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टीवीके का पलानीस्वामी पर पलटवार: आलोचना को बताया 'शैतान का सत्य-प्रवचन', सथानकुलम की दिलाई याद

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टीवीके का पलानीस्वामी पर पलटवार: आलोचना को बताया 'शैतान का सत्य-प्रवचन', सथानकुलम की दिलाई याद

सारांश

तमिलनाडु में टीवीके और एआईएडीएमके के बीच सियासी जंग एक नई ऊँचाई पर पहुँच गई है। पलानीस्वामी के जेल मौतों पर हमले के जवाब में टीवीके ने सथानकुलम का दर्पण दिखाया और कहा — नैतिकता का पाठ पढ़ाने का हक़ उन्हें नहीं जिनका अपना दामन दागदार है।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के.
पलानीस्वामी ने टीवीके सरकार पर सत्ता के 60 दिनों के भीतर निर्दोष जानें जाने और मुआवजे से आवाज़ दबाने का आरोप लगाया।
नागरकोइल और पुझल जेल में हुई मौतों के विवाद इस राजनीतिक बहस की केंद्रीय वजह बने।
टीवीके ने पलानीस्वामी की आलोचना को 'शैतान का सत्य का उपदेश' करार देते हुए एआईएडीएमके की नैतिक क्षमता पर सवाल उठाए।
टीवीके ने एआईएडीएमके के शासनकाल की सथानकुलम कस्टोडियल मौतों की याद दिलाकर पलटवार किया।
सिनेमा की राजनीतिक भूमिका पर टिप्पणी को लेकर भी विवाद हुआ; टीवीके ने इसे एमजीआर और जयललिता का अपमान बताया।

तमिलनाडु में सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) और मुख्य विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के बीच 19 जुलाई को तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई, जब विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने राज्य सरकार पर निर्दोष लोगों की जान बचाने में नाकाम रहने और मुआवजे के ज़रिए पीड़ित परिवारों की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। टीवीके ने अपनी आईटी विंग के माध्यम से जवाबी हमला बोलते हुए पलानीस्वामी की आलोचना को 'शैतान का सत्य का उपदेश देने' जैसा करार दिया।

पलानीस्वामी के आरोप

एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने दावा किया कि टीवीके सरकार ने सत्ता संभालने के महज 60 दिनों के भीतर ही निर्दोष लोगों की जान पर मोल-भाव शुरू कर दिया। उन्होंने नागरकोइल और पुझल जेल में हुई हालिया मौतों से जुड़े विवादों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने की बजाय मुआवजे की पेशकश से जनता के आक्रोश को शांत करने की कोशिश कर रही है।

पलानीस्वामी ने तमिलनाडु की जनता की दुर्दशा की तुलना 'हाथी की पकड़ से बचकर मगरमच्छ के जबड़े में गिरने' से की और सरकार से मतदाताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने का आग्रह किया।

टीवीके का पलटवार

टीवीके ने अपनी आईटी विंग के ज़रिए उतने ही आक्रामक अंदाज़ में जवाब दिया। पार्टी ने एआईएडीएमके नेतृत्व पर आरोप लगाया कि उनमें साफ-सुथरे शासन की बात करने की नैतिक क्षमता नहीं है। पार्टी का तर्क था कि जो लोग राजनीतिक सत्ता के लिए सब कुछ कर चुके हैं, वे अब नैतिक राजनीति की वकालत का दिखावा कर रहे हैं।

गौरतलब है कि टीवीके ने एआईएडीएमके के शासनकाल में हुई सथानकुलम कस्टोडियल मौतों की याद दिलाई और पूछा कि क्या तमिलनाडु की जनता उस घटना को भूल गई है। पार्टी ने तर्क दिया कि एआईएडीएमके उस स्थिति में नहीं है कि वह न्याय, कानून-व्यवस्था या मानवाधिकार संरक्षण जैसे मुद्दों पर मौजूदा सरकार को नसीहत दे।

सिनेमा और राजनीति पर विवाद

टीवीके ने राजनीति में सिनेमा की भूमिका को कमतर आँकने वाली टिप्पणियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि एआईएडीएमके की ओर से सिनेमा का मज़ाक उड़ाने की कोई भी कोशिश, पार्टी के दो सबसे बड़े नेताओं — पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) और जे. जयललिता — का अपमान करने के समान है। ये दोनों नेता फिल्म उद्योग में शानदार करियर के बाद राजनीति के शिखर पर पहुँचे थे।

आम जनता पर असर और आगे की राह

टीवीके ने अपने बयान के अंत में कहा कि जनता उन हमलों पर बारीकी से नज़र रख रही है, जिन्हें पार्टी ने भ्रष्टाचार और रिश्वत-मुक्त शासन के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री पर राजनीतिक मकसद से किए गए हमले बताया। यह घटनाक्रम टीवीके और एआईएडीएमके के बीच बढ़ती कड़वी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में एक और नए अध्याय को रेखांकित करता है — और आने वाले समय में यह टकराव और तीखा होने के संकेत दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हिरासत में मौतें, जवाबदेही — को हाशिये पर धकेल देते हैं। सथानकुलम की याद दिलाना रणनीतिक रूप से कारगर है, लेकिन यह नागरकोइल और पुझल के पीड़ित परिवारों के सवालों का जवाब नहीं है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पार्टियाँ हिरासत में मौतों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं, जबकि ज़रूरत व्यवस्थागत सुधार की है। जब तक यह बहस व्यक्तिगत हमलों तक सीमित रहेगी, तब तक तमिलनाडु की जेल प्रणाली में जवाबदेही की माँग अनुत्तरित ही रहेगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीवीके और एआईएडीएमके के बीच यह विवाद किस बात पर छिड़ा?
यह विवाद नागरकोइल और पुझल जेल में हुई हालिया मौतों पर छिड़ा। एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने टीवीके सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्याय देने की बजाय मुआवजे से पीड़ित परिवारों को चुप कराने की कोशिश कर रही है।
टीवीके ने पलानीस्वामी की आलोचना को 'शैतान का प्रवचन' क्यों कहा?
टीवीके का तर्क है कि जिस एआईएडीएमके के शासनकाल में सथानकुलम जैसी कस्टोडियल मौतें हुईं, उस पार्टी को मानवाधिकार या जवाबदेही पर नसीहत देने का नैतिक अधिकार नहीं है। पार्टी ने इसे 'शैतान का सत्य का उपदेश' कहकर एआईएडीएमके की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
सथानकुलम कस्टोडियल मौत क्या थी?
सथानकुलम कस्टोडियल मौत तमिलनाडु में एआईएडीएमके शासनकाल के दौरान हुई एक विवादास्पद घटना थी, जिसमें पुलिस हिरासत में मौतों के आरोप लगे थे। टीवीके ने इस घटना का हवाला देकर एआईएडीएमके की आलोचना को खारिज किया।
सिनेमा और राजनीति पर विवाद क्यों हुआ?
राजनीति में सिनेमा की भूमिका को कमतर दिखाने वाली टिप्पणियों पर टीवीके ने आपत्ति जताई। पार्टी ने कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ एआईएडीएमके के संस्थापक नेताओं एमजीआर और जयललिता — जो दोनों फिल्म जगत से राजनीति में आए थे — का अपमान है।
इस राजनीतिक टकराव का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह घटनाक्रम टीवीके और एआईएडीएमके के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को और तेज़ करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जेल मौतों और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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