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तमिलनाडु मंत्री सेंगोट्टैयन ने AIADMK के हॉर्स-ट्रेडिंग आरोप को नकारा, बोले — बयान का गलत अर्थ निकाला

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तमिलनाडु मंत्री सेंगोट्टैयन ने AIADMK के हॉर्स-ट्रेडिंग आरोप को नकारा, बोले — बयान का गलत अर्थ निकाला

सारांश

तमिलनाडु मंत्री सेंगोट्टैयन का एक बयान — '15 और लोग TVK में आएंगे' — राजनीतिक भूचाल बन गया। AIADMK ने इसे हॉर्स-ट्रेडिंग बताकर राज्यपाल से शिकायत की, पर मंत्री ने दावा किया कि बयान का गलत अर्थ निकाला गया। यह विवाद दरअसल AIADMK की टूटती एकता और TVK के बढ़ते असर की कहानी है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु मंत्री सेंगोट्टैयन ने 18 अक्टूबर 2026 को AIADMK के हॉर्स-ट्रेडिंग आरोप को खारिज किया।
विवाद की जड़ मंत्री का वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा था कि '15 और लोग' TVK में शामिल होने की तैयारी में हैं।
AIADMK ने राज्यपाल आर.एल.
अर्लेकर के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
विधानसभा चुनाव के बाद छह AIADMK विधायक — जिनमें मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा शामिल हैं — पहले ही TVK में शामिल हो चुके हैं।
मंत्री ने दावा किया कि पार्टी-परिवर्तन राजनीति का सामान्य हिस्सा है और इसे हॉर्स-ट्रेडिंग नहीं कहा जा सकता।

तमिलनाडु के मंत्री सेंगोट्टैयन ने 18 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वह विधायकों की खरीद-फरोख्त यानी हॉर्स-ट्रेडिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके उस बयान का — जिसमें उन्होंने कहा था कि '15 और लोग मुख्यमंत्री विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं' — विशेष रूप से विपक्षी विधायकों से कोई संबंध नहीं था। AIADMK ने इस बयान को आधार बनाकर राज्यपाल आर.एल. अर्लेकर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

विवाद की जड़ क्या है

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंत्री सेंगोट्टैयन ने एक सार्वजनिक मंच पर दावा किया कि 15 और लोग TVK में शामिल होने की राह पर हैं। AIADMK ने इसे अपने विधायकों को तोड़ने की कोशिश बताते हुए इसे हॉर्स-ट्रेडिंग करार दिया और राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग की।

पत्रकारों द्वारा इस शिकायत पर प्रतिक्रिया माँगे जाने पर सेंगोट्टैयन ने कहा, 'मैंने कभी ऐसा कोई बयान नहीं दिया कि AIADMK के विधायक TVK में शामिल होंगे। मैंने बस इतना कहा था कि 15 लोग आएंगे, लेकिन मैंने किसी का नाम नहीं लिया। कोई भी शिकायत करने से पहले यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि असल में क्या कहा गया था।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद AIADMK में टूट की स्थिति पहले से बनी हुई है। पूर्व मंत्रियों सहित छह विधायकों ने पार्टी छोड़कर सत्ताधारी TVK में शामिल होने का निर्णय लिया था। इनमें मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा शामिल थीं, जिन्होंने बाद में TVK उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की।

गौरतलब है कि तमिलनाडु की राजनीति में पार्टी-परिवर्तन कोई नई बात नहीं है। AIADMK के भीतर और बाहर नेताओं का आना-जाना दशकों से जारी है। इस बार जो नया है, वह है — TVK का तेज़ी से बढ़ता संगठनात्मक विस्तार।

मंत्री की दलील — 'यह सामान्य राजनीति है'

सेंगोट्टैयन ने तर्क दिया कि नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना भारतीय राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा है। उन्होंने एमडीएमके के दो नेताओं के द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) में शामिल होने का उदाहरण देते हुए पूछा कि इस घटना को अलग नज़रिए से क्यों देखा जाए।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस तरह के राजनीतिक बदलाव पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल में भी हुए थे और तब भी हुए जब एडप्पादी के. पलानीस्वामी AIADMK के महासचिव थे। तब भी अन्य दलों के लोग AIADMK में आए, और कुछ AIADMK छोड़कर अन्य दलों में गए।

AIADMK का पक्ष और राज्यपाल से अपील

AIADMK ने सेंगोट्टैयन के बयान को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए राज्यपाल अर्लेकर से औपचारिक हस्तक्षेप की माँग की है। पार्टी का आरोप है कि सत्ताधारी दल व्यवस्थित तरीके से विपक्षी विधायकों को प्रलोभन देकर तोड़ने का प्रयास कर रहा है।

हालाँकि सेंगोट्टैयन ने इन आरोपों को दृढ़ता से नकारते हुए कहा, 'कोई भी समय पर काबू नहीं पा सकता और न ही इसके खिलाफ कोई जादू कर सकता है' — एक दार्शनिक टिप्पणी जिसे उन्होंने शिकायत को सिरे से खारिज करने के रूप में पेश किया।

आगे की राह

राज्यपाल कार्यालय की ओर से अभी तक AIADMK की शिकायत पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में TVK के बढ़ते प्रभाव और AIADMK की घटती ताकत के बीच बढ़ते तनाव का प्रतिबिंब है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या और नेता TVK की ओर रुख करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक संदेश बिल्कुल स्पष्ट था। छह विधायकों के दलबदल के तुरंत बाद आई यह 'सूचना' महज संयोग नहीं लगती। असली सवाल यह है कि क्या TVK का यह विस्तार वैचारिक आकर्षण से प्रेरित है या संगठित प्रलोभन से — और राज्यपाल की शिकायत इस सवाल का जवाब नहीं देती, बल्कि इसे और उलझा देती है। AIADMK के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हर शिकायत उसकी कमज़ोरी की कहानी को और पुख्ता करती है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु मंत्री सेंगोट्टैयन पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप क्यों लगा?
AIADMK ने आरोप लगाया कि मंत्री सेंगोट्टैयन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि '15 और लोग TVK में शामिल होने की तैयारी में हैं', जिसे पार्टी ने अपने विधायकों को तोड़ने की साज़िश माना। इस पर AIADMK ने राज्यपाल अर्लेकर के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
सेंगोट्टैयन ने अपने बयान का क्या स्पष्टीकरण दिया?
मंत्री ने कहा कि उनके बयान में AIADMK के विधायकों का कोई उल्लेख नहीं था और उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। उनके अनुसार, AIADMK ने बिना सही अर्थ समझे राज्यपाल के पास जाने की जल्दबाज़ी की।
तमिलनाडु में AIADMK से कितने विधायक TVK में जा चुके हैं?
विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक छह AIADMK विधायक — जिनमें पूर्व मंत्री मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा शामिल हैं — TVK में शामिल हो चुके हैं। इनमें से कुछ ने TVK उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव भी लड़ा और जीता।
क्या पार्टी बदलना कानूनी तौर पर हॉर्स-ट्रेडिंग माना जाता है?
भारतीय कानून में 'हॉर्स-ट्रेडिंग' को दलबदल विरोधी कानून के तहत तभी दंडनीय माना जाता है जब किसी विधायक का मतदान उसकी पार्टी के निर्देश के विरुद्ध हो। सेंगोट्टैयन ने तर्क दिया कि स्वेच्छा से पार्टी बदलना एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।
इस विवाद का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह विवाद TVK के बढ़ते प्रभाव और AIADMK की कमज़ोर होती स्थिति के बीच गहराते संघर्ष को उजागर करता है। राज्यपाल की प्रतिक्रिया और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि क्या यह मामला और बड़ा रूप लेता है।
राष्ट्र प्रेस
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