नागरकोइल सब-जेल हिरासत मौत: 8 कैदी और 3 वार्डन गिरफ्तार, पोस्टमार्टम में 19 चोटों के निशान
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नागरकोइल सब-जेल में रिमांड पर बंद कारोबारी सबरिवर्मन की हिरासत में हुई मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर हमले में शामिल 8 कैदियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए 3 जेल वार्डनों को भी जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। आसरिपल्लम सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम में सबरिवर्मन के शरीर पर 19 बाहरी चोटों के निशान मिले हैं, जो न्यायिक हिरासत के दौरान बेरहम मारपीट की ओर इशारा करते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
12 जुलाई की रात नागरकोइल सब-जेल के अंदर सबरिवर्मन का कुछ कैदियों से विवाद हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, पहले सबरिवर्मन के हाथ और पैर बांधे गए, इसके बाद कैदियों ने वार्डनों की कथित मिलीभगत से उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल होने के बाद वे बेहोश हो गए।
जेल कर्मचारी उन्हें इलाज के लिए आसरिपल्लम सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो चुकी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और गंभीर बना दिया, जिसमें शरीर पर 19 बाहरी चोटों के निशान दर्ज किए गए।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने हमले में शामिल बताए जा रहे आठ कैदियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया है। गिरफ्तार कैदियों में विष्णु (21), सारथी (19), जेगन (40), शरत (20), वेरियापेरुमल (36), सेतुराम (30), अजीत (29) और अरविंद (27) शामिल हैं। इन सभी पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
इससे पहले पुलिस ने मुख्य वार्डन तिरुमलैनंबी तथा वार्डन जेगन और शिवकुमार को गिरफ्तार किया था। जेल प्रशासन ने तीनों अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।
जांच का दायरा
पुलिस अब गिरफ्तार वार्डनों और कैदियों से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियाँ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस घटना में अन्य जेल कर्मचारी या कैदी भी शामिल थे, अथवा उन्हें इस हमले की पहले से जानकारी थी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देश में हिरासत में होने वाली मौतों और जेल प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
परिवार की माँगें और जन-समर्थन
सबरिवर्मन के परिजनों ने लगातार तीसरे दिन भी शव लेने से इनकार कर दिया। परिवार की तीन प्रमुख माँगें हैं — दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, सरकार की ओर से उचित मुआवजा, और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
आसरिपल्लम सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, समर्थक और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। सभी ने हिरासत में हुई इस मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
आगे क्या होगा
जांच एजेंसियाँ अभी भी यह निर्धारित करने में जुटी हैं कि वार्डनों की मिलीभगत किस हद तक थी और क्या जेल प्रशासन की व्यवस्थागत चूक इस घटना के लिए जिम्मेदार है। यह मामला तमिलनाडु में जेल सुधार और हिरासत में मानवाधिकारों की रक्षा के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।