयास था। इससे पहले वह अन्नूर में गिरफ्तारी के दौरान भी भाग निकला था, लेकिन शीघ्र ही पकड़ा गया था। इस पृष्ठभूमि के बावजूद उसकी निगरानी में स्पष्ट रूप से अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई।

तमिलनाडु में जेल-सुरक्षा की बढ़ती चिंता

यह घटना चेन्नई की पुझल केंद्रीय जेल और थेनी की थेक्कम्पट्टी उप-जेल में हाल ही में हुई इसी प्रकार की घटनाओं के बाद सामने आई है। यह ऐसे समय में आई है जब राज्य के मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर जेल कर्मियों को लापरवाही के प्रति कुछ ही घंटे पहले आगाह किया था — जिससे सरकारी चेतावनियों की व्यावहारिक प्रभावशीलता पर ही सवाल उठ खड़े हुए हैं।

इन घटनाओं की पुनरावृत्ति ने पुलिस हिरासत से जेल-प्रशासन को कैदी सौंपने की प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया है। विशेष रूप से प्रवेश-द्वार के बीच के क्षेत्र में हथकड़ी हटाने की प्रक्रिया को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कोयंबटूर की घटना के लिए सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने ऐसी घटनाओं को सर्वथा अस्वीकार्य बताया और माँग की कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। रामदास ने चेन्नई व थेनी की पूर्व घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार से राज्य की सभी जेलों में सुरक्षा तंत्र को तत्काल सुदृढ़ करने का आग्रह किया।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए सत्तारूढ़ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कैदियों के बार-बार भागने की घटनाओं की तुलना एक टीवी सीरियल से करते हुए आरोप लगाया कि बेहतर सुरक्षा के आश्वासनों के बावजूद प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने में विफल साबित हो रहा है।

जवाबदेही और आगे की राह

विपक्षी दलों ने एकजुट होकर राज्य सरकार से जेल-प्रवेश प्रोटोकॉल की समीक्षा, जिम्मेदार कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई और सुरक्षा-उन्नयन के लिए ठोस समयसीमा की माँग की है। राघवन की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है और तमिलनाडु जेल विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। यह घटना राज्य में जेल-सुधार की बहस को नई धार देने की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक प्रणालीगत विफलता का संकेत है — जब मुख्यमंत्री की चेतावनी के कुछ घंटों के भीतर ही कैदी भाग निकले, तो सवाल उठता है कि क्या राज्य की जेल-प्रबंधन व्यवस्था में जवाबदेही का तंत्र वाकई काम कर रहा है। तीन अलग-अलग जेलों में इतने कम समय में एक जैसी घटनाओं का दोहराव बताता है कि खामी किसी एक चौकीदार की नहीं, बल्कि हस्तांतरण-प्रोटोकॉल की संरचना में है। विपक्ष का आक्रोश स्वाभाविक है, लेकिन असली परीक्षा सरकार की उस प्रतिक्रिया से होगी जो सुर्खियों से परे जाकर प्रवेश-द्वार प्रक्रिया में ठोस बदलाव लाए।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोयंबटूर जेल से कौन फरार हुआ और क्यों?
डकैती के आरोप में अन्नूर पुलिस द्वारा गिरफ्तार विचाराधीन कैदी राघवन 31 अक्टूबर 2026 की रात कोयंबटूर केंद्रीय जेल में दाखिले की प्रक्रिया के दौरान फरार हो गया। जेल के दो मुख्य द्वारों के बीच हथकड़ी हटाए जाने के क्षण का उसने फायदा उठाया।
तमिलनाडु में हाल ही में कितनी जेल-सुरक्षा चूकें हुई हैं?
कोयंबटूर की यह घटना राज्य में तीसरी ऐसी हालिया चूक है — इससे पहले चेन्नई की पुझल केंद्रीय जेल और थेनी की थेक्कम्पट्टी उप-जेल में भी इसी तरह की घटनाएँ सामने आई थीं। इन घटनाओं की पुनरावृत्ति ने राज्य की जेल-सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
क्या राघवन पहले भी भागने की कोशिश कर चुका था?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार यह राघवन का भागने का दूसरा प्रयास था। इससे पहले अन्नूर में गिरफ्तारी के दौरान वह फरार हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद पकड़ा गया था। इस पृष्ठभूमि के बावजूद उसकी निगरानी में पर्याप्त सावधानी न बरतना सुरक्षाकर्मियों की चूक मानी जा रही है।
विपक्षी नेताओं ने क्या माँग की है?
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और सभी जेलों में सुरक्षा-सुधार की माँग की है। AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने एक्स पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बेहतर सुरक्षा के आश्वासनों के बावजूद प्रशासन इन घटनाओं को रोकने में विफल रहा है।
कोयंबटूर जेल की घटना से जेल-प्रवेश प्रक्रिया पर क्या सवाल उठे हैं?
इस घटना ने दो सुरक्षा द्वारों के बीच के क्षेत्र में हथकड़ी हटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि पुलिस से जेल-प्रशासन को कैदी सौंपने के दौरान मानक प्रोटोकॉल की समीक्षा और सख्त क्रियान्वयन आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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