थेनी जेलब्रेक: पलानीस्वामी ने TVK सरकार पर साधा निशाना, 17 कैदी फरार — जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को थेनी जिले की थेक्कम्पट्टी जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने की घटना पर TVK सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य के जेल प्रशासन और कानून-व्यवस्था की गहरी विफलताओं को उजागर करती है।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार रात जेल में बंद विचाराधीन कैदियों ने गार्डों पर हमला किया और थेक्कम्पट्टी जेल से फरार हो गए। पुलिस की विशेष टीमों ने अब तक इनमें से चार कैदियों को पकड़ लिया है, जबकि शेष 13 कैदियों की तलाश जारी है। यह घटना ऐसे समय में आई है जब राज्य की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में है।
पलानीस्वामी का हमला
पलानीस्वामी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस फरारी की घटना को 'चौंकाने वाला' करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले पुझल जेल से भी दो कैदी फरार हो चुके थे, और सवाल उठाया कि उस घटना के बाद भी सरकार ने तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। उनके अनुसार, पिछली घटना के बाद ही सभी जेलों की सुरक्षा की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित मंत्री ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप यह दूसरी बड़ी जेल-फरारी की घटना सामने आई।
मंत्री निर्मलकुमार पर सीधा आरोप
पलानीस्वामी ने विशेष रूप से मंत्री सी.टी.आर. निर्मलकुमार को निशाने पर लिया, जिनके अधीन कानून, बिजली और जेल — तीनों विभाग आते हैं। उनका आरोप है कि ये तीनों विभाग एक साथ प्रशासनिक विफलता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी वकीलों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं, बिजली खरीद में कथित गड़बड़ियों, बिजली कटौती और अब जेल विभाग की चूक — इन सभी को एक ही कड़ी में पिरोया।
पलानीस्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि निर्मलकुमार अपने विभागों की खामियाँ दूर करने की बजाय सार्वजनिक मंचों पर एआईएडीएमके पर जुबानी हमले करने में अधिक समय बिता रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण पर सवाल
विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री विजय के पुझल जेल के पिछले निरीक्षण की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए। उनका तर्क था कि मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद जेल सुरक्षा अपर्याप्त रही, जो यह दर्शाता है कि उस दौरे से कोई सार्थक सुधार नहीं हुआ।
आम जनता पर असर और व्यापक चिंताएँ
पलानीस्वामी ने तर्क दिया कि यदि अधिकारी जेलों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाए रख सकते, तो आम जनता सड़कों पर खुद को सुरक्षित कैसे महसूस कर सकती है। उन्होंने राज्य में हत्याओं और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कथित वृद्धि, बच्चों के लापता होने के मामलों और सत्ताधारी दल के एक पदाधिकारी के कथित तौर पर नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े होने के आरोपों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल के पहले 150 दिनों की इन घटनाओं को मिलाकर एक रिपोर्ट तैयार की जा सकती है — जो राज्य में कानून-व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर पेश करेगी। उन्होंने सरकार से माँग की कि फरार सभी कैदियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, जेलों की सुरक्षा तत्काल प्रभाव से मजबूत की जाए और पूरे तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए।